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Narayanpur Administration Initiates: 3 महीने का राशन पहले — अबूझमाड़ के लिए शानदार कदम!

छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले में Narayanpur administration initiates मानसून से पहले एक ऐतिहासिक और सराहनीय कदम उठाया है। अबूझमाड़ की दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों और मानसून की चुनौतियों को देखते हुए जिला प्रशासन ने सभी ग्राम पंचायतों और PDS दुकानों में तीन महीने के खाद्यान्न का अग्रिम भंडारण शुरू किया है।

इस पहल का मकसद है कि बारिश के मौसम में जब रास्ते बंद हो जाते हैं, तब भी दूरस्थ गांवों के लोगों को राशन के लिए भटकना न पड़े। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की दूरदर्शिता और संवेदनशील नेतृत्व इस पहल की मूल प्रेरणा है।

3 महीने का स्टॉक, 14+ विशेष PDS दुकानें, 18 गांव — 1 दुकान से, 100% राशन गांव तक

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अबूझमाड़ की भौगोलिक चुनौती — मानसून में कट जाते हैं रास्ते

नक्सलवाद के उन्मूलन के बाद भी अबूझमाड़ की भौगोलिक स्थिति प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। मानसून के दौरान नदियों और नालों में बाढ़ आने से कई गांवों के रास्ते पूरी तरह अवरुद्ध हो जाते हैं।

इस दौरान न केवल खाद्यान्न की आपूर्ति बाधित होती है, बल्कि लोगों का आवागमन भी रुक जाता है। पहाड़ी और वन क्षेत्र होने के कारण ये गांव महीनों तक बाकी दुनिया से कट जाते थे।

🌧️ मानसून चुनौती: अबूझमाड़ के दर्जनों गांव बारिश में हफ्तों तक सड़क संपर्क से कट जाते हैं — खाद्यान्न पहुंचाना असंभव हो जाता था।

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Narayanpur Administration Initiates — 3 माह के राशन की अग्रिम व्यवस्था

सभी ग्राम पंचायतों और PDS केंद्रों में पहुंचा स्टॉक

जिला प्रशासन ने इस समस्या का स्थायी समाधान निकालते हुए Narayanpur administration initiates के तहत सभी ग्राम पंचायतों और PDS दुकानों में 3 महीने का खाद्यान्न मानसून से पहले ही पहुंचा दिया है।

विशेष रूप से उन 14 से अधिक PDS दुकानों में अतिरिक्त भंडारण की व्यवस्था की गई है जो बारिश के मौसम में सबसे अधिक संपर्क-विहीन हो जाती हैं। इन दुकानों से जुड़े गांवों के परिवारों को अब राशन के लिए कहीं नहीं जाना होगा।

प्रत्येक माह प्रति परिवार — दो पैकेट चना, दो पैकेट नमक, दो पैकेट गुड़ और एक किलो चीनी — तीन महीने के लिए अग्रिम उपलब्ध कराई जा रही है।

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14 PDS दुकानों में विशेष भंडारण — कलेक्टर नम्रता जैन का बयान

Narayanpur Administration Initiates — सरकार की नीति और कलेक्टर की जिम्मेदारी

“छत्तीसगढ़ सरकार और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की यह सोच है कि दूरस्थ और संवेदनशील क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को बुनियादी सुविधाएं उनके अपने गांव में ही मिलनी चाहिए। इसी उद्देश्य से मानसून से पहले अग्रिम भंडारण किया जा रहा है ताकि किसी भी परिवार को राशन के लिए लंबी दूरी तय न करनी पड़े।”

— नम्रता जैन, कलेक्टर नारायणपुर

कलेक्टर ने यह भी बताया कि प्रशासन ने इस क्षेत्र में 14 नई PDS दुकानों को मंजूरी दी है। इन दुकानों के भवनों का निर्माण जारी है। तब तक वैकल्पिक व्यवस्था के जरिए राशन ग्रामीणों तक पहुंचाया जा रहा है।

उन्होंने कहा — “जहां कभी ग्रामीण जंगलों और पहाड़ों में दिनों की यात्रा करके राशन लेने जाते थे, आज खाद्यान्न उनके गांव तक पहुंच रहा है। यह अग्रिम भंडारण महज खाद्यान्न वितरण नहीं, बल्कि सरकार और ग्रामीणों के बीच बढ़ते विश्वास की कहानी है।”

नक्सलवाद के बाद पहली बार — ग्रामीणों को मिल रहा पूरा राशन

स्थानीय PDS दुकानदार गजेंद्र सिंह नाग ने बताया कि उनकी दुकान से 18 गांवों के कार्डधारकों को राशन मिलता है। बारिश में नदियों, नालों और पहाड़ी रास्तों की वजह से ये गांव पूरी तरह अगम्य हो जाते थे।

इस बार तीन महीने का स्टॉक पहले से उपलब्ध है, इसलिए ग्रामीणों को समय पर राशन मिल सकेगा।

✊ बड़ा बदलाव: नक्सलवाद के दौर में आधा राशन नक्सली ले जाते थे — अब सरकार ने नक्सलवाद खत्म कर पूरा राशन परिवार तक पहुंचाया।
— कुटुल गांव निवासी, रामबती

Narayanpur Administration Initiates — ग्रामीणों की खुशी और राहत

पदमकोट निवासी रमेश ने बताया — “पहले पूरे परिवार को राशन लाने के लिए दो से तीन दिन अलग रखने पड़ते थे और कई किलोमीटर पैदल चलना पड़ता था। अब गांव के पास ही राशन उपलब्ध होने से समय और मेहनत दोनों की बचत हो रही है।”

कुटुल गांव की रामबती ने कहा — “बारिश में राशन सबसे बड़ी चिंता होती थी। रास्ते बंद होने से अनाज समय पर नहीं मिलता था। इस बार राशन पहले से आ जाने से पूरे परिवार को राहत मिली है।”

रामबती ने यह भी जोड़ा कि नक्सलवाद के समय लोग उनका आधा राशन उठा ले जाते थे। अब सरकार ने नक्सलवाद का सफाया कर दिया है और पूरा राशन मिल रहा है जो पूरे परिवार के लिए पर्याप्त है।

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अबूझमाड़ की दुर्गम पहाड़ियों तक खाद्यान्न पहुंचाने की यह मुहिम साबित करती है कि जब Narayanpur administration initiates जैसे संवेदनशील और सक्रिय कदम उठाए जाते हैं, तो विकास का रास्ता हर गांव तक पहुंचता है। तीन महीने के अग्रिम भंडारण की यह योजना न केवल मानसून की चुनौती का जवाब है, बल्कि यह उस शासन व्यवस्था की मिसाल है जो अंतिम व्यक्ति तक पहुंचने की प्रतिबद्धता रखती है। Narayanpur administration initiates जैसी पहलों से ही छत्तीसगढ़ के सुदूर इलाकों में सरकार और जनता के बीच विश्वास का नया अध्याय लिखा जा रहा है।

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