रायपुर/दुर्ग, 5 नवंबर 2026। Mahadev Betting Case की जांच में छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले की एक शुरुआती पुलिस कार्रवाई बेहद अहम कड़ी बनकर सामने आई थी। मार्च 2022 में पुष्पक नगर के एक मकान में हुई छापेमारी के दौरान पुलिस ने लैपटॉप, मोबाइल फोन, बैंक पासबुक, डेबिट कार्ड और चेकबुक जब्त की थीं। शुरुआत में यह कार्रवाई ऑनलाइन सट्टेबाजी के एक स्थानीय नेटवर्क के खिलाफ थी, लेकिन आगे की जांच में इसके तार महादेव ऑनलाइन बेटिंग नेटवर्क से जुड़ते चले गए।
हिंदुस्तान टाइम्स की 4 नवंबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस और अदालत के रिकॉर्ड में दर्ज जानकारियों से पता चलता है कि इसी कार्रवाई ने देशभर में फैले कथित सट्टेबाजी नेटवर्क की जांच को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
Mahadev Betting Case: पुष्पक नगर में पुलिस की बड़ी कार्रवाई
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, 30 मार्च 2022 की रात करीब 11:50 बजे दुर्ग के मोहन नगर थाना क्षेत्र में अवैध ऑनलाइन जुआ संचालन की सूचना मिलने के बाद पुलिस ने कार्रवाई की थी। पुष्पक नगर का संबंधित स्थान थाने से लगभग तीन किलोमीटर दूर बताया गया।
निरीक्षक जितेंद्र वर्मा के नेतृत्व में पुलिस टीम ने मौके पर छापा मारा। यहां से तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। उनकी पहचान आलोक सिंह राजपूत (32), खड़क सिंह राजपूत (29) और रामप्रवेश साहू (22) के रूप में बताई गई।
पुलिस के मुताबिक, आरोपी एक कमरे में लैपटॉप और मोबाइल फोन के माध्यम से ऑनलाइन सट्टेबाजी का संचालन कर रहे थे। इस गतिविधि में क्रिकेट, घुड़दौड़, ग्रेहाउंड रेसिंग और कबड्डी जैसे खेलों पर दांव लगाने की सुविधा दी जा रही थी।
छापेमारी में 61 बैंक कार्ड और 39 चेकबुक जब्त
Mahadev Betting Case की शुरुआती जांच में पुलिस को बड़ी संख्या में इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और बैंकिंग दस्तावेज मिले थे। जब्त सामान की सूची में शामिल थे:
- 2 लैपटॉप
- 10 मोबाइल फोन
- 1 इंटरनेट राउटर
- 2 लैपटॉप चार्जर
- 15 बैंक पासबुक
- 61 डेबिट, क्रेडिट और एटीएम कार्ड
- 39 चेकबुक
- 12,500 रुपये नकद
पुलिस ने जब्त संपत्ति की कुल कीमत तीन लाख रुपये से कुछ अधिक आंकी थी।
एफआईआर में ऑनलाइन आईडी बनाने, अलग-अलग खेलों पर दांव लगाने और बैंकिंग माध्यम से पैसों के लेनदेन का उल्लेख किया गया था। बाद की जांच में इस गतिविधि के महादेव नेटवर्क से संबंध सामने आए।
देशभर में फैले नेटवर्क की जांच कैसे आगे बढ़ी?
