PM Rahat Yojana के प्रभावी क्रियान्वयन और सड़क दुर्घटना पीड़ितों को समय पर उपचार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुक्रवार को कलेक्टर अभिजीत सिंह की अध्यक्षता में कलेक्टोरेट सभाकक्ष में संभाग स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान अधिकारियों को पीएम राहत योजना और ई-डार (e-DAR) प्रणाली के संचालन, डेटा प्रबंधन और डिजिटल प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी दी गई।
प्रशिक्षण का संचालन राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC) के तकनीकी निदेशक अमित देवांगन एवं स्टेट मैनेजर सारांश ने किया। कार्यक्रम में पुलिस, स्वास्थ्य और परिवहन विभाग के अधिकारियों ने भाग लिया।
PM Rahat Yojana के तहत मिलेगी 1.5 लाख रुपये तक की कैशलेस उपचार सुविधा
PM Rahat Yojana भारत सरकार की एक महत्वपूर्ण पहल है, जिसका उद्देश्य सड़क दुर्घटना में घायल लोगों को बिना आर्थिक बोझ के तत्काल इलाज उपलब्ध कराना है।
इस योजना के तहत सड़क दुर्घटना के प्रत्येक पात्र पीड़ित को दुर्घटना की तारीख से 7 दिनों तक अधिकतम 1.5 लाख रुपये तक का निःशुल्क एवं कैशलेस उपचार मिलेगा।
योजना का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि दुर्घटना के बाद उपचार में देरी न हो और समय पर चिकित्सा सुविधा मिलने से अधिक से अधिक लोगों की जान बचाई जा सके।
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PM Rahat Yojana को 112 आपातकालीन सेवा से जोड़ा गया
PM Rahat Yojana को 112 आपातकालीन प्रतिक्रिया सहायता प्रणाली से जोड़ा गया है।
दुर्घटना की सूचना मिलते ही 112 के माध्यम से निकटतम सूचीबद्ध अस्पताल की पहचान की जाएगी और आवश्यक होने पर तुरंत एम्बुलेंस उपलब्ध कराई जाएगी। इससे घायल व्यक्ति को कम समय में अस्पताल पहुंचाकर उपचार शुरू किया जा सकेगा।
योजना के तहत सामान्य मामलों में दुर्घटना के बाद पहले 24 घंटे, जबकि गंभीर एवं जीवनरक्षक उपचार की आवश्यकता वाले मामलों में 48 घंटे तक तत्काल चिकित्सा सुविधा सुनिश्चित की जाएगी।
गोल्डन आवर में उपचार सबसे अधिक महत्वपूर्ण
प्रशिक्षण कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कलेक्टर अभिजीत सिंह ने कहा कि सड़क दुर्घटना के बाद का पहला घंटा, जिसे ‘गोल्डन आवर’ कहा जाता है, किसी भी घायल व्यक्ति की जान बचाने के लिए सबसे महत्वपूर्ण समय होता है।
उन्होंने कहा कि यदि इस दौरान सही और समय पर इलाज मिल जाए तो सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली अधिकांश मौतों को रोका जा सकता है।
कलेक्टर ने यह भी कहा कि देश में बढ़ती आबादी और यातायात के दबाव के कारण सड़क दुर्घटनाओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। ऐसे में पुलिस, स्वास्थ्य और परिवहन विभाग के बीच बेहतर समन्वय बेहद जरूरी है।
ई-डार प्रणाली से होगा डिजिटल डेटा प्रबंधन
PM Rahat Yojana के साथ ई-डार (e-DAR) प्रणाली का भी डिजिटल रूप से संचालन किया जा रहा है।
प्रशिक्षण के दौरान अधिकारियों को डेटा एंट्री वर्कफ्लो, दुर्घटना डेटा प्रबंधन, सत्यापन प्रक्रिया और डिजिटल रिकॉर्डिंग के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।
विशेषज्ञों ने बताया कि ई-डार प्रणाली के माध्यम से दुर्घटनाओं का रिकॉर्ड अधिक पारदर्शी, व्यवस्थित और त्वरित तरीके से तैयार किया जा सकेगा, जिससे पीड़ितों को योजनाओं का लाभ जल्दी मिलेगा।
अधिकारियों की भूमिका पर दिया गया विशेष जोर
कलेक्टर अभिजीत सिंह ने कहा कि क्षेत्रीय पुलिस अधिकारी, थाना प्रभारी, चिकित्सा अधिकारी और परिवहन विभाग के अधिकारियों को अपनी जिम्मेदारियों की पूरी जानकारी होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि दुर्घटना की स्थिति में सभी विभागों के बीच बेहतर समन्वय और त्वरित कार्रवाई से ही PM Rahat Yojana का उद्देश्य सफल हो सकेगा।
प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों की जिज्ञासाओं का समाधान भी किया गया तथा योजना के तकनीकी और व्यावहारिक पहलुओं पर विस्तृत मार्गदर्शन दिया गया।
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PM Rahat Yojana सड़क दुर्घटना पीड़ितों के लिए एक महत्वपूर्ण और जीवनरक्षक पहल है। इस योजना के तहत 7 दिनों तक 1.5 लाख रुपये तक का कैशलेस उपचार उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे समय पर इलाज सुनिश्चित हो सकेगा। ई-डार प्रणाली के माध्यम से पूरी प्रक्रिया को डिजिटल और पारदर्शी बनाया जा रहा है। कलेक्टर अभिजीत सिंह द्वारा अधिकारियों को दिए गए निर्देश इस बात को दर्शाते हैं कि प्रशासन योजना के प्रभावी क्रियान्वयन और सड़क हादसों में होने वाली मौतों को कम करने के लिए गंभीरता से कार्य कर रहा है।
