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कांकेर में 26 ग्राम सभाओं का बड़ा निर्णय

Religious Conversion Ban Proposal को लेकर छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले से एक महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। जिले के पीढ़ापाल अनुसूचित क्षेत्र की 26 ग्राम सभाओं ने एकजुट होकर मतांतरण के खिलाफ कई प्रस्ताव पारित किए हैं। यह निर्णय 14 जून को ग्राम मुरागांव में आयोजित संयुक्त पारंपरिक ग्राम सभा में लिया गया।

बैठक में क्षेत्र के ग्राम सभा अध्यक्ष, सरपंच, पंच, गायता, पटेल, ठाकुर, भूमियार, मांझी, सिरहा, भगत, पेनो पुजारी और विभिन्न समाजों के प्रतिनिधि शामिल हुए। बैठक में सर्वसम्मति से कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किए गए।


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Religious Conversion Ban Proposal क्या है?

Religious Conversion Ban Proposal के तहत ग्राम सभाओं ने अनुसूचित क्षेत्र में ईसाई चर्च, प्रार्थना सभाओं और पादरियों की गतिविधियों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव पारित किया है।

ग्राम सभा का कहना है कि क्षेत्र में धार्मिक मतांतरण की गतिविधियां बढ़ रही हैं, जिससे पारंपरिक सामाजिक और सांस्कृतिक संरचना प्रभावित हो रही है। इसी चिंता को देखते हुए संयुक्त रूप से यह प्रस्ताव पारित किया गया।

ग्राम सभा ने यह भी निर्णय लिया कि क्षेत्र में बाहरी धार्मिक गतिविधियों पर निगरानी रखी जाएगी और आवश्यक जानकारी प्रशासन को दी जाएगी।


Religious Conversion Ban Proposal के तहत चर्च और पादरियों पर रोक

बैठक में पारित प्रस्तावों के अनुसार अनुसूचित क्षेत्र के गांवों में नए चर्चों की स्थापना और धार्मिक प्रार्थना सभाओं के आयोजन पर रोक लगाने की मांग की गई है।

ग्राम सभाओं का मानना है कि पारंपरिक आदिवासी संस्कृति और धार्मिक मान्यताओं की रक्षा के लिए ऐसे कदम आवश्यक हैं। प्रस्ताव में पादरियों के प्रवेश और गतिविधियों पर भी प्रतिबंध लगाने की अनुशंसा की गई है।

हालांकि अंतिम निर्णय प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रिया के बाद ही लागू हो सकेगा।

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मतांतरित व्यक्तियों को लेकर क्या लिए गए फैसले?

संयुक्त ग्राम सभा में मतांतरित व्यक्तियों से जुड़े कुछ अन्य प्रस्ताव भी पारित किए गए।

भूमि आवंटन पर प्रस्ताव

ग्राम सभाओं ने संकल्प लिया कि मतांतरित व्यक्तियों को अनुसूचित क्षेत्र में भूमि आवंटित नहीं की जानी चाहिए। इस विषय पर प्रशासन को प्रस्ताव भेजा जाएगा।

डी-लिस्टिंग की मांग

बैठक में यह भी प्रस्ताव रखा गया कि जो लोग धर्म परिवर्तन कर चुके हैं और आरक्षण का लाभ प्राप्त कर रहे हैं, उनकी पात्रता की समीक्षा की जाए तथा आवश्यक होने पर डी-लिस्टिंग की प्रक्रिया अपनाई जाए।

जाति प्रमाण पत्र संबंधी मांग

ग्राम सभा ने मतांतरित व्यक्तियों के जाति प्रमाण पत्रों की जांच और आवश्यक कार्रवाई की मांग भी प्रशासन से की है।


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प्रशासन को सौंपा जाएगा Religious Conversion Ban Proposal

ग्राम सभा के प्रतिनिधियों ने बताया कि पारित प्रस्तावों को जल्द ही जिला कलेक्टर, एसडीएम और संबंधित विभागों को सौंपा जाएगा।

प्रशासन से मांग की जाएगी कि प्रस्तावों पर विधिसम्मत कार्रवाई की जाए तथा क्षेत्र में कथित अवैध मतांतरण गतिविधियों की जांच कराई जाए।

फिलहाल प्रशासन की ओर से इस प्रस्ताव पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।


ग्राम सभा ने क्यों जताई चिंता?

ग्राम सभा में उपस्थित प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि कुछ स्थानों पर सेवा, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं के नाम पर मतांतरण की गतिविधियां संचालित की जा रही हैं।

उनका कहना है कि इससे स्थानीय धार्मिक परंपराओं और सामाजिक ताने-बाने पर प्रभाव पड़ रहा है। ग्राम सभा के सदस्यों ने दावा किया कि ऐसी गतिविधियों से सामाजिक तनाव और विवाद की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।

हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और प्रशासनिक जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।


आगे क्या हो सकता है?

विशेषज्ञों के अनुसार ग्राम सभा द्वारा पारित प्रस्ताव स्थानीय स्तर पर महत्वपूर्ण माने जाते हैं, लेकिन किसी भी प्रकार के प्रतिबंध या कानूनी कार्रवाई के लिए राज्य और केंद्र के प्रचलित कानूनों का पालन आवश्यक होगा।

अब यह मामला जिला प्रशासन और संबंधित विभागों के समक्ष जाएगा, जहां प्रस्तावों की वैधानिक समीक्षा की जाएगी। इसके बाद आगे की प्रक्रिया तय होगी।


Religious Conversion Ban Proposal को लेकर कांकेर जिले की 26 ग्राम सभाओं का यह निर्णय राज्यभर में चर्चा का विषय बन गया है। ग्राम सभाओं ने चर्च, प्रार्थना सभा, पादरियों की गतिविधियों और मतांतरण से जुड़े मुद्दों पर कई प्रस्ताव पारित किए हैं। अब सभी की नजर प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर रहेगी। यह मामला आदिवासी क्षेत्रों की सांस्कृतिक पहचान, धार्मिक स्वतंत्रता और कानूनी प्रक्रियाओं से जुड़ा होने के कारण महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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