Deh Daan के संकल्प के जरिए दुर्ग के कातुलबोर्ड निवासी श्रीमती देवयानी चंद्राकर ने मानव सेवा की दिशा में एक प्रेरणादायी उदाहरण पेश किया है। लिनेस क्लब भिलाई द्वारा मनाए जा रहे सेवा सप्ताह के अंतर्गत उन्होंने अपनी देहदान वसीयत नवदृष्टि फाउंडेशन के सदस्यों को सौंपी।
देवयानी चंद्राकर ने यह संकल्प नवदृष्टि फाउंडेशन के सदस्य कुलवंत भाटिया, राज आढ़तिया एवं रितेश जैन को सौंपा। उनके इस निर्णय को परिवार और समाज के लोगों ने अनुकरणीय बताया।
इस अवसर पर सन्ना ब्लड बैंक के संचालक माधव राव के साथ लिनेस क्लब भिलाई की कल्पना श्रीवास्तव, मनीषा सिन्हा, स्नेहा शर्मा और मंजू तिवारी भी उपस्थित रहीं।
सेवा सप्ताह में लिया देहदान का संकल्प
लिनेस क्लब भिलाई के सेवा सप्ताह के दौरान लिया गया यह संकल्प मानव सेवा और सामाजिक जागरूकता का संदेश देता है। देवयानी चंद्राकर के निर्णय की उपस्थित लोगों ने सराहना की और इसे समाज के लिए प्रेरणादायी कदम बताया।
भारत सरकार के राष्ट्रीय अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण संगठन (NOTTO) के अनुसार, देहदान मृत्यु के बाद चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान के लिए शरीर उपलब्ध कराने का माध्यम है।
Deh Daan के पीछे देवयानी चंद्राकर की भावना
श्रीमती देवयानी चंद्राकर ने कहा कि लोगों की सेवा करना उनका स्वभाव है। किसी जरूरतमंद की मदद करने से उन्हें आत्मिक संतुष्टि मिलती है।
उन्होंने बताया कि उनके पति की भी देहदान करने की इच्छा थी, लेकिन कोरोना संक्रमण के कारण उनके निधन के बाद उनका देहदान संभव नहीं हो सका। अब उन्होंने स्वयं देहदान का संकल्प लेकर पति की उस इच्छा को पूरा करने का प्रयास किया है।
देवयानी चंद्राकर ने कहा कि यदि उनकी आंखों से दो लोगों को रोशनी मिल सके और उनकी देह समाज तथा चिकित्सा शिक्षा के काम आ सके, तो इससे बड़ी संतुष्टि उनके लिए और कुछ नहीं होगी।
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परिवार ने दी निर्णय को सहमति
देवयानी चंद्राकर के इस निर्णय में उनके पुत्र विशेष चंद्राकर और पुत्री भूमिका पटेल ने भी अपनी सहमति प्रदान की। परिवार की सहमति इस मानवीय संकल्प को और महत्वपूर्ण बनाती है।
NOTTO की आधिकारिक जानकारी के अनुसार, मृत्यु के बाद अंग और ऊतक दान की इच्छा व्यक्त करने के साथ परिवार को भी अपनी इच्छा के बारे में जानकारी देना महत्वपूर्ण है।
देहदान का उद्देश्य अंगदान से अलग है। देहदान मुख्य रूप से चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान के लिए शरीर उपलब्ध कराने से संबंधित है, जबकि अंग एवं ऊतक दान का उद्देश्य निर्धारित चिकित्सकीय परिस्थितियों में प्रत्यारोपण के माध्यम से जरूरतमंद मरीजों की मदद करना है।
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नवदृष्टि फाउंडेशन चला रहा जागरूकता अभियान
नवदृष्टि फाउंडेशन के सदस्य जितेंद्र हासवानी ने बताया कि संस्था लगातार नेत्रदान, देहदान, रक्तदान और त्वचा दान के प्रति लोगों को जागरूक करने का कार्य कर रही है।
उन्होंने कहा कि जागरूकता अभियानों के सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं और समाज में लोग आगे बढ़कर ऐसे मानवीय कार्यों के लिए संकल्प ले रहे हैं।
देहदान एवं नेत्रदान से संबंधित जानकारी के लिए संस्था की ओर से 9827190500 और 9340007904 नंबर जारी किए गए हैं।
Deh Daan से चिकित्सा शिक्षा में योगदान
Deh Daan केवल एक सामाजिक संकल्प नहीं, बल्कि चिकित्सा शिक्षा के लिए भी महत्वपूर्ण योगदान माना जाता है। NOTTO के अनुसार, दान किए गए शरीर चिकित्सा शिक्षकों और शरीर रचना विज्ञान के अध्ययन के लिए महत्वपूर्ण शिक्षण साधन होते हैं।
भारत में अंग और ऊतक दान को लेकर जागरूकता बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार का NOTTO भी विभिन्न अभियान चलाता है। सरकारी जानकारी के अनुसार, नागरिक अंग एवं ऊतक दान की इच्छा को आधिकारिक पोर्टल के माध्यम से दर्ज कर सकते हैं।
समाज के लिए बनी प्रेरणा
देवयानी चंद्राकर का फैसला इस बात का उदाहरण है कि मानव सेवा केवल जीवनकाल तक सीमित नहीं होती। मृत्यु के बाद भी किसी के शरीर या अंगों का उपयोग समाज और चिकित्सा क्षेत्र के लिए योगदान बन सकता है।
उनके इस निर्णय को नवदृष्टि फाउंडेशन से जुड़े सदस्यों ने साधुवाद और शुभकामनाएं दीं। संस्था की ओर से अनिल बल्लेवार, कुलवंत भाटिया, राज आढ़तिया, प्रवीण तिवारी, मुकेश आढ़तिया, हरमन दुलई, रितेश जैन, राजेश पारख, जितेंद्र हासवानी, मंगल अग्रवाल, किरण भंडारी, उज्जवल पींचा, सत्येंद्र राजपूत, सुरेश जैन, पीयूष मालवीय, दीपक बंसल, विकास जायसवाल, मुकेश राठी, प्रभु दयाल उजाला, प्रमोद बाघ, सपन जैन, यतीन्द्र चावड़ा, जितेंद्र कारिया, बंसी अग्रवाल, अभिजीत पारख, मोहित अग्रवाल, चेतन जैन, दयाराम टांक, विनोद जैन और राकेश जैन ने उनके निर्णय की सराहना की।
Deh Daan का संकल्प लेकर देवयानी चंद्राकर ने मानव सेवा और सामाजिक जागरूकता की एक उल्लेखनीय मिसाल पेश की है। पति की अधूरी इच्छा को पूरा करने की उनकी भावना और चिकित्सा शिक्षा के लिए अपनी देह उपयोगी बनाने का निर्णय समाज को संवेदनशीलता, सेवा और परोपकार का संदेश देता है। ऐसे संकल्प देहदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने और लोगों को मानव कल्याण के लिए आगे आने की प्रेरणा दे सकते हैं।
