बस्तर में स्थित एनएमडीसी के नगरनार स्टील प्लांट ने उत्पादन के क्षेत्र में नया कीर्तिमान स्थापित किया है। NMDC Nagarnar Steel Plant Production के तहत 3 नवंबर 2026 को प्लांट ने 24 घंटे में 455 हॉट रोल्ड (HR) कॉइल्स का उत्पादन किया। यह अब तक का सर्वाधिक दैनिक उत्पादन बताया गया है। हालांकि, उत्पादन में लगातार बढ़ोतरी के बीच आसपास के गांवों से औद्योगिक अपशिष्ट जल खेतों तक पहुंचने की शिकायतें भी सामने आती रही हैं। ऐसे में प्लांट के उत्पादन रिकॉर्ड के साथ पर्यावरण संरक्षण की जवाबदेही पर भी चर्चा जरूरी हो गई है।
NMDC Nagarnar Steel Plant Production में नया रिकॉर्ड
नगरनार स्टील प्लांट की हॉट स्ट्रिप मिल ने 3 नवंबर को एक दिन में 455 HR कॉइल्स तैयार किए। इससे पहले इसी महीने 1 नवंबर को 440 कॉइल्स का उत्पादन कर प्लांट ने अपना पिछला दैनिक रिकॉर्ड बनाया था।
महज दो दिन के भीतर पुराने रिकॉर्ड को पीछे छोड़ना प्लांट की उत्पादन क्षमता और कर्मचारियों के प्रयासों को दर्शाता है। लगातार बन रहे ये रिकॉर्ड बस्तर में स्थापित इस औद्योगिक परियोजना के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि माने जा रहे हैं।
एक साल में उत्पादन 63 प्रतिशत बढ़ा
प्लांट सूत्रों से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2025-26 में नगरनार स्टील प्लांट ने कुल 23,24,902 टन हॉट रोल्ड कॉइल्स का उत्पादन किया। इसके मुकाबले वित्तीय वर्ष 2024-25 में उत्पादन 14,38,646 टन था।
इस तरह दोनों वित्तीय वर्षों के बीच उत्पादन में लगभग 63 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। दैनिक उत्पादन का 455 कॉइल्स तक पहुंचना इसी बढ़ती उत्पादन क्षमता का एक और उदाहरण है।
हालांकि, किसी भी बड़े औद्योगिक संयंत्र की सफलता केवल उत्पादन के आंकड़ों से नहीं मापी जानी चाहिए। आसपास रहने वाले ग्रामीणों, किसानों और प्राकृतिक संसाधनों पर पड़ने वाले प्रभाव का आकलन भी उतना ही जरूरी है।
किसानों ने 200 और 400 एकड़ खेत प्रभावित होने की शिकायत की
नगरनार प्लांट के आसपास दूषित पानी खेतों तक पहुंचने की शिकायतें पहले भी सामने आ चुकी हैं। नवंबर 2023 में मंगनपुर और उपनपाल क्षेत्र के किसानों ने आरोप लगाया था कि प्लांट के गेट नंबर-3 से निकलने वाला काला और तेलयुक्त पानी उनकी कृषि भूमि तक पहुंच रहा है।
उस समय किसानों ने करीब 200 एकड़ जमीन में धान की फसल प्रभावित होने और मिट्टी की उर्वरता पर असर पड़ने की शिकायत की थी।
वहीं, जुलाई 2023 में सामने आई एक अन्य रिपोर्ट में किसानों ने लगभग 400 एकड़ खेत प्रभावित होने का दावा किया था। ये दोनों अलग-अलग शिकायतों के आंकड़े हैं। इसलिए इन्हें जोड़कर कुल प्रभावित कृषि भूमि का आंकड़ा मानना सही नहीं होगा।
10 पंचायतों ने उठाई थी दूषित पानी की समस्या
वर्ष 2024 में आसपास की 10 पंचायतों के प्रतिनिधियों ने भी दूषित पानी और खेती पर पड़ रहे संभावित प्रभाव को लेकर आवाज उठाई थी। भू-प्रभावित ग्रामीणों ने मुआवजे और समस्या के स्थायी समाधान की मांग की थी।
