Raigarh HIV Drug Abuse ने छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में गंभीर चिंता पैदा कर दी है। स्थानीय स्तर पर सामने आई जानकारी के अनुसार, नशे के लिए उपयोग किए जा रहे इंजेक्शनों और एक ही सिरिंज को कई लोगों द्वारा साझा करने की वजह से करीब 135 युवाओं के HIV संक्रमित होने की बात सामने आई है। इस मामले में ओडिशा सीमा से कथित अवैध सप्लाई नेटवर्क, नशीले इंजेक्शनों की कालाबाजारी और युवाओं में बढ़ती नशे की लत ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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Raigarh HIV Drug Abuse में क्या सामने आया?
स्थानीय रिपोर्ट के अनुसार, रायगढ़ जिले के कुछ इलाकों में युवाओं द्वारा नशीले इंजेक्शनों का दुरुपयोग किया जा रहा है। इनमें मुख्य रूप से दर्द निवारक दवाएं ब्यूटोरफेनॉल (Butorphanol) और पेंटाजोसिन (Pentazocine) शामिल हैं, जिन्हें केवल चिकित्सकीय पर्चे पर ही दिया जाना चाहिए।
बताया गया है कि इन इंजेक्शनों का प्रिंट मूल्य लगभग 49 से 67 रुपये है, लेकिन अवैध नेटवर्क इन्हें 500 से 700 रुपये तक में बेच रहा है। इसी वजह से कई युवा नशे की लत पूरी करने के लिए चोरी, लूट और अन्य अपराधों की ओर भी बढ़ रहे हैं।
ओडिशा बॉर्डर से कैसे हो रही अवैध सप्लाई?
Raigarh HIV Drug Abuse मामले में आरोप है कि ओडिशा के झारसुगुड़ा और बरगढ़ जिलों से नशीले इंजेक्शन रायगढ़ तक पहुंचाए जा रहे हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, कथित तौर पर कुछ मेडिकल स्टोरों और स्थानीय सप्लाई नेटवर्क के जरिए इंजेक्शन सीमा पार भेजे जाते हैं। इसके बाद स्थानीय वेंडर इन्हें शहर के अलग-अलग इलाकों में ऊंचे दामों पर बेचते हैं।
हालांकि इन आरोपों की जांच संबंधित एजेंसियों द्वारा की जानी बाकी है और दोष तय होने तक इन्हें आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
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एक ही सिरिंज का इस्तेमाल बना HIV संक्रमण की बड़ी वजह
स्वास्थ्य विशेषज्ञ लंबे समय से चेतावनी देते रहे हैं कि एक ही सिरिंज का कई लोगों द्वारा उपयोग HIV, हेपेटाइटिस-बी और हेपेटाइटिस-सी जैसे गंभीर संक्रमणों के फैलने का प्रमुख कारण बन सकता है।
रायगढ़ के प्रभावित इलाकों में भी यही पैटर्न सामने आने का दावा किया गया है। कई युवाओं ने बताया कि नशे के दौरान वे दोस्तों के साथ एक ही सिरिंज साझा करते थे, जिसके बाद उन्हें HIV संक्रमण का पता चला।
यह स्पष्ट करना जरूरी है कि HIV केवल सिरिंज साझा करने से ही नहीं, बल्कि असुरक्षित रक्त, असुरक्षित यौन संबंध और संक्रमित मां से बच्चे तक भी फैल सकता है।
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स्टिंग ऑपरेशन में क्या सामने आया?
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि कई दिनों तक किए गए स्टिंग ऑपरेशन में डमी ग्राहक बनाकर नशीले इंजेक्शन खरीदने की कोशिश की गई।
स्टिंग के दौरान कथित रूप से यह सामने आया कि कुछ लोग प्रतिबंधित इंजेक्शन के लिए एडवांस राशि मांग रहे थे, जबकि कुछ मामलों में प्रिंट मूल्य से कई गुना अधिक कीमत वसूली गई।
इसके अलावा यह भी दावा किया गया कि बसों और स्थानीय सप्लाई चैन के माध्यम से इंजेक्शन रायगढ़ तक पहुंचाए जाते हैं। इन दावों की पुष्टि जांच एजेंसियों द्वारा की जानी बाकी है।
पीड़ित युवाओं ने क्या बताया?
कई प्रभावित युवाओं ने दावा किया कि वे बेरोजगारी और गलत संगत के कारण नशे की लत में फंस गए।
कुछ युवाओं ने बताया कि जेल या अस्पताल में जांच के दौरान उन्हें HIV संक्रमित होने की जानकारी मिली। कई लोगों ने इलाज शुरू होने में देरी और नशा छोड़ने में आने वाली कठिनाइयों का भी जिक्र किया।
पुलिस का क्या कहना है?
रायगढ़ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह ने कहा कि समाज में युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ पुलिस लगातार अभियान चला रही है।
उन्होंने बताया कि अवैध शराब, बिना चिकित्सकीय पर्चे के Schedule H और Schedule X श्रेणी की दवाओं की बिक्री तथा नशीले पदार्थों की तस्करी में शामिल लोगों के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है। पुलिस ने चेतावनी दी है कि भविष्य में भी ऐसे मामलों में सख्त कानूनी कार्रवाई जारी रहेगी।
HIV से बचाव के लिए क्या करें?
- कभी भी किसी अन्य व्यक्ति द्वारा इस्तेमाल की गई सिरिंज या सुई का उपयोग न करें।
- केवल डॉक्टर की सलाह पर ही इंजेक्शन या दवाएं लें।
- HIV की जांच और इलाज के लिए सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों से संपर्क करें।
- नशे की लत होने पर डी-एडिक्शन सेंटर या विशेषज्ञ चिकित्सक से मदद लें।
- युवाओं में जागरूकता और समय पर परामर्श संक्रमण रोकने का सबसे प्रभावी तरीका है।
Raigarh HIV Drug Abuse मामला केवल अवैध नशीले इंजेक्शनों की सप्लाई का नहीं, बल्कि युवाओं के स्वास्थ्य और भविष्य से जुड़ा गंभीर सामाजिक मुद्दा है। यदि अवैध दवा नेटवर्क, नशे की लत और सिरिंज साझा करने जैसी समस्याओं पर समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई, तो इसका असर और गंभीर हो सकता है। पुलिस जांच, स्वास्थ्य विभाग की जागरूकता और समाज की सहभागिता से ही इस चुनौती पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है।
