Strengthening Cyber Security Frameworks को लेकर छत्तीसगढ़ सरकार ने रायपुर में राज्य स्तरीय विभागीय कार्यशाला का आयोजन किया। डिजिटल गवर्नेंस के बढ़ते दायरे और शासकीय सेवाओं के तेजी से डिजिटलीकरण के बीच नागरिकों के डेटा और महत्वपूर्ण डिजिटल अवसंरचना की सुरक्षा को मजबूत बनाने के उद्देश्य से यह पहल की गई।
इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग, छत्तीसगढ़ शासन तथा CHiPS (चिप्स) द्वारा आयोजित इस कार्यशाला में 120 से अधिक वरिष्ठ अधिकारी, तकनीकी विशेषज्ञ और राष्ट्रीय स्तर के साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ शामिल हुए।
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Strengthening Cyber Security Frameworks क्यों है जरूरी?
आज के दौर में अधिकांश सरकारी सेवाएं डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हैं। ऐसे में नागरिकों के व्यक्तिगत डेटा, सरकारी रिकॉर्ड और डिजिटल नेटवर्क की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता बन गई है।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव Ankit Anand ने कहा कि डिजिटल गवर्नेंस की सफलता नागरिकों के विश्वास पर आधारित होती है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि साइबर सुरक्षा अब केवल तकनीकी विषय नहीं रह गई है, बल्कि यह सुशासन, सेवा निरंतरता और जनविश्वास से जुड़ा रणनीतिक विषय बन चुका है।
Strengthening Cyber Security Frameworks के लिए तैयार हो रहा नया रोडमैप
चिप्स के मुख्य कार्यपालन अधिकारी Mayank Agrawal ने कार्यशाला की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए बताया कि राज्य सरकार व्यापक और भविष्य उन्मुख साइबर सुरक्षा रोडमैप तैयार कर रही है।
उन्होंने कहा कि राज्य की डिजिटल परिसंपत्तियों की सुरक्षा को मजबूत बनाने के लिए विभिन्न विभागों के साथ मिलकर दीर्घकालिक रणनीति बनाई जा रही है।
इस रोडमैप का उद्देश्य केवल साइबर हमलों से बचाव नहीं, बल्कि सरकारी डिजिटल सेवाओं को अधिक सुरक्षित, विश्वसनीय और लचीला बनाना है।
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कार्यशाला में किन विषयों पर हुई चर्चा?
Strengthening Cyber Security Frameworks विषय पर आयोजित कार्यशाला में भारत सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुरूप छह प्रमुख विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई।
इनमें जोखिम आधारित सुरक्षा मूल्यांकन, राज्य डेटा सेंटर और नेटवर्क सुरक्षा, सुरक्षा संचालन केंद्र (SOC), जीरो ट्रस्ट आर्किटेक्चर, डेटा गवर्नेंस तथा साइबर जागरूकता और क्षमता निर्माण शामिल रहे।
विशेषज्ञों ने बताया कि भविष्य में साइबर सुरक्षा के लिए केवल तकनीकी उपाय पर्याप्त नहीं होंगे, बल्कि संस्थागत और मानव संसाधन स्तर पर भी तैयारी आवश्यक होगी।
विशेषज्ञों ने बताए राष्ट्रीय और वैश्विक सुरक्षा मानक
कार्यशाला के तकनीकी सत्रों में देश के कई प्रतिष्ठित विशेषज्ञों ने अपने अनुभव साझा किए।
पुलिस महानिरीक्षक (तकनीकी सेवाएं) Dhruv Gupta ने डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट (DPDP Act 2023) की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह कानून वर्ष 2027 से पूरी तरह लागू होने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
वहीं गृह मंत्रालय के पूर्व संयुक्त सचिव और NATGRID सलाहकार Saurabh Gupta ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय साइबर सुरक्षा मानकों पर प्रकाश डाला।
Trusted IT Systems पर विशेष जोर
इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के पूर्व वैज्ञानिक-जी एवं डिप्टी डायरेक्टर जनरल Suresh Chandra ने सरकारी डेटा सुरक्षा में मानकीकरण और Trusted IT Systems की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।
उन्होंने कहा कि साइबर सुरक्षा ढांचे को मजबूत बनाने के लिए प्रमाणन, सुरक्षा ऑडिट और नियमित निगरानी आवश्यक है।
समूह चर्चा से मिले महत्वपूर्ण सुझाव
कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों को छह विषयगत समूहों में विभाजित कर विचार-विमर्श कराया गया।
चर्चा के दौरान साइबर सुरक्षा परिपक्वता बढ़ाने, विभागीय जवाबदेही सुनिश्चित करने, नियमित सुरक्षा ऑडिट, सुरक्षा निगरानी तंत्र को मजबूत करने और प्रभावी Incident Response Mechanism विकसित करने जैसे सुझाव सामने आए।
मानव संसाधन क्षमता निर्माण और साइबर जागरूकता को भी महत्वपूर्ण प्राथमिकता बताया गया।
राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचेंगी अनुशंसाएं
Strengthening Cyber Security Frameworks कार्यशाला से प्राप्त सुझावों और अनुशंसाओं का संकलन कर राज्य की साइबर सुरक्षा कार्ययोजना को और प्रभावी बनाया जाएगा।
राज्य सरकार ने संकेत दिए हैं कि चयनित अनुशंसाओं को राष्ट्रीय स्तर पर भी संबंधित संस्थाओं और भारत सरकार के समक्ष विचारार्थ भेजा जाएगा।
इससे छत्तीसगढ़ को साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में एक मजबूत और आधुनिक मॉडल विकसित करने में मदद मिल सकती है।
सुरक्षित डिजिटल भविष्य की दिशा में बड़ा कदम
विशेषज्ञों और अधिकारियों ने कार्यक्रम के समापन पर सुरक्षित डिजिटल शासन और मजबूत साइबर अवसंरचना की आवश्यकता पर बल दिया।
उन्होंने कहा कि नागरिकों के डेटा की सुरक्षा और डिजिटल सेवाओं की विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए सभी विभागों के समन्वित प्रयास आवश्यक हैं।
Strengthening Cyber Security Frameworks पर आयोजित यह राज्य स्तरीय कार्यशाला छत्तीसगढ़ के डिजिटल भविष्य को सुरक्षित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल साबित हुई है। डिजिटल सेवाओं के विस्तार के साथ-साथ डेटा सुरक्षा, साइबर जागरूकता और मजबूत सुरक्षा ढांचे पर ध्यान देना समय की आवश्यकता है। राज्य सरकार द्वारा तैयार किया जा रहा नया रोडमैप Strengthening Cyber Security Frameworks के लक्ष्य को मजबूती देगा और नागरिकों के विश्वास को और मजबूत बनाएगा।
