Nakti Demolition Row को लेकर छत्तीसगढ़ की राजनीति में विवाद लगातार गहराता जा रहा है। नवा रायपुर के नकटी गांव में कथित अतिक्रमित भूमि पर बने 80 से अधिक मकानों को प्रशासन द्वारा हटाए जाने के बाद प्रभावित परिवारों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है। इस बीच भाजपा सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने भी प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए इसे अमानवीय बताया और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
प्रदर्शनकारी परिवारों ने राज्य के आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओपी चौधरी के सरकारी आवास पहुंचकर विरोध दर्ज कराया। इसके बाद रायपुर कलेक्टोरेट के बाहर धरना देकर चेतावनी दी कि मांगें पूरी नहीं होने पर अनिश्चितकालीन आंदोलन और ‘जेल भरो’ अभियान चलाया जाएगा।
Nakti Demolition Row में क्यों हटाए गए मकान?
Nakti Demolition Row की शुरुआत चार दिन पहले हुई, जब प्रशासन ने नवा रायपुर के नकटी गांव में कथित अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की।
प्रशासन के अनुसार जिस भूमि पर मकान बने थे, वह राजस्व रिकॉर्ड में ‘शामलात चारागाह’ (सामुदायिक चरागाह भूमि) के रूप में दर्ज है। इस भूमि का उपयोग गांव के पशुओं के चरने के लिए किया जाना था।
बताया जा रहा है कि इस भूमि पर सांसद और विधायकों के लिए प्रस्तावित आवासीय कॉलोनी विकसित की जानी है। सूत्रों के अनुसार इस परियोजना का प्रस्ताव पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में भी स्वीकार किया गया था।
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BJP सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने प्रशासन को घेरा
Nakti Demolition Row में सबसे बड़ा राजनीतिक मोड़ तब आया जब रायपुर से भाजपा सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने अपनी ही सरकार के प्रशासनिक अधिकारियों के कामकाज पर सवाल उठा दिए।
उन्होंने देर रात की गई बुलडोजर कार्रवाई को “अमानवीय” करार देते हुए कहा कि मानसून के दौरान गरीबों के घर तोड़ने वाले अधिकारियों को माफ नहीं किया जाना चाहिए।
बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि वे पिछले तीन वर्षों से नकटी गांव के लोगों के साथ खड़े हैं और आगे भी उनका समर्थन जारी रहेगा।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अधिकारियों ने जनप्रतिनिधियों द्वारा जनता को दिए गए आश्वासनों की अनदेखी कर उनकी विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचाया है।
प्रभावित परिवारों का आरोप और विरोध प्रदर्शन
Nakti Demolition Row से प्रभावित परिवारों का कहना है कि वे कई दशकों से इस भूमि पर रह रहे थे। कुछ परिवारों को सरकारी योजनाओं के तहत आवास निर्माण के लिए आर्थिक सहायता भी मिली थी।
कार्रवाई के बाद बड़ी संख्या में प्रभावित ग्रामीणों ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर मंत्री ओपी चौधरी के आवास के बाहर प्रदर्शन किया। इसके बाद रायपुर कलेक्टोरेट के सामने धरना देकर पुनर्वास और अन्य मांगों को लेकर आवाज उठाई।
प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर विचार नहीं किया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
प्रशासन ने क्या कहा?
प्रशासन का कहना है कि कार्रवाई पूरी तरह कानूनी प्रक्रिया के तहत की गई है।
अधिकारियों के अनुसार लगभग 85 प्रभावित परिवारों को नवा रायपुर टाउनशिप में EWS (आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग) श्रेणी के तहत सरकारी आवास आवंटित किए गए हैं। साथ ही पुनर्वास नीति के अनुसार अन्य सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जा रही हैं।
प्रशासन का यह भी कहना है कि प्रस्तावित विधायक एवं सांसद आवास परियोजना के लिए उक्त भूमि की आवश्यकता थी, इसलिए अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की गई।
Nakti Demolition Row बना बड़ा राजनीतिक मुद्दा
Nakti Demolition Row अब केवल अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई तक सीमित नहीं रह गया है।
कांग्रेस ने इस मुद्दे को लेकर राज्य सरकार के खिलाफ आंदोलन शुरू कर दिया है। वहीं भाजपा के वरिष्ठ सांसद बृजमोहन अग्रवाल द्वारा सार्वजनिक रूप से प्रशासन की आलोचना किए जाने के बाद यह मामला और अधिक राजनीतिक महत्व का बन गया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सत्तारूढ़ दल के भीतर से उठी इस प्रतिक्रिया ने पूरे विवाद को नया आयाम दे दिया है।
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Nakti Demolition Row छत्तीसगढ़ की राजनीति का प्रमुख मुद्दा बन चुका है। एक ओर प्रशासन इसे सरकारी भूमि पर अतिक्रमण हटाने और प्रस्तावित आवासीय परियोजना के लिए आवश्यक कार्रवाई बता रहा है, वहीं प्रभावित परिवार और विपक्ष इसे गरीबों के साथ अन्याय बता रहे हैं। भाजपा सांसद बृजमोहन अग्रवाल की सार्वजनिक नाराजगी ने इस विवाद को और अधिक चर्चा में ला दिया है। अब सभी की नजर प्रशासन के अगले कदम और आंदोलन के भविष्य पर टिकी हुई है।