उस समय दुर्ग के पुलिस अधीक्षक रहे वरिष्ठ अधिकारी अभिषेक पल्लव के अनुसार, महादेव ऐप के प्रमोटरों का नाम शामिल करते हुए पहली चार्जशीट जून 2022 में दाखिल किए जाने की जानकारी दी गई थी।
जांच में सामने आए विवरणों के अनुसार, कथित तौर पर इस नेटवर्क का संचालन देश के अलग-अलग हिस्सों में पैनल ऑपरेटरों की मदद से किया जा रहा था। विदेशों में भी इसके ऑपरेटर सक्रिय बताए गए, जिनमें संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के दुबई का नाम शामिल था।
अभिषेक पल्लव ने बताया कि चार्जशीट में महादेव सट्टेबाजी के संचालन के तरीके और नेटवर्क की कार्यप्रणाली का विस्तार से उल्लेख किया गया था।
जांच आगे बढ़ने के साथ पुलिस ने नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और पैसों के लेनदेन की भूमिका की पड़ताल की।
दुबई से संचालित पैनल ऑपरेटरों की भूमिका
Mahadev Betting Case में जांच के दौरान पैनल ऑपरेटरों की भूमिका भी महत्वपूर्ण बताई गई। पुलिस जांच के अनुसार, अलग-अलग स्थानों पर मौजूद ऑपरेटर ऑनलाइन आईडी और सट्टेबाजी की गतिविधियों को संचालित करने में मदद करते थे।
इस तरह स्थानीय स्तर पर सामने आया मामला धीरे-धीरे बड़े ऑनलाइन सट्टेबाजी नेटवर्क की जांच का हिस्सा बन गया।
पूर्व दुर्ग एसपी अभिषेक पल्लव के अनुसार, जांच में पैनल ऑपरेटरों की कार्यप्रणाली और उनके नेटवर्क से जुड़े संबंधों का पता लगाया गया था।
हालांकि, इस मामले में सामने आए आरोपों और जांच के निष्कर्षों को न्यायालय में अंतिम रूप से साबित होना अभी बाकी है।
मनी लॉन्ड्रिंग जांच तक कैसे पहुंचा मामला?
इस कार्रवाई का एक महत्वपूर्ण पहलू प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच से जुड़ा है। ED ने दुर्ग के मोहन नगर थाना मामले को प्रेडिकेट ऑफेंस यानी अनुसूचित मूल अपराध के रूप में आधार बनाकर मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू की थी।
जांच एजेंसी का उद्देश्य कथित सट्टेबाजी से प्राप्त धन, उसके बैंक खातों के माध्यम से लेनदेन और आगे उसके इस्तेमाल की पड़ताल करना था।
अभिषेक पल्लव ने यह भी बताया कि बाद में कथित म्यूल बैंक खातों को खोलने और उनके संचालन से जुड़े मामले में भिलाई भट्टी थाने में अलग एफआईआर दर्ज की गई थी।
म्यूल बैंक खाते ऐसे बैंक खाते होते हैं, जिनका इस्तेमाल दूसरे लोगों की ओर से संदिग्ध या अवैध धन के लेनदेन के लिए किया जाता है।
इस प्रकार दुर्ग में हुई शुरुआती कार्रवाई आगे चलकर आर्थिक अपराधों की जांच का महत्वपूर्ण आधार बनी।
Mahadev Betting Case फिलहाल कोर्ट में विचाराधीन
दुर्ग के वर्तमान वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक विजय अग्रवाल ने बताया कि संबंधित मामला अभी न्यायालय में विचाराधीन है। उन्होंने स्पष्ट किया कि केस का ट्रायल चल रहा है।
इसका मतलब है कि मामले में आरोपों और संबंधित साक्ष्यों पर न्यायिक प्रक्रिया जारी है। इसलिए सभी आरोपियों को दोषी मानना उचित नहीं होगा।
Mahadev Betting Case में दुर्ग के पुष्पक नगर से शुरू हुई पुलिस कार्रवाई ने कथित ऑनलाइन सट्टेबाजी नेटवर्क की कई महत्वपूर्ण कड़ियों को सामने लाने में भूमिका निभाई। लैपटॉप, मोबाइल, बैंक पासबुक और 61 बैंक कार्ड की जब्ती से शुरू हुई जांच आगे चलकर देशभर में फैले नेटवर्क और मनी लॉन्ड्रिंग की पड़ताल तक पहुंची। फिलहाल मामला अदालत में विचाराधीन है और आगे की न्यायिक प्रक्रिया पर सभी की नजर बनी हुई है।
