Paryushan Parva के अवसर पर दुर्ग में श्रमण संघ परिवार ने तप-साधना, संयम और धार्मिक भावनाओं के साथ पर्व का स्वागत-अभिनंदन किया। जय आनंद मधुकर रतन भवन, बांधा तालाब दुर्ग में आयोजित धर्मसभा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए।
धर्मसभा में महिलाएं पीली साड़ी और पुरुष वर्ग सफेद सामायिक वेशभूषा में उपस्थित रहे। पूरे आयोजन में आत्मचिंतन, अहिंसा, क्षमा और संयम की भावना प्रमुख रही।
जैन धर्म में पर्युषण पर्व को आत्मशुद्धि और आध्यात्मिक साधना का महत्वपूर्ण अवसर माना जाता है। भारत सरकार के पर्यटन पोर्टल पर भी जैन धार्मिक परंपराओं और पर्युषण जैसे पर्वों के सांस्कृतिक महत्व का उल्लेख मिलता है।
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Paryushan Parva का धार्मिक महत्व
Paryushan Parva केवल बाहरी उत्सव या धार्मिक परंपरा तक सीमित नहीं है। यह व्यक्ति को अपने भीतर झांकने, आत्ममंथन करने और जीवन में संयम तथा सद्भाव को मजबूत करने का अवसर देता है।
धर्मसभा को संबोधित करते हुए मानव मिलन के संस्थापक राष्ट्र संत डॉ. मणिभद्र मुनि ने कहा कि पर्युषण पर्व में अहिंसा, क्षमा और संवत्सरी के भावों का विशेष महत्व है। वर्षभर के बाद आने के कारण इसे वर्षधर पर्व भी कहा जाता है।
उन्होंने बताया कि जैन परंपरा में संवत्सरी पर्व की ऐतिहासिकता का उल्लेख जैन आगम और प्राचीन ग्रंथों में मिलता है। पर्व का मूल उद्देश्य व्यक्ति को आत्मबोध और आत्मकल्याण की दिशा में आगे बढ़ाना है।
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लौकिक और लोकोत्तर पर्व में अंतर
धार्मिक चिंतन के अनुसार पर्वों को मुख्य रूप से लौकिक और लोकोत्तर दो श्रेणियों में समझा जाता है। लौकिक पर्वों में सामान्यतः बाहरी सजावट, मनोरंजन और उत्सव का पक्ष प्रमुख होता है।
इसके विपरीत लोकोत्तर पर्व व्यक्ति को बाहरी आडंबर से ऊपर उठाकर आत्मचिंतन, तप, त्याग, संयम और क्षमा की ओर प्रेरित करते हैं। Paryushan Parva इसी आध्यात्मिक भावना का प्रतीक है।
जैन धर्म की अहिंसा और आध्यात्मिक परंपरा का व्यापक सांस्कृतिक प्रभाव भी देखने को मिलता है। भारत सरकार का Incredible India पोर्टल – Jainism
Paryushan Parva देता है आत्मशुद्धि का संदेश
पर्युषण पर्व का संदेश है कि मनुष्य केवल बाहरी जीवन को सुंदर बनाने तक सीमित न रहे, बल्कि अपने विचारों और व्यवहार को भी शुद्ध करे।
यह पर्व भय या प्रलोभन के बजाय आत्मबोध, संयम और साधना से जुड़ने की प्रेरणा देता है। इसी कारण इसे जीवन में सकारात्मक बदलाव और आत्मकल्याण की दिशा में महत्वपूर्ण आध्यात्मिक अवसर माना जाता है।
आठ दिनों तक होंगे विशेष धार्मिक आयोजन
श्रमण संघ परिवार की ओर से पर्युषण पर्व के दौरान लगातार आठ दिनों तक विभिन्न धार्मिक गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। इन आयोजनों में धर्मसभा, धार्मिक वाचन, जाप अनुष्ठान और प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिताएं शामिल हैं।
पर्युषण के दौरान श्रमण संघ परिवार की महिलाएं प्रतिदिन अलग-अलग रंगों की साड़ियों में धर्मसभा में शामिल होंगी। इससे धार्मिक आयोजन में अनुशासन और सामूहिक सहभागिता का विशेष वातावरण देखने को मिलेगा।
जयमल जी महाराज का जाप और कल्पसूत्र वाचन
हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी आचार्य सम्राट श्री जयमल जी महाराज का जाप अनुष्ठान जय आनंद मधुकर रतन भवन, बांधा तालाब दुर्ग में आयोजित किया जाएगा।
यह जाप प्रतिदिन रात 8:15 बजे से 9:20 बजे तक होगा। आयोजन में श्रद्धालु धार्मिक साधना और जाप में सहभागी बनेंगे।
दोपहर में 2 बजे से साध्वी लक्ष्मी जी महाराज द्वारा कल्पसूत्र का वाचन किया जाएगा। आज हुए कल्पसूत्र वाचन कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रमण संघ परिवार की महिलाएं उपस्थित रहीं।
धार्मिक प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता भी होगी
कल्पसूत्र वाचन के बाद श्रमण संघ महिला मंडल की ओर से धार्मिक प्रश्नोत्तरी गेम प्रतियोगिता आयोजित की गई। प्रतियोगिता में धर्म और विभिन्न धार्मिक विषयों से जुड़े सवालों के माध्यम से श्रद्धालुओं की सहभागिता सुनिश्चित की गई।
आयोजकों के अनुसार पर्युषण पर्व के दौरान दोपहर के समय प्रतिदिन अलग-अलग विषयों पर ऐसी धार्मिक प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी।
Paryushan Parva जैन समाज के लिए केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आत्मचिंतन, तप, संयम, अहिंसा और क्षमा का महत्वपूर्ण अवसर है। दुर्ग में श्रमण संघ परिवार द्वारा आयोजित धर्मसभा और विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम इसी आध्यात्मिक भावना को मजबूत कर रहे हैं। आठ दिनों तक चलने वाले जाप, कल्पसूत्र वाचन और धार्मिक प्रतियोगिताओं से श्रद्धालुओं को आत्मशुद्धि तथा धर्म-साधना की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा।
