Teacher’s Day यानी शिक्षक दिवस के अवसर पर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रदेश के गुरुजनों को आत्मीय पत्र लिखकर सादर नमन किया है। 5 सितंबर को मनाए जाने वाले शिक्षक दिवस से पहले लिखे इस पत्र में मुख्यमंत्री ने अपने विद्यार्थी जीवन की यादें साझा करते हुए शिक्षकों की भूमिका को समाज और बच्चों के भविष्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण बताया।
मुख्यमंत्री ने शिक्षकों से विशेष आग्रह किया कि वे कक्षा में मौजूद हर बच्चे की क्षमता को पहचानें। खास तौर पर उन बच्चों का हाथ थामें, जो आर्थिक अभाव, संकोच या किसी अन्य कारण से पीछे छूट रहे हैं।
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Teacher’s Day पर याद किया बचपन और संघर्ष
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने अपने पत्र में बताया कि उनका जन्म जशपुर जिले के बगिया गांव के एक साधारण किसान परिवार में हुआ। उनकी प्रारंभिक शिक्षा गांव के ही स्कूल से शुरू हुई।
उनके जीवन में बचपन से ही संघर्ष रहा। जब वे लगभग 10 वर्ष के थे और चौथी कक्षा में पढ़ते थे, तब उनके पिता का निधन हो गया। इसके बाद परिवार, खेती और छोटे भाइयों की जिम्मेदारियां भी उनके जीवन का हिस्सा बन गईं।
गांव में पांचवीं तक पढ़ाई के बाद आगे की शिक्षा के लिए उन्हें कुनकुरी जाना पड़ा। उन्होंने लोयोला उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में रहकर पढ़ाई की। हालांकि पारिवारिक परिस्थितियों के कारण वे अपनी शिक्षा आगे जारी नहीं रख सके और खेती की जिम्मेदारी संभालते हुए छोटे भाइयों की पढ़ाई को आगे बढ़ाया।
बगिया के छोटे स्कूल से बड़े सपनों तक
मुख्यमंत्री ने कहा कि उनके समय में गांव के बच्चों के लिए शिक्षा हासिल करना आज की तुलना में काफी कठिन था। विद्यालय दूर होते थे, आवागमन की सुविधाएं सीमित थीं और आर्थिक संसाधनों का अभाव भी बच्चों के सामने बड़ी चुनौती बनता था।
इसी अनुभव ने उनके पत्र को और भावनात्मक बनाया। उन्होंने कहा कि जीवन कितना भी आगे बढ़ जाए, अपने शिक्षकों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता का भाव कभी कम नहीं होता।




Teacher’s Day पर शिक्षा में बदलाव का जिक्र
मुख्यमंत्री ने अपने विद्यार्थी जीवन और आज की शिक्षा व्यवस्था के बीच आए बदलावों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उनकी पीढ़ी ने स्लेट, तख्ती और चॉक से पढ़ाई शुरू की थी, जबकि आज छत्तीसगढ़ के बच्चे स्मार्ट क्लास और डिजिटल माध्यमों से शिक्षा हासिल कर रहे हैं।
आज आधुनिक तकनीक के जरिए बच्चों को देश-दुनिया के ज्ञान तक पहुंच मिल रही है। विज्ञान, डिजिटल शिक्षा और आधुनिक शैक्षणिक संसाधनों ने सीखने के तरीके को काफी बदल दिया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि दूरस्थ क्षेत्रों में जहां कभी स्कूल तक पहुंचना चुनौती हुआ करता था, वहां अब बेहतर विद्यालय, आधुनिक संसाधन और नए अवसर बच्चों तक पहुंचाने की दिशा में काम हो रहा है।
Teacher’s Day पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का शिक्षकों के नाम भावपूर्ण संदेश
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तकनीक जानकारी दे सकती है, शिक्षक आत्मविश्वास
मुख्यमंत्री ने कहा कि तकनीक बच्चों को जानकारी दे सकती है और किताबें ज्ञान दे सकती हैं, लेकिन किसी बच्चे के भीतर आत्मविश्वास पैदा करने का काम संवेदनशील शिक्षक ही कर सकता है।
शिक्षक बच्चे की प्रतिभा पहचान सकता है, उसके संस्कारों को आकार दे सकता है और उसे एक बेहतर इंसान बनने की दिशा दिखा सकता है। मुख्यमंत्री ने अपने जीवन में भी गुरुजनों से मिली सीख को कठिन परिस्थितियों में आगे बढ़ने की प्रेरणा बताया।
