Guest Lecturer Appointment Delay के विरोध में छत्तीसगढ़ शासकीय महाविद्यालयीन अतिथि व्याख्याता पीएचडी-नेट कल्याण संघ ने बुधवार को मंत्रालय का घेराव किया। प्रदेशभर से पहुंचे अतिथि व्याख्याताओं ने नियुक्ति में देरी और सेवा से जुड़ी मांगों को लेकर कई घंटे तक प्रदर्शन किया।
प्रदर्शनकारियों का कहना था कि नया शैक्षणिक सत्र 1 जुलाई से शुरू हो चुका है। छात्र कॉलेज पहुंच रहे हैं, लेकिन पिछले सत्र में सेवाएं देने वाले कई अतिथि व्याख्याताओं को अब तक दोबारा नियुक्ति नहीं मिली है। इससे शिक्षकों की आय प्रभावित होने के साथ कई कॉलेजों में पढ़ाई पर भी असर पड़ रहा है।
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Guest Lecturer Appointment Delay की वजह क्या है?
संघ के प्रतिनिधि शिक्षा विभाग के अधिकारियों से मिलकर ज्ञापन सौंपना चाहते थे। हालांकि, काफी देर तक कोई अधिकारी प्रदर्शनकारियों से मिलने नहीं पहुंचा।
इसके बाद अतिथि व्याख्याताओं ने नायब तहसीलदार को अपना ज्ञापन सौंप दिया। संघ ने सरकार से नियुक्ति प्रक्रिया जल्द पूरी करने और सभी शासकीय कॉलेजों में एक समान व्यवस्था लागू करने की मांग की।
उच्च शिक्षा संचालनालय की ओर से बताया गया कि अतिथि व्याख्याताओं की नियुक्ति के आदेश जारी करने के लिए अभी वित्त विभाग की मंजूरी का इंतजार है।
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नए सत्र के डेढ़ महीने बाद भी नियुक्ति का इंतजार
अतिथि व्याख्याताओं के अनुसार, पिछले शैक्षणिक सत्र में काम करने वाले कई शिक्षकों का कार्यकाल 30 मई को समाप्त हो गया था। इसके बाद 1 जुलाई से नया शैक्षणिक सत्र शुरू हो गया, लेकिन नियुक्ति प्रक्रिया पूरी नहीं होने से वे अब तक काम शुरू नहीं कर पाए हैं।
इस स्थिति का सीधा असर उनकी आय पर पड़ रहा है। वहीं, कॉलेजों में शिक्षकों की कमी के कारण विद्यार्थियों की नियमित पढ़ाई भी प्रभावित होने की आशंका है।
संघ का कहना है कि हर साल नियुक्ति प्रक्रिया में देरी की स्थिति बनती है। इसलिए सरकार को ऐसी व्यवस्था बनानी चाहिए, जिससे नया सत्र शुरू होने से पहले ही अतिथि व्याख्याताओं की नियुक्ति पूरी हो सके।
17 जुलाई को नई नीति जारी, फिर भी आदेश का इंतजार
राज्य सरकार ने 17 जुलाई 2026 को अतिथि व्याख्याता नीति-2024 (संशोधित-2026) जारी की थी। संघ का कहना है कि नीति जारी होने के बावजूद पिछले सत्र में काम कर चुके अतिथि व्याख्याताओं को दोबारा नियुक्त करने के निर्देश अभी तक कॉलेजों को नहीं मिले हैं।
इसी वजह से Guest Lecturer Appointment Delay का मुद्दा लगातार गंभीर होता जा रहा है। संघ ने सरकार से नीति के अनुसार जल्द नियुक्ति आदेश जारी करने की मांग की है।
11 महीने की नियुक्ति, लेकिन देरी से मानदेय का नुकसान
अतिथि व्याख्याताओं का कहना है कि नीति में अधिकतम 11 महीने तक काम करने का प्रावधान है। लेकिन नियुक्ति प्रक्रिया देर से शुरू होने पर उनके वास्तविक कार्यकाल और मानदेय दोनों पर असर पड़ता है।
संघ के मुताबिक, यदि नियुक्ति में हर साल देरी होती रही तो 11 महीने की निर्धारित सेवा अवधि का पूरा लाभ अतिथि व्याख्याताओं को नहीं मिल पाएगा।
संगठन ने मांग की है कि सभी शासकीय कॉलेजों में नियुक्ति की प्रक्रिया एक तय तारीख से शुरू और पूरी की जाए, ताकि शिक्षकों और विद्यार्थियों दोनों को परेशानी न हो।
नई नीति में 400 रुपये अतिरिक्त भत्ता खत्म करने पर नाराजगी
अतिथि व्याख्याताओं ने संशोधित नीति में अतिरिक्त कार्य भत्ता समाप्त किए जाने पर भी आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि पहले चार घंटे कक्षा लेने के लिए 2,000 रुपये मिलते थे।
इसके अलावा तीन घंटे अतिरिक्त कॉलेज में रुकने पर 400 रुपये प्रतिदिन का अतिरिक्त कार्य भत्ता दिया जाता था। संघ के अनुसार नई व्यवस्था में यह 400 रुपये का अतिरिक्त भत्ता खत्म कर दिया गया है।
व्याख्याताओं का दावा है कि अब उन्हें सात घंटे तक कॉलेज में मौजूद रहना जरूरी होगा, लेकिन अतिरिक्त समय के लिए अलग भुगतान का प्रावधान नहीं रखा गया है। संघ ने इस व्यवस्था पर पुनर्विचार करने की मांग की है।
संघ की प्रमुख मांगें
अतिथि व्याख्याताओं ने सरकार के सामने कई प्रमुख मांगें रखी हैं। इनमें समय पर नियुक्ति आदेश जारी करना, पिछले सत्र में कार्यरत अतिथि व्याख्याताओं को दोबारा काम का अवसर देना और नियुक्ति प्रक्रिया को एक समान तारीख से पूरा करना शामिल है।
इसके अलावा संगठन ने नई नीति में समाप्त किए गए 400 रुपये अतिरिक्त कार्य भत्ते को फिर से लागू करने की मांग भी उठाई है।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि समय पर शिक्षक उपलब्ध नहीं होने का असर सीधे विद्यार्थियों की पढ़ाई पर पड़ता है। इसलिए नियुक्ति में देरी का समाधान केवल अतिथि व्याख्याताओं के हित में नहीं, बल्कि उच्च शिक्षा की गुणवत्ता के लिए भी जरूरी है।
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Guest Lecturer Appointment Delay ने छत्तीसगढ़ के सरकारी कॉलेजों में नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर बड़ा सवाल खड़ा किया है। एक तरफ अतिथि व्याख्याता नियुक्ति और मानदेय के इंतजार में हैं, वहीं दूसरी तरफ नए शैक्षणिक सत्र में विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित होने की चिंता है। अब निगाहें वित्त विभाग की मंजूरी और उच्च शिक्षा विभाग के नियुक्ति आदेश पर टिकी हैं। सरकार द्वारा जल्द निर्णय लेने से शिक्षकों और विद्यार्थियों दोनों की परेशानी दूर हो सकती है।
