IPS Rahul Bansal पर साइबर फ्रॉड मामले को निपटाने के लिए कथित तौर पर ₹1 करोड़ लेने का आरोप सामने आने के बाद छत्तीसगढ़ में मामला चर्चा में है। सरगुजा में पदस्थ 2022 बैच के आईपीएस अधिकारी ने इन आरोपों को पूरी तरह बेबुनियाद बताया है और कहा है कि उन्हें न्यायालय और कानून पर पूरा भरोसा है।
यह मामला सरगुजा साइबर पुलिस थाने में जुलाई 2025 में दर्ज एक कथित शेयर ट्रेडिंग फ्रॉड की जांच से जुड़ा है। इस मामले में शिकायतकर्ता रवि मोहन गोस्वामी ने करीब ₹21.15 लाख की ऑनलाइन ठगी का आरोप लगाया था।
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IPS Rahul Bansal पर क्या हैं आरोप?
शिकायत के अनुसार, कथित साइबर ठगी के मामले को निपटाने के लिए ₹1 करोड़ के भुगतान का आरोप लगाया गया है। शिकायत में दावा है कि मई 2026 में हवाला के जरिए दो किस्तों में ₹50-₹50 लाख का भुगतान किया गया।
इस मामले में IPS अधिकारी राहुल बंसल के साथ सहायक उप निरीक्षक प्रवीण कुमार राठौर और कांस्टेबल अंशुल शर्मा के नाम भी शिकायत में सामने आए हैं। हालांकि, इन आरोपों को अभी आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए और अंतिम सत्य न्यायिक प्रक्रिया तथा जांच से तय होगा।
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₹21.15 लाख की साइबर ठगी से शुरू हुई जांच
मामले की शुरुआत शेयर बाजार और फॉरेक्स ट्रेडिंग के नाम पर कथित ऑनलाइन ठगी से हुई। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि उसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए निवेश के लिए आकर्षित किया गया और अलग-अलग लेनदेन में करीब ₹21.15 लाख की राशि ली गई।
जांच आगे बढ़ी तो पुलिस ने कथित तौर पर एक संगठित नेटवर्क का पता लगाया। आरोप है कि यह नेटवर्क सोशल मीडिया विज्ञापनों के माध्यम से लोगों को फर्जी ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म पर निवेश के लिए प्रेरित करता था।
₹1,880 करोड़ के क्रिप्टो ट्रांजैक्शन का दावा
जांच अधिकारियों के अनुसार, कथित नेटवर्क में फर्जी ट्रेडिंग वेबसाइट, म्यूल बैंक खाते, फिनटेक पेमेंट गेटवे, डमी कंपनियां, हवाला चैनल और क्रिप्टोकरेंसी ट्रांजैक्शन जैसी कई परतें शामिल थीं।
जांच में करीब चार महीने के दौरान कथित तौर पर ₹1,880 करोड़ के क्रिप्टोकरेंसी लेनदेन का ट्रेल सामने आने का दावा किया गया है। पुलिस के मुताबिक, नेटवर्क से जुड़े 38 ट्रेडिंग वेबसाइटों का सोर्स कोड भी बरामद किया गया।
IPS Rahul Bansal ने आरोपों को बताया बेबुनियाद
राहुल बंसल ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि शिकायत फिलहाल न्यायालय के विचाराधीन है। उन्होंने कहा कि उन्हें अदालत और कानून पर पूरा विश्वास है।
बंसल के अनुसार, जांच में एक संगठित साइबर गैंग का पता चला था, जो शुरुआत में दुबई से संचालित होने और बाद में भारत में गतिविधियां चलाने का आरोप है। उन्होंने बताया कि मामले में 23 आरोपियों को आठ राज्यों से गिरफ्तार किया गया तथा हजारों पन्नों की पांच चार्जशीट और डिजिटल साक्ष्य अदालत में पेश किए गए हैं।
कोर्ट ने DGP और CBI से मांगी रिपोर्ट
मामले ने तब और गंभीर रूप लिया जब दिल्ली की एक विशेष अदालत ने छत्तीसगढ़ पुलिस प्रमुख और केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) के निदेशक से कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी। शिकायतकर्ता ने कथित भुगतान से जुड़े WhatsApp चैट और कॉल रिकॉर्डिंग भी साक्ष्य के तौर पर प्रस्तुत किए हैं।
हालांकि, अदालत की ओर से रिपोर्ट मांगा जाना आरोपों के सही साबित होने के समान नहीं है। मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया और जांच के परिणाम महत्वपूर्ण होंगे। जुलाई 2026 के एक न्यायिक आदेश में इसी FIR और उसमें नामित पुलिस अधिकारियों का उल्लेख मिलता है।
फर्जी ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म से बना कथित नेटवर्क
जांच के अनुसार, कथित गिरोह MoneyTrade365 और SmartTrade365 जैसे प्लेटफॉर्म के जरिए लोगों को निवेश के लिए प्रेरित करता था। इन प्लेटफॉर्म को वास्तविक ट्रेडिंग ऐप जैसा दिखाने का आरोप है।
निवेशकों को शुरुआत में छोटे रिटर्न देकर भरोसा जीतने और बाद में बड़ी रकम लगाने के लिए प्रेरित करने की बात चार्जशीट में बताई गई है। निकासी के समय खाते को होल्ड करने या तकनीकी समस्या बताने का भी आरोप है।
जांच में कुछ डमी कंपनियों के नाम पर कॉरपोरेट करंट अकाउंट खुलवाने और भुगतान प्रणाली के जरिए रकम को अलग-अलग खातों में भेजने की बात भी सामने आई है।
जांच में कई राज्यों और विदेशों तक कनेक्शन
पुलिस के अनुसार, कथित नेटवर्क में दुबई से फोन करने वाले लोग, फर्जी पहचान, वर्चुअल नंबर, म्यूल अकाउंट और हवाला चैनल शामिल थे। इसके बाद रकम का एक हिस्सा कथित तौर पर नकदी और क्रिप्टोकरेंसी में बदला गया।
अधिकारियों ने कुछ कथित मास्टरमाइंडों के फरार होने की बात भी कही है। जांच एजेंसियां नेटवर्क के अन्य सदस्यों और कथित लाभार्थियों की भूमिका की पड़ताल कर रही हैं।
आगे की जांच पर टिकी नजर
IPS Rahul Bansal से जुड़े आरोपों ने इस साइबर फ्रॉड मामले को और संवेदनशील बना दिया है। एक तरफ अधिकारी ने ₹1 करोड़ लेने के आरोपों को बेबुनियाद बताया है, वहीं शिकायत और अदालत में प्रस्तुत सामग्री के आधार पर जांच आगे बढ़ रही है।
मामले में अंतिम निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही सामने आएगा। फिलहाल साइबर फ्रॉड नेटवर्क, कथित वित्तीय लेनदेन और पुलिस अधिकारियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों की जांच पर सबकी नजर है।
छत्तीसगढ़ पुलिस का आधिकारिक पोर्टल भी नागरिकों को ऑनलाइन शिकायत और साइबर अपराध से संबंधित सेवाएं उपलब्ध कराता है। आधिकारिक पोर्टल पर ऑनलाइन फ्रॉड के लिए 1930 हेल्पलाइन भी दी गई है।
IPS Rahul Bansal से जुड़ा यह मामला गंभीर आरोपों, कथित साइबर ठगी और बड़े वित्तीय नेटवर्क की जांच से संबंधित है। आरोपों की पुष्टि या खंडन का अंतिम फैसला अदालत और जांच के निष्कर्षों पर निर्भर करेगा।
