Chhattisgarh Conversion Law यानी छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम, 2026 अब राज्य में लागू हो गया है। नए कानून का उद्देश्य बल, दबाव, प्रलोभन, धोखाधड़ी, गलत बयानी या अनुचित तरीकों से कराए जाने वाले धर्मांतरण पर रोक लगाना है। कानून पुराने 1968 के प्रावधानों की जगह नया और अधिक विस्तृत कानूनी ढांचा लेकर आया है।
नए प्रावधानों के तहत धर्म परिवर्तन की प्रक्रिया में पहले से सूचना देने की व्यवस्था की गई है। इसके साथ ही धर्म परिवर्तन कराने वाले धार्मिक पदाधिकारियों और कुछ विशेष परिस्थितियों में विवाह से जुड़े मामलों पर भी कानूनी निगरानी का प्रावधान किया गया है।
Chhattisgarh Conversion Law में 60 दिन का नोटिस
नए कानून के तहत धर्म परिवर्तन की इच्छा रखने वाले व्यक्ति को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार जिला प्रशासन को पहले से सूचना देनी होगी। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक यह सूचना कम से कम 60 दिन पहले देने का प्रावधान है।
इस प्रक्रिया का उद्देश्य प्रशासन को यह जांचने का अवसर देना है कि धर्म परिवर्तन स्वेच्छा से किया जा रहा है या इसके पीछे बल, दबाव, धोखाधड़ी, प्रलोभन अथवा अनुचित प्रभाव जैसे कारण तो नहीं हैं।
कानून के तहत प्रक्रिया का पालन नहीं करने पर कानूनी कार्रवाई का प्रावधान किया गया है। इसलिए अब धर्म परिवर्तन से जुड़े मामलों में प्रशासनिक प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।
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Chhattisgarh Conversion Law में धार्मिक पदाधिकारियों की भूमिका
नए कानून का दायरा केवल धर्म परिवर्तन करने वाले व्यक्ति तक सीमित नहीं है। धर्म परिवर्तन कराने या उसमें सहायता करने वाले लोगों पर भी निर्धारित कानूनी प्रक्रिया लागू होगी।
इसमें धार्मिक अनुष्ठान या समारोह कराने वाले पंडित, पादरी, मौलवी अथवा अन्य धार्मिक पदाधिकारी भी शामिल हो सकते हैं। यदि कानून में निर्धारित प्रक्रिया का उल्लंघन करते हुए धर्म परिवर्तन कराया जाता है, तो संबंधित लोगों के खिलाफ भी कार्रवाई हो सकती है।
शादी के जरिए धर्मांतरण पर सख्ती
Chhattisgarh Conversion Law का एक महत्वपूर्ण हिस्सा विवाह के माध्यम से होने वाले कथित धर्मांतरण से जुड़ा है। कानून जबरन या धोखे से विवाह अथवा विवाह को धर्म परिवर्तन के माध्यम के रूप में इस्तेमाल करने जैसी परिस्थितियों पर रोक लगाने का प्रावधान करता है।
यदि अदालत के समक्ष यह साबित होता है कि विवाह का उद्देश्य ही कानून में प्रतिबंधित तरीके से धर्म परिवर्तन कराना था, तो ऐसे विवाह को कानून के तहत शून्य घोषित किए जाने की स्थिति बन सकती है।
यहां यह समझना जरूरी है कि केवल अलग-अलग धर्मों के लोगों का विवाह अपने आप में अपराध नहीं है। कानूनी कार्रवाई उन परिस्थितियों में होगी, जिन्हें कानून के तहत अवैध धर्मांतरण या प्रतिबंधित साधनों से जोड़ा गया हो।
Chhattisgarh Conversion Law में कड़ी सजा का प्रावधान
नए कानून में अवैध धर्मांतरण के मामलों के लिए पहले की तुलना में अधिक कड़े दंड का प्रावधान किया गया है। रिपोर्टों के अनुसार, सामान्य मामलों में दोषसिद्धि पर 7 से 10 वर्ष तक की सजा और कम से कम 5 लाख रुपये जुर्माना हो सकता है।
यदि पीड़ित नाबालिग, महिला, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति या अन्य पिछड़ा वर्ग से संबंधित हो, तो सजा और जुर्माना अधिक हो सकता है। सामूहिक धर्मांतरण के मामलों में 10 वर्ष से लेकर आजीवन कारावास और कम से कम 25 लाख रुपये जुर्माने का प्रावधान बताया गया है।
संगठनों और फंडिंग पर भी नजर
नए कानून में धर्म परिवर्तन कराने वाले संगठनों की गतिविधियों और उनसे संबंधित वित्तीय स्रोतों पर भी निगरानी का प्रावधान बताया गया है। रिपोर्टों के अनुसार, ऐसे संगठनों को धर्मांतरण से संबंधित गतिविधियों और फंड के स्रोत की जानकारी देने की व्यवस्था की गई है।
इसका उद्देश्य यह पता लगाना है कि किसी संगठन की गतिविधियों में अवैध धर्मांतरण के लिए आर्थिक सहायता या अन्य संसाधनों का इस्तेमाल तो नहीं हो रहा है।
कानून का उद्देश्य और विवाद
राज्य सरकार का कहना है कि नया कानून जबरन, धोखे, प्रलोभन और अनुचित प्रभाव के जरिए होने वाले धर्मांतरण को रोकने तथा लोगों की धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा करने के उद्देश्य से बनाया गया है।
वहीं, कानून को लेकर नागरिक स्वतंत्रता और धार्मिक अधिकारों से जुड़े सवाल भी उठाए गए हैं। आलोचकों का तर्क है कि प्रशासनिक अनुमति और पूर्व सूचना की प्रक्रिया का व्यक्तिगत धार्मिक स्वतंत्रता पर प्रभाव पड़ सकता है। ऐसे मुद्दों पर आगे न्यायिक व्याख्या भी महत्वपूर्ण हो सकती है।
Chhattisgarh Conversion Law के लागू होने के बाद राज्य में धर्म परिवर्तन से जुड़ी प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक सख्त और औपचारिक हो गई है। 60 दिन की पूर्व सूचना, धर्म परिवर्तन कराने वाले धार्मिक पदाधिकारियों की जिम्मेदारी, विवाह के जरिए अवैध धर्मांतरण पर कार्रवाई और संगठनों की गतिविधियों की निगरानी इसके प्रमुख पहलुओं में हैं। हालांकि, कानून का वास्तविक प्रभाव इसके जमीनी क्रियान्वयन और अदालतों में होने वाली कानूनी व्याख्या से स्पष्ट होगा। महत्वपूर्ण बात यह है कि कानून का लक्ष्य धर्म परिवर्तन पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं, बल्कि कानून में परिभाषित अवैध तरीकों से होने वाले धर्मांतरण को रोकना है।
