Sothi Ashram आज छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले में कुष्ठ रोगियों के लिए नई उम्मीद का प्रतीक बन चुका है। यह केवल एक आश्रम या अस्पताल नहीं, बल्कि ऐसा सेवा केंद्र है जहां मरीजों को इलाज के साथ सम्मान, आत्मविश्वास और आत्मनिर्भर जीवन जीने का अवसर भी मिलता है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने भी हाल ही में आश्रम का दौरा कर इसके कार्यों की खुलकर प्रशंसा की और इसे समाज के लिए प्रेरणादायक बताया।
करीब छह दशक से लगातार मानव सेवा में जुटा यह आश्रम उन लोगों के लिए नई जिंदगी की शुरुआत बन रहा है, जिन्हें कभी समाज ने उपेक्षित कर दिया था। यहां मरीजों को न केवल स्वास्थ्य सुविधाएं मिलती हैं बल्कि उन्हें सम्मानजनक जीवन जीने की दिशा भी दिखाई जाती है।
Sothi Ashram की स्थापना कैसे हुई?
जांजगीर-चांपा जिले के छोटे से गांव सोठी में स्थित Sothi Ashram की स्थापना वर्ष 1962 में स्वर्गीय सदाशिव गोविंद कात्रे ने की थी। विशेष बात यह है कि वे स्वयं भी कुष्ठ रोग से प्रभावित रहे थे।
उन्होंने अपने जीवन के अनुभव से महसूस किया कि बीमारी से अधिक पीड़ा समाज की उपेक्षा और भेदभाव से होती है। इसी सोच के साथ उन्होंने एक ऐसा आश्रम बनाया, जहां हर मरीज को सम्मान, अपनापन और बेहतर जीवन का अवसर मिल सके।
आज यह आश्रम हजारों लोगों के लिए प्रेरणा का केंद्र बन चुका है।
Sothi Ashram में मिलती हैं आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएं
Sothi Ashram में वर्तमान समय में 20 बिस्तरों का अस्पताल संचालित हो रहा है। यहां मरीजों को पूरी तरह मुफ्त इलाज, दवाइयां, भोजन, कपड़े और रहने की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है।
इसके अलावा आश्रम में लैब जांच और एक्स-रे जैसी सुविधाएं भी मौजूद हैं। यदि किसी मरीज को विशेष उपचार की आवश्यकता होती है तो उसे बड़े अस्पतालों में रेफर किया जाता है।
वर्तमान में करीब 75 मरीज आश्रम में रह रहे हैं, जबकि उनकी सेवा और देखभाल के लिए लगभग 120 लोग समर्पित भाव से कार्य कर रहे हैं।
Sothi Ashram केवल इलाज नहीं, आत्मनिर्भरता भी सिखाता है
मरीजों को रोजगार से जोड़ने की पहल
Sothi Ashram की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां केवल इलाज तक ही सीमित नहीं रहा जाता। मरीजों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए विभिन्न प्रकार के व्यावसायिक प्रशिक्षण भी दिए जाते हैं।
यहां खेती, बागवानी, सिलाई, कम्प्यूटर प्रशिक्षण, वेल्डिंग, वाहन चलाना, चॉक बनाना, कालीन निर्माण और रस्सी बनाने जैसे कई कौशल सिखाए जाते हैं।
इस पहल का उद्देश्य मरीजों को सम्मानजनक रोजगार उपलब्ध कराना और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ना है।
बच्चों की शिक्षा पर भी विशेष ध्यान
आश्रम में रहने वाले परिवारों के बच्चों की शिक्षा की भी पूरी व्यवस्था की जाती है। इससे आने वाली पीढ़ी बेहतर भविष्य की ओर आगे बढ़ सके और सामाजिक भेदभाव का सामना न करना पड़े।
स्वास्थ्य शिविरों से हजारों लोगों को मिला लाभ
Sothi Ashram में समय-समय पर निःशुल्क स्वास्थ्य एवं नेत्र जांच शिविर आयोजित किए जाते हैं। आश्रम के माध्यम से अब तक 10 हजार से अधिक मोतियाबिंद ऑपरेशन कराए जा चुके हैं।
हाल ही में आयोजित एक स्वास्थ्य शिविर में 300 से अधिक लोगों की स्वास्थ्य जांच की गई। इस दौरान कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के प्रति लोगों को जागरूक भी किया गया।
इन प्रयासों से ग्रामीण क्षेत्रों के हजारों लोगों को समय पर उपचार और स्वास्थ्य संबंधी जानकारी मिल रही है।
CM विष्णु देव साय ने Sothi Ashram की सराहना की
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने हाल ही में Sothi Ashram का दौरा किया और यहां किए जा रहे सेवा कार्यों की प्रशंसा की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी व्यक्ति को आत्मसम्मान के साथ जीवन जीने योग्य बनाना सबसे बड़ी मानव सेवा है। उन्होंने कहा कि सोठी आश्रम यह संदेश देता है कि वास्तविक विकास केवल सड़क, भवन और बुनियादी ढांचे तक सीमित नहीं है।
उनके अनुसार, जब समाज अपने सबसे जरूरतमंद लोगों को सम्मान, सहारा और आत्मनिर्भर बनने का अवसर देता है, तभी विकास का वास्तविक अर्थ पूरा होता है।
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Sothi Ashram आज केवल एक आश्रम नहीं, बल्कि मानव सेवा, आत्मसम्मान और सामाजिक समावेशन का उत्कृष्ट उदाहरण बन चुका है। पिछले 60 वर्षों से यह संस्थान कुष्ठ रोगियों को नई जिंदगी देने का काम कर रहा है। मुफ्त इलाज, आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएं, रोजगार प्रशिक्षण और शिक्षा जैसी पहल इसे देश के प्रेरणादायक सेवा संस्थानों में शामिल करती हैं। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की सराहना भी इस बात का प्रमाण है कि Sothi Ashram समाज के सबसे कमजोर वर्ग के लिए आशा और सम्मान की नई किरण बनकर उभरा है।
