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दुर्ग में UCC Chhattisgarh पर परिचयात्मक बैठक

UCC Chhattisgarh को व्यवहारिक, समावेशी और जनोपयोगी बनाने की दिशा में राज्य शासन द्वारा गठित समान नागरिक संहिता समिति ने जनपरामर्श की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसी क्रम में मंगलवार, 8 सितंबर 2026 को दुर्ग में परिचयात्मक एवं उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई।

बैठक में सामाजिक, राजनीतिक और धार्मिक संगठनों के पदाधिकारियों ने समान नागरिक संहिता से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर अपने विचार और सुझाव रखे। बैठक का उद्देश्य अलग-अलग सामाजिक समूहों के विचारों को समझना और प्रस्तावित प्रारूप को व्यापक परामर्श के आधार पर तैयार करना बताया गया।

बैठक में सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी एम.के. राउत, वरिष्ठ अधिवक्ता मोहन पवार और सेवानिवृत्त प्राचार्या डॉ. ज्योति रानी सिंह के समक्ष विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों ने अपनी बात रखी।

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विवाह से लेकर उत्तराधिकार तक मुद्दों पर चर्चा

बैठक के दौरान विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, भरण-पोषण और लिव-इन संबंध जैसे संवेदनशील विषयों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। चर्चा में पारंपरिक सामाजिक मान्यताओं और आधुनिक कानूनी सुधारों के बीच संतुलन जैसे पहलुओं पर भी विचार हुआ।

UCC Chhattisgarh से जुड़े इस परामर्श में अलग-अलग सामाजिक और सामुदायिक संगठनों की राय सामने आई। कुछ प्रतिनिधियों ने समान नागरिक संहिता के समर्थन में विचार रखे, जबकि कुछ ने अपनी आशंकाओं और सुझावों को समिति के सामने रखा।

इससे स्पष्ट है कि फिलहाल प्रक्रिया सुझाव और विचार-विमर्श के चरण में है। बैठक को छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता के संभावित प्रारूप को लेकर व्यापक जनसंवाद की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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UCC Chhattisgarh पर पक्ष-विपक्ष में आए सुझाव

बैठक में वरिष्ठ नागरिक कल्याण मंच, विभिन्न कुर्मी समाज, गोंडवाना संगठनों, साहू समाज, आदिवासी संगठनों, मुस्लिम समाज, भारतीय बौद्ध महासभा, राम मंदिर ट्रस्ट और अन्य सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधि शामिल हुए।

राजनीतिक क्षेत्र से आम आदमी पार्टी सहित अन्य संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी अपनी राय रखी। वहीं व्यापार, कर्मचारी, पेंशनर्स और वरिष्ठ नागरिक संगठनों से जुड़े प्रतिनिधियों ने भी चर्चा में भाग लिया।

इस व्यापक भागीदारी के कारण बैठक में सामाजिक, धार्मिक, राजनीतिक और कानूनी दृष्टिकोणों से जुड़े कई पहलुओं पर विचार सामने आए।

समिति सुझावों के आधार पर तैयार करेगी ड्राफ्ट

समिति के सदस्यों ने बैठक में बताया कि विभिन्न सामाजिक, राजनीतिक और धार्मिक संघों से प्राप्त सुझावों के आधार पर ड्राफ्ट तैयार किया जाएगा। इसका अर्थ है कि वर्तमान चरण में समिति सुझाव एकत्र कर रही है और अंतिम प्रारूप तैयार करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।

बैठक में अधिवक्ता प्रांजल शर्मा ने पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से समान नागरिक संहिता क्या है, इसके उद्देश्य और इससे जुड़े विषयों की विस्तारपूर्वक जानकारी दी।

UCC Chhattisgarh की प्रक्रिया में अलग-अलग वर्गों की राय को शामिल करने का प्रयास इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और भरण-पोषण जैसे विषय सीधे पारिवारिक एवं सामाजिक जीवन से जुड़े होते हैं।

वेबसाइट और ई-मेल से भी मांगे गए सुझाव

बैठक में समिति की वेबसाइट ucc.cgstate.gov.in और ई-मेल ucc-chhattisgarh@cg.gov.in की जानकारी भी साझा की गई। समिति की ओर से इन माध्यमों के जरिए भी लोगों और संगठनों से सुझाव आमंत्रित किए गए हैं।

छत्तीसगढ़ शासन का आधिकारिक पोर्टल राज्य की विभिन्न सरकारी सेवाओं और योजनाओं के लिए आधिकारिक डिजिटल माध्यम उपलब्ध कराता है।

समान नागरिक संहिता से संबंधित जानकारी या सुझाव देने वाले लोगों के लिए समिति द्वारा साझा किए गए आधिकारिक माध्यमों का उपयोग करना अधिक उपयुक्त रहेगा।

बैठक में कौन-कौन रहा मौजूद

बैठक में रायपुर संभाग के आयुक्त एवं समिति के सदस्य सचिव श्याम धावड़े, दुर्ग संभाग आयुक्त एस.एन. राठौर, कलेक्टर अभिजीत सिंह, एडीएम वीरेन्द्र सिंह और दुर्ग शहर एसडीएम प्रफुल्ल गुप्ता सहित अधिकारी उपस्थित रहे।

इसके अलावा दुर्ग, बालोद और बेमेतरा जिलों से सामाजिक, राजनीतिक और धार्मिक संस्थाओं के पदाधिकारी भी बैठक में शामिल हुए।

बैठक में शामिल प्रतिनिधियों में अरुण अग्रवाल, धन्नू राम ठाकुर, बी.एल. वर्मा, विजय चंद्राकर, अशोक कंगाले, के. उमाशंकर राव, लखन लाल साहू, रविन्द्र साहू, भूपेन्द्र नेताम, सियाराम सारगो, खेमलाल कुंजाम, बी.आर. साहू, पद्मश्री शमशाद बेगम, लव कुमार रामटेके सहित अनेक प्रतिनिधि शामिल रहे।

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UCC Chhattisgarh को लेकर दुर्ग में हुई बैठक राज्य में समान नागरिक संहिता के संभावित प्रारूप पर चल रहे जनपरामर्श की महत्वपूर्ण कड़ी है। विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, भरण-पोषण और लिव-इन संबंधों जैसे संवेदनशील मुद्दों पर विभिन्न संगठनों की राय सामने आई। समिति अब प्राप्त सुझावों के आधार पर ड्राफ्ट तैयार करने की दिशा में आगे बढ़ेगी। ऐसे में आने वाले समय में समिति की ओर से प्राप्त सुझावों और प्रस्तावित प्रारूप को लेकर आगे की गतिविधियां महत्वपूर्ण रहेंगी।

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