हर बच्चे की प्रतिभा पहचानने की अपील
Teacher’s Day के अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षक के सामने बैठा हर बच्चा अपने भीतर अनगिनत संभावनाएं लेकर आता है। कोई भविष्य में वैज्ञानिक, डॉक्टर, खिलाड़ी, किसान, कलाकार, शिक्षक या जनसेवक बन सकता है।
कई बार बच्चे स्वयं अपनी क्षमता को नहीं पहचान पाते। ऐसे में शिक्षक की पारखी नजर उनकी प्रतिभा को सामने ला सकती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षक का प्रोत्साहन भरा एक वाक्य भी किसी बच्चे के जीवन की दिशा बदल सकता है।
पीछे छूट रहे बच्चों का हाथ थामें
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रदेश के शिक्षकों से सबसे महत्वपूर्ण आग्रह करते हुए कहा कि विशेष रूप से उस बच्चे का हाथ थामें, जो अभाव में है, संकोच में है या किसी अन्य कारण से पीछे छूट रहा है।
उन्होंने कहा कि शिक्षक का थोड़ा सा विश्वास किसी बच्चे के पूरे जीवन को बदलने की ताकत रखता है। इसलिए शिक्षा का उद्देश्य केवल पाठ्यक्रम पूरा करना नहीं, बल्कि बच्चे के व्यक्तित्व, आत्मविश्वास, संस्कार और क्षमताओं का विकास करना भी होना चाहिए।
Teacher’s Day पर NEP 2020 और आधुनिक शिक्षा पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप छत्तीसगढ़ में शिक्षा को अधिक सहज, आधुनिक, व्यावहारिक और बच्चों की प्रतिभा के अनुरूप बनाने की दिशा में काम कर रही है।
मातृभाषा और स्थानीय भाषाओं में सीखने के अवसर बढ़ाने, कौशल एवं व्यावहारिक ज्ञान को शिक्षा से जोड़ने तथा डिजिटल शिक्षा और स्मार्ट क्लास जैसी सुविधाओं के विस्तार पर जोर दिया जा रहा है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, समान अवसर, मातृभाषा और कौशल आधारित सीखने जैसे पहलुओं पर जोर देती है।
मुख्यमंत्री ने बस्तर का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसे क्षेत्रों में भी विद्यालयों की घंटियां फिर सुनाई दे रही हैं, जहां परिस्थितियों के कारण लंबे समय तक स्कूल बंद रहे थे।
किसी बच्चे के सपनों की सीमा परिस्थिति न बने
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का प्रयास है कि आर्थिक या भौगोलिक परिस्थितियां किसी बच्चे की शिक्षा में बाधा न बनें। कोई बच्चा केवल इसलिए पीछे नहीं रहना चाहिए कि उसका जन्म किसी छोटे गांव, वनांचल या दूरस्थ क्षेत्र में हुआ है।
उनके अनुसार ऐसा छत्तीसगढ़ बनाने की जरूरत है, जहां बच्चे की परिस्थितियां उसके सपनों की सीमा तय न करें।
हर स्कूल बने सपनों का द्वार
Teacher’s Day पर मुख्यमंत्री ने शिक्षकों से ऐसा छत्तीसगढ़ बनाने का आह्वान किया, जहां हर स्कूल सपनों का द्वार और हर कक्षा संभावनाओं का संसार बने।
उन्होंने कहा कि शिक्षकों के ज्ञान से बच्चों का भविष्य उज्ज्वल हो, उनके संस्कारों से समाज समृद्ध हो और उनके मार्गदर्शन से प्रदेश की नई पीढ़ी आत्मविश्वास के साथ विकसित भारत के निर्माण में अपनी भूमिका निभाए।
मुख्यमंत्री ने सभी गुरुजनों को शिक्षक दिवस की शुभकामनाएं देते हुए उनके स्वस्थ, सुखी और यशस्वी जीवन की कामना की। उन्होंने शिक्षकों और उनके परिवारों के प्रति भी अपनी हार्दिक शुभकामनाएं व्यक्त कीं।
Teacher’s Day केवल शिक्षकों को सम्मान देने का अवसर नहीं, बल्कि शिक्षा और गुरु-शिष्य संबंध की अहमियत को याद करने का दिन भी है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का संदेश इसी भावना को सामने रखता है कि आधुनिक तकनीक और संसाधनों के साथ-साथ शिक्षक का विश्वास, स्नेह और मार्गदर्शन भी बच्चे के भविष्य की सबसे बड़ी ताकत है। अभाव या संकोच के कारण पीछे रह रहे बच्चे का हाथ थामना ही शिक्षा को वास्तव में सार्थक बनाने की दिशा में बड़ा कदम हो सकता है।
