रायपुर। Mahadev Betting App Case में ऑनलाइन सट्टा नेटवर्क के कथित मुख्य संचालक सौरभ चंद्राकर की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। रायपुर की स्पेशल CBI कोर्ट ने उसे 12 नवंबर 2026 तक CBI की कस्टोडियल रिमांड पर सौंप दिया है। अगले आठ दिनों तक केंद्रीय जांच एजेंसी उससे पूछताछ करेगी। इस दौरान महादेव ऑनलाइन सट्टा ऐप के कारोबार, कथित प्रोटेक्शन मनी और पुलिस-प्रशासन के अधिकारियों से जुड़े नेटवर्क की जांच की जाएगी।
बुधवार को सौरभ चंद्राकर को कोर्ट में पेश किया गया था। इस दौरान महासमुंद के पूर्व कांग्रेस विधायक विनोद सेवनलाल चंद्राकर और महादेव ऐप मामले से जुड़े पैनल ऑपरेटर विशाल रमानी भी उससे मिलने कोर्ट पहुंचे। वहीं, प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भी सौरभ के खिलाफ जारी गैर-जमानती वारंट को लागू कराने के लिए आवेदन पेश किया, जिसे कोर्ट ने फिलहाल प्री-मैच्योर बताया।
Mahadev Betting App Case: प्रोटेक्शन मनी नेटवर्क की जांच करेगी CBI
CBI ने अपनी रिमांड अर्जी में बताया कि महादेव ऑनलाइन सट्टा ऐप का कारोबार चलाने के लिए कथित तौर पर पुलिस-प्रशासन के अधिकारियों और प्रभावशाली लोगों को प्रोटेक्शन मनी दी जाती थी।
जांच एजेंसी इस पूरे नेटवर्क का पता लगाने के लिए सौरभ चंद्राकर से पूछताछ करना चाहती है। एजेंसी यह जानने का प्रयास करेगी कि कथित तौर पर किन लोगों तक पैसा पहुंचाया जाता था और इस नेटवर्क में कौन-कौन शामिल थे।
सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए सौरभ चंद्राकर को दिल्ली ले जाया गया है। अब CBI की पूछताछ में सामने आने वाली जानकारियां इस मामले की जांच के लिए महत्वपूर्ण हो सकती हैं।
पूर्व विधायक विनोद सेवनलाल चंद्राकर ने की मुलाकात
कोर्ट में सुनवाई के दौरान महासमुंद के पूर्व कांग्रेस विधायक और पूर्व संसदीय सचिव विनोद सेवनलाल चंद्राकर भी सौरभ चंद्राकर से मिलने पहुंचे।
जानकारी के मुताबिक, शुरुआत में CBI अधिकारियों ने उन्हें सौरभ से मिलने की अनुमति नहीं दी। इसके बाद सौरभ ने अधिकारियों को बताया कि विनोद चंद्राकर उसके मामा हैं।
इसके बाद दोनों के बीच करीब एक से दो मिनट तक बातचीत हुई। इस दौरान उन्होंने एक-दूसरे का हालचाल जाना। मुलाकात के बाद विनोद चंद्राकर कोर्ट रूम से बाहर चले गए।
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विशाल रमानी भी सौरभ से मिलने पहुंचा
सुनवाई के दौरान महादेव ऐप मामले में ED के आरोपी और कथित पैनल ऑपरेटर विशाल रमानी भी कोर्ट पहुंचा। उसने सौरभ चंद्राकर से मुलाकात की और दोनों ने एक-दूसरे का हालचाल जाना।
बताया गया कि बातचीत के दौरान सौरभ ने पास में खड़े वकीलों से विशाल रमानी का परिचय भी कराया। कुछ मिनट बातचीत करने के बाद विशाल रमानी कोर्ट रूम से बाहर चला गया।
कौन है विशाल रमानी? ED के दस्तावेजों में क्या दावा?
ED के दस्तावेजों के मुताबिक, विशाल रमानी भिलाई के सुपेला का निवासी है। एजेंसी का आरोप है कि वह वर्ष 2011 से क्रिकेट मैचों पर अवैध सट्टेबाजी में शामिल था। वर्ष 2020 से वह सौरभ चंद्राकर के साथ ऑनलाइन सट्टे का कारोबार चला रहा था।
दस्तावेजों के अनुसार, वर्ष 2021 में उसने सौरभ आहूजा के साथ मिलकर महादेव ऐप के करीब 100 पैनल लिए थे।
ED का दावा है कि इस कारोबार से विशाल रमानी ने करीब 30 करोड़ रुपये कमाए, जिसमें उसका कथित हिस्सा 15 करोड़ रुपये था। एजेंसी के अनुसार, इस रकम से परिवार के सदस्यों के नाम पर संपत्तियां और सोना खरीदा गया। पैसों के लेनदेन में किराए के बैंक खातों और हवाला नेटवर्क का इस्तेमाल किए जाने का भी आरोप है।
ये सभी बातें जांच एजेंसी के आरोप और दस्तावेजों पर आधारित हैं। इनका अंतिम निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया में होना बाकी है।
ED के गैर-जमानती वारंट पर कोर्ट ने क्या कहा?
CBI की रिमांड पर सुनवाई पूरी होने के बाद ED ने भी कोर्ट में आवेदन पेश किया। ED ने सौरभ चंद्राकर के खिलाफ वर्ष 2023 में जारी गैर-जमानती वारंट को लागू कराने की अनुमति मांगी।
ED के वकील सौरभ पांडेय ने दलील दी कि वारंट जारी होने के बावजूद अब तक इसे लागू नहीं किया जा सका है। एजेंसी ने मांग की कि CBI की रिमांड खत्म होने के बाद जिस दिन सौरभ को कोर्ट में पेश किया जाए, उसी दिन ED को अपने वारंट पर कार्रवाई करने की अनुमति दी जाए।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने आवेदन को प्री-मैच्योर यानी समय से पहले बताया। कोर्ट ने कहा कि जिस तारीख को इसकी आवश्यकता होगी, उसी दिन इस संबंध में आवेदन किया जाना चाहिए।
12 नवंबर के बाद ED की अगली कार्रवाई पर नजर
Mahadev Betting App Case में फिलहाल सौरभ चंद्राकर 12 नवंबर 2026 तक CBI की कस्टोडियल रिमांड पर रहेगा। इसके बाद ED अपने गैर-जमानती वारंट को लागू कराने के लिए दोबारा अदालत में आवेदन कर सकती है।
अब जांच एजेंसियों की पूछताछ में कथित सट्टा नेटवर्क, पैसों के लेनदेन और प्रोटेक्शन मनी से जुड़े कौन से तथ्य सामने आते हैं, इस पर सबकी नजर रहेगी।
Mahadev Betting App Case में सौरभ चंद्राकर की CBI रिमांड और कोर्ट में हुई मुलाकातों ने मामले को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। एक ओर CBI कथित प्रोटेक्शन मनी और पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है, वहीं दूसरी ओर ED अपने गैर-जमानती वारंट को लागू कराने की तैयारी में है। 12 नवंबर 2026 की तारीख इस मामले में अगली महत्वपूर्ण कानूनी कार्रवाई के लिहाज से अहम होगी।
