Chhattisgarh Mall Parking को लेकर छत्तीसगढ़ राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने 24 सितंबर 2026 को अहम फैसला सुनाया है। आयोग ने अंबुजा सिटी सेंटर मॉल प्रबंधन की अपील खारिज करते हुए जिला उपभोक्ता आयोग के उस आदेश को बरकरार रखा, जिसमें उपभोक्ताओं से पार्किंग शुल्क वसूलने को अनुचित व्यापार व्यवहार और सेवा में कमी माना गया था।
इस फैसले का सीधा संबंध रायपुर के अंबुजा सिटी सेंटर मॉल से है। जिला आयोग ने अप्रैल 2026 में मॉल प्रबंधन को उपभोक्ताओं के लिए निशुल्क पार्किंग सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था। राज्य आयोग ने अब उस आदेश को बरकरार रखा है।
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Chhattisgarh Mall Parking मामले में अंबुजा मॉल की अपील खारिज
राज्य उपभोक्ता आयोग की पीठ में अध्यक्ष न्यायमूर्ति गौतम चौरड़िया और सदस्य प्रमोद कुमार वर्मा शामिल थे। आयोग ने अंबुजा सिटी सेंटर मॉल की अपील को खारिज करते हुए जिला आयोग के फैसले को बरकरार रखा।
मामले में अधिवक्ता अंजिनेश अंजय शुक्ला परिवादी के रूप में स्वयं पैरवी कर रहे थे। उन्होंने पार्किंग शुल्क वसूली को लेकर विभिन्न न्यायिक फैसलों और उपभोक्ता अधिकारों से जुड़े कानूनी प्रावधानों का हवाला दिया था।
आयोग के फैसले में मॉल द्वारा दुकानों से सुरक्षा, बिजली, एस्केलेटर और अन्य सुविधाओं के लिए लिए जाने वाले मेंटेनेंस शुल्क का भी उल्लेख किया गया। आयोग के अनुसार, ऐसे में उपभोक्ताओं और कर्मचारियों से अलग से पार्किंग शुल्क वसूलने का मुद्दा अनुचित व्यापार व्यवहार के दायरे में आता है।
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₹30 पार्किंग शुल्क से शुरू हुआ पूरा विवाद
यह मामला 15 जून 2025 को शुरू हुआ था। अधिवक्ता अंजिनेश शुक्ला अपनी कार से अंबुजा मॉल पहुंचे थे। उनके अनुसार, वह अपनी माता को छोड़ने के लिए कुछ समय के लिए मॉल आए थे, लेकिन उनसे ₹30 पार्किंग शुल्क लिया गया।
उन्होंने पार्किंग शुल्क पर आपत्ति जताते हुए बताया कि उन्हें वाहन पार्क नहीं करना था। मॉल प्रबंधन की ओर से कथित तौर पर मुफ्त पिक-अप और ड्रॉप सुविधा उपलब्ध नहीं होने की बात कही गई।
इसके बाद शुक्ला ने जिला उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कराई और पार्किंग शुल्क वसूली को अनुचित बताते हुए कार्रवाई की मांग की। जिला आयोग ने अप्रैल 2026 में उनके पक्ष में आदेश दिया था।
Chhattisgarh Mall Parking पर आयोग ने क्या कहा?
राज्य आयोग के अनुसार, मॉल प्रबंधन द्वारा उपभोक्ताओं के लिए निशुल्क और सुरक्षित पार्किंग उपलब्ध कराना उसकी जिम्मेदारी से जुड़ा है। आयोग ने जिला आयोग के निष्कर्षों को बरकरार रखते हुए पार्किंग शुल्क नहीं लेने के निर्देश को कायम रखा।
मामले में FASTag के जरिए निजी परिसर में पार्किंग शुल्क की स्वचालित वसूली को लेकर भी आपत्ति उठाई गई थी। आयोग के सामने यह सवाल भी आया कि निजी व्यावसायिक परिसर किस आधार पर इस तरह की वसूली कर सकता है।
हालांकि, इस फैसले को समझते समय यह ध्यान रखना जरूरी है कि आदेश अंबुजा सिटी सेंटर मॉल से जुड़े विशिष्ट विवाद पर आया है। किसी दूसरे मॉल या व्यावसायिक परिसर में पार्किंग शुल्क की वैधता संबंधित भवन अनुमति, नियमों, तथ्यों और लागू कानून के आधार पर तय हो सकती है।
उपभोक्ता को ₹55 हजार का भुगतान
राज्य आयोग के फैसले के अनुसार, अंबुजा मॉल प्रबंधन को परिवादी को ₹50,000 मानसिक क्षतिपूर्ति और ₹5,000 वाद व्यय, यानी कुल ₹55,000 का भुगतान करना होगा। यह भुगतान 45 दिनों के भीतर करना होगा। देरी होने पर आदेश की तारीख से भुगतान तक 7 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देय होगा।
यह पहलू भी मामले को महत्वपूर्ण बनाता है, क्योंकि आयोग ने केवल पार्किंग शुल्क रोकने के आदेश को बरकरार नहीं रखा, बल्कि शिकायतकर्ता को क्षतिपूर्ति और वाद व्यय दिए जाने के निर्देश को भी कायम रखा।
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Chhattisgarh Mall Parking फैसले का व्यापक असर
राज्य आयोग का यह आदेश छत्तीसगढ़ में मॉल और व्यावसायिक परिसरों में पार्किंग शुल्क से जुड़े उपभोक्ता विवादों के लिए महत्वपूर्ण कानूनी संदर्भ बन सकता है। हालांकि, हर प्रतिष्ठान पर इसका प्रभाव उसके अपने तथ्यों और लागू नियमों के अनुसार निर्धारित होगा।
यदि किसी उपभोक्ता को पार्किंग शुल्क को लेकर विवाद है, तो वह संबंधित बिल, पार्किंग पर्ची, भुगतान का रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्य सुरक्षित रख सकता है। इसके बाद उचित कानूनी या उपभोक्ता शिकायत प्रक्रिया अपनाई जा सकती है।
Chhattisgarh Mall Parking मामले में राज्य उपभोक्ता आयोग ने अंबुजा सिटी सेंटर मॉल की अपील खारिज कर जिला आयोग के निशुल्क पार्किंग संबंधी आदेश को बरकरार रखा है। साथ ही ₹55 हजार की क्षतिपूर्ति और वाद व्यय का भुगतान करने का आदेश भी कायम है। यह फैसला मॉल पार्किंग शुल्क से जुड़े उपभोक्ता विवादों में एक महत्वपूर्ण कानूनी घटनाक्रम है।
