Tendu Patta Bonus Scam के बाद सुकमा में बदलाव की नई कहानी, दो आदिवासी युवतियों को मिली बड़ी जिम्मेदारी

Tendu Patta Bonus Scam के बाद छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित सुकमा जिले में प्रशासनिक व्यवस्था और पारदर्शिता को लेकर बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। जिस जिले की पहचान कभी नक्सल हिंसा और भ्रष्टाचार की घटनाओं से होती थी, वहां अब आदिवासी बेटियां नेतृत्व की नई मिसाल पेश कर रही हैं।

वन विभाग ने पहली बार सुकमा जिले की दो युवा आदिवासी महिलाओं को प्राथमिक लघु वनोपज समितियों का प्रबंधक नियुक्त किया है। यह फैसला न केवल महिला सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, बल्कि तेंदूपत्ता खरीदी व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाने का भी प्रयास है।


Tendu Patta Bonus Scam के बाद बदला पूरा सिस्टम

साल 2021-22 के तेंदूपत्ता बोनस भुगतान में हुए कथित 7 करोड़ रुपये के गबन ने पूरे वन विभाग को झकझोर दिया था।

छत्तीसगढ़ एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) की जांच में करोड़ों रुपये की अनियमितताओं का मामला सामने आने के बाद तत्कालीन डीएफओ सहित 11 समिति प्रबंधकों को निलंबित किया गया था।

इस मामले के बाद विभाग ने भुगतान प्रणाली में व्यापक बदलाव किए और नकद भुगतान की जगह ऑनलाइन प्रक्रिया को प्राथमिकता दी।

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घोटाले की जड़ क्या थी?

जगरगुंडा, किस्टाराम, गोलापल्ली और कोंटा जैसे दूरस्थ नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में बैंकिंग सुविधाएं बेहद सीमित थीं।

इसी कारण तेंदूपत्ता संग्राहकों को नकद भुगतान किया जाता था। इसी व्यवस्था का फायदा उठाकर भ्रष्टाचार को अंजाम दिया गया था।

Tendu Patta Bonus Scam के बाद विभाग ने तकनीकी समाधान अपनाकर पूरी प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाया है।


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पहली बार आदिवासी युवतियों को मिली बड़ी जिम्मेदारी

सुकमा के इतिहास में पहली बार 22 वर्षीय पुष्पा माड़काम और 23 वर्षीय दिल्पा किच्चे को प्राथमिक लघु वनोपज समितियों का प्रबंधक बनाया गया है।

दोनों युवतियां दूरस्थ आदिवासी गांवों से आती हैं और अब तेंदूपत्ता संग्रहण एवं खरीदी प्रक्रिया के संचालन की जिम्मेदारी संभाल रही हैं।

यह फैसला स्थानीय स्तर पर महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने और प्रशासनिक कार्यों में उनकी भूमिका मजबूत करने की दिशा में अहम माना जा रहा है।


4.52 करोड़ रुपये की तेंदूपत्ता खरीदी का जिम्मा

नई नियुक्ति के बाद पुष्पा माड़काम और दिल्पा किच्चे ने इस सीजन में करीब 4.52 करोड़ रुपये मूल्य के तेंदूपत्ता की खरीदी प्रक्रिया का सफल संचालन किया है।

इतनी बड़ी आर्थिक जिम्मेदारी का निर्वहन करना अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।

वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि दोनों युवतियों ने कार्य में उत्कृष्ट सक्रियता और जिम्मेदारी दिखाई है।


संघर्षों से सफलता तक का सफर

दिल्पा किच्चे की प्रेरणादायी कहानी

दिल्पा किच्चे का जीवन संघर्षों से भरा रहा है।

उनके गांव कोरापार में आज भी मोबाइल नेटवर्क जैसी मूलभूत सुविधा उपलब्ध नहीं है।

बचपन में उन्होंने नक्सली हिंसा का दर्द भी देखा। नक्सलियों ने उनके चाचा की हत्या कर दी थी, जिसके बाद उनके पिता ने बेहतर शिक्षा के लिए उन्हें लगभग 200 किलोमीटर दूर दंतेवाड़ा के छात्रावास में भेजा।

आज वही दिल्पा सुकमा की पहली महिला समिति प्रबंधकों में शामिल हैं।


पुष्पा माड़काम बनीं गांव की पहली सरकारी कर्मचारी

बीएससी स्नातक पुष्पा माड़काम अपने गांव की पहली महिला हैं जिन्हें सरकारी नौकरी मिली है।

उनकी सफलता स्थानीय आदिवासी समाज की अन्य बेटियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन रही है।

ग्रामीणों का कहना है कि पुष्पा की उपलब्धि से क्षेत्र की लड़कियों में शिक्षा और रोजगार के प्रति नई जागरूकता आई है।


महिलाओं की बढ़ती भागीदारी से बदलता सुकमा

Tendu Patta Bonus Scam के बाद शुरू हुई नई व्यवस्था में महिलाओं को नेतृत्व देने का फैसला काफी सकारात्मक माना जा रहा है।

वन विभाग के अनुसार दोनों युवा प्रबंधक तेंदूपत्ता संग्राहकों को छात्रवृत्ति, बीमा और अन्य सरकारी योजनाओं के प्रति भी जागरूक कर रही हैं।

इससे ग्रामीण समुदाय को सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में मदद मिल रही है।


नक्सल प्रभावित क्षेत्र में बढ़ रहा आत्मविश्वास

सुकमा जैसे संवेदनशील जिले में महिलाओं का आगे आना सामाजिक बदलाव का संकेत माना जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि जब स्थानीय युवाओं और महिलाओं को नेतृत्व का अवसर मिलता है, तो विकास की प्रक्रिया और मजबूत होती है।

यह बदलाव जिले में शांति, शिक्षा और आत्मनिर्भरता की दिशा में सकारात्मक संकेत देता है।


वन विभाग की नई पहल बनी मिसाल

सुकमा के डीएफओ अक्षय कुमार भोसले के अनुसार, इन दोनों युवतियों की नियुक्ति अन्य लड़कियों को भी आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करेगी।

वन विभाग का मानना है कि Tendu Patta Bonus Scam जैसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए पारदर्शिता, तकनीक और स्थानीय भागीदारी सबसे प्रभावी उपाय हैं।

इसी सोच के तहत अब ऑनलाइन भुगतान और बेहतर निगरानी व्यवस्था लागू की गई है।


Tendu Patta Bonus Scam के बाद सुकमा में जो बदलाव देखने को मिला है, वह केवल प्रशासनिक सुधार तक सीमित नहीं है। दो आदिवासी युवतियों को करोड़ों रुपये की तेंदूपत्ता खरीदी का जिम्मा सौंपना महिला सशक्तिकरण, पारदर्शिता और सामाजिक परिवर्तन का मजबूत उदाहरण है। नक्सल प्रभावित क्षेत्र से निकली यह प्रेरणादायी कहानी बताती है कि अवसर मिलने पर स्थानीय युवा और महिलाएं विकास की नई इबारत लिख सकती हैं। Tendu Patta Bonus Scam के बाद शुरू हुआ यह बदलाव भविष्य में सुकमा की नई पहचान बन सकता है।

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