किसानों की मुख्य मांग थी कि प्लांट से निकलने वाले अपशिष्ट जल को खेतों तक पहुंचने से रोकने के लिए प्रभावी व्यवस्था बनाई जाए। उनका कहना था कि बार-बार शिकायतों के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान जरूरी है।
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2026 में 250 एकड़ खेतों तक पहुंचा काला पानी
जून 2026 में कस्तूरी गांव के किसानों ने एक बार फिर नगरनार स्टील प्लांट के कथित काले अपशिष्ट जल के खेतों में फैलने की शिकायत की। सामने आई रिपोर्ट के अनुसार, करीब 250 एकड़ कृषि भूमि प्रभावित होने और लगभग 110 किसानों की खेती पर संकट आने का दावा किया गया।
किसानों के मुताबिक, खरीफ फसल की तैयारी के लिए उन्होंने सहकारी समितियों से लगभग एक करोड़ रुपये का कृषि ऋण लिया था। खेतों में पानी रोकने के लिए ग्रामीणों ने मिट्टी का अस्थायी बांध भी बनाया, लेकिन बारिश के दौरान बांध बह गया और पानी दोबारा खेतों तक पहुंच गया।
किसानों ने प्रभावित खेतों का सर्वे कराने, मिट्टी और पानी की वैज्ञानिक जांच करने, फसल नुकसान का आकलन कर मुआवजा देने तथा पानी की निकासी रोकने के लिए स्थायी व्यवस्था बनाने की मांग की थी।
जीरो लिक्विड डिस्चार्ज व्यवस्था के बावजूद शिकायतें क्यों?
एनएमडीसी स्टील की वार्षिक रिपोर्ट में प्लांट की प्रमुख इकाइयों में एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट, पानी के पुनर्चक्रण के लिए UF-RO ट्रीटमेंट और सेंट्रलाइज्ड जीरो लिक्विड डिस्चार्ज व्यवस्था का उल्लेख है।
कंपनी की रिपोर्ट के अनुसार, प्लांट के आसपास लगभग 139 हेक्टेयर क्षेत्र में ग्रीन बेल्ट विकसित किया जा चुका है। इसे करीब 240 हेक्टेयर तक बढ़ाने का लक्ष्य भी बताया गया है।
इसके बावजूद किसानों की लगातार सामने आ रही शिकायतें जमीनी स्तर पर व्यवस्था की प्रभावशीलता को लेकर सवाल खड़े करती हैं। यह स्पष्ट होना जरूरी है कि कथित अपशिष्ट जल खेतों तक किन परिस्थितियों में पहुंच रहा है और क्या इसकी नियमित वैज्ञानिक निगरानी की जा रही है।
रिकॉर्ड उत्पादन के साथ पर्यावरण की जवाबदेही भी जरूरी
नगरनार स्टील प्लांट बस्तर के औद्योगिक विकास की महत्वपूर्ण परियोजना है। उत्पादन में वृद्धि से क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियों और आर्थिक अवसरों को बढ़ावा मिल सकता है। लेकिन विकास की यह प्रक्रिया स्थानीय किसानों और पर्यावरण की कीमत पर नहीं होनी चाहिए।
अब छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल और जिला प्रशासन से अपेक्षा है कि कस्तूरी, मंगनपुर और उपनपाल सहित शिकायत वाले क्षेत्रों में मिट्टी और पानी के नमूनों की स्वतंत्र वैज्ञानिक जांच कराई जाए। जांच के निष्कर्ष सार्वजनिक किए जाएं और किसानों की शिकायतों पर की गई कार्रवाई की जानकारी भी सामने रखी जाए।
NMDC Nagarnar Steel Plant Production ने 24 घंटे में 455 HR कॉइल्स बनाकर नया रिकॉर्ड जरूर कायम किया है, लेकिन इस उपलब्धि के साथ पर्यावरण संरक्षण की जिम्मेदारी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। बस्तर के लिए वास्तविक औद्योगिक विकास तभी सार्थक होगा, जब उत्पादन के साथ किसानों के खेत, जलस्रोत और आसपास का पर्यावरण भी सुरक्षित रहें।
