Narayanpur Religious Dispute ने छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले के भरंडा गांव में शुक्रवार को तनावपूर्ण माहौल पैदा कर दिया। पारंपरिक आदिवासी ग्रामीणों और ईसाई धर्म अपनाने वाले कुछ आदिवासी परिवारों के बीच विवाद इतना बढ़ गया कि पूरे गांव में भारी पुलिस बल तैनात करना पड़ा। करीब 12 घंटे तक चली लगातार बातचीत के बाद जिला प्रशासन ने दोनों पक्षों के बीच समझौता कराया, जिसके बाद 26 विस्थापित परिवार अपने घर वापस लौट सके।
👉 Join 4thNation WhatsApp Channel: https://whatsapp.com/channel/0029VaOjosfFHWq7ssCngl1j
Narayanpur Religious Dispute: आखिर विवाद की शुरुआत कैसे हुई?
जानकारी के अनुसार, भरंडा गांव में करीब 26 आदिवासी परिवार, जिन्होंने ईसाई धर्म अपनाया है, ने आरोप लगाया कि पारंपरिक आदिवासी ग्रामीणों ने उन्हें उनके घरों से बाहर निकाल दिया।
इन परिवारों का कहना है कि उन्हें दो विकल्प दिए गए—या तो वे अपना नया धर्म छोड़ दें या फिर हमेशा के लिए गांव छोड़ दें।
वहीं दूसरी ओर पारंपरिक आदिवासी समुदाय का आरोप है कि धर्म परिवर्तन करने वाले परिवार गांव की परंपराओं, रीति-रिवाजों और स्थानीय देवी-देवताओं का सम्मान नहीं करते। इसी कारण उन्होंने समुदाय के नियमों का पालन करने या गांव छोड़ने की मांग की।
12 घंटे तक चला प्रशासन का प्रयास
स्थिति लगातार बिगड़ती देख जिला प्रशासन और पुलिस ने तुरंत मोर्चा संभाल लिया। गांव में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया ताकि किसी भी तरह की हिंसा को रोका जा सके।
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ASP), एसडीएम और स्थानीय तहसीलदार मौके पर पहुंचे। दोनों पक्षों के साथ लगातार 14 दौर की बैठकें हुईं, जो लगभग 12 घंटे तक चलीं।
आखिरकार प्रशासन दोनों पक्षों के बीच अस्थायी सहमति बनाने में सफल रहा और सभी 26 परिवार सुरक्षित अपने घर लौट गए।
Narayanpur Religious Dispute में समझौते की प्रमुख शर्तें
बैठक के बाद पारंपरिक आदिवासी समुदाय की ओर से कुछ शर्तें सामने आईं।
- धर्म परिवर्तन करने वाले लोगों को एक महीने के भीतर अपनी मूल आदिवासी आस्था में लौटने का समय दिया गया।
- गांव की सीमा के भीतर मृतकों के दफन पर रोक लगाने का निर्णय लिया गया।
- संबंधित धार्मिक समुदाय के बाहरी लोगों के गांव में प्रवेश पर भी प्रतिबंध लगाने की बात कही गई।
हालांकि प्रशासन का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना उसकी प्राथमिक जिम्मेदारी है और पूरे मामले पर लगातार नजर रखी जा रही है।
यह भी पढ़ें: Hit and Run Case: छत्तीसगढ़ में तेज रफ्तार ट्रक ने 10 साल के बच्चे को कुचला, बैरिकेड्स तोड़कर भागा चालक
दोनों पक्षों के अपने-अपने दावे
धर्म परिवर्तन करने वाले परिवारों का आरोप है कि उन्हें सामाजिक रूप से बहिष्कृत करने और गांव से निकालने का प्रयास किया गया।
दूसरी ओर पारंपरिक आदिवासी ग्रामीणों का कहना है कि उनका उद्देश्य अपनी सांस्कृतिक पहचान, परंपराओं और सामाजिक व्यवस्था को बनाए रखना है।
प्रशासन ने फिलहाल किसी भी पक्ष के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की है और पूरे मामले पर सतर्क निगरानी रखी हुई है।
प्रशासन की निगरानी जारी
हालांकि फिलहाल गांव में स्थिति सामान्य बताई जा रही है, लेकिन प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि संवेदनशीलता को देखते हुए गांव पर लगातार नजर रखी जाएगी।
पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी समय-समय पर गांव का दौरा करेंगे ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार का तनाव या कानून-व्यवस्था की समस्या पैदा न हो।
Narayanpur Religious Dispute ने एक बार फिर संवेदनशील क्षेत्रों में सामाजिक और धार्मिक विवादों को शांतिपूर्ण संवाद से सुलझाने की आवश्यकता को रेखांकित किया है। प्रशासन की 12 घंटे लंबी बातचीत के बाद तत्काल तनाव तो कम हो गया और 26 परिवार अपने घर लौट सके, लेकिन गांव की स्थिति अभी भी संवेदनशील बनी हुई है। ऐसे मामलों में कानून का पालन, सामाजिक सौहार्द और सभी समुदायों के अधिकारों का सम्मान ही स्थायी समाधान का आधार हो सकता है।
