Kulgam Terror Attack ने एक बार फिर जम्मू-कश्मीर में प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शुक्रवार देर रात दक्षिण कश्मीर के कुलगाम जिले के केलम (Kelam) इलाके में आतंकियों ने ईंट-भट्ठे पर काम कर रहे दो प्रवासी मजदूरों पर अंधाधुंध फायरिंग कर दी। इस हमले में दोनों मजदूरों की मौत हो गई। दोनों मृतक छत्तीसगढ़ के रहने वाले थे और रोजगार की तलाश में कश्मीर पहुंचे थे।
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Kulgam Terror Attack में क्या हुआ?
अधिकारियों के अनुसार, शुक्रवार देर रात आतंकियों ने कुलगाम जिले के केलम क्षेत्र स्थित एक ईंट-भट्ठे पर काम कर रहे दो मजदूरों को निशाना बनाया।
गोलीबारी में दोनों गंभीर रूप से घायल हो गए। इनमें से दीपक रात्रे (Deepak Ratray) की अस्पताल ले जाने से पहले ही मौत हो गई।
दूसरे घायल मजदूर बोपिंदर (Bopinder) को पहले सरकारी मेडिकल कॉलेज (GMC) अनंतनाग में भर्ती कराया गया। बाद में बेहतर इलाज के लिए श्रीनगर के एसकेआईएमएस (SKIMS) सौरा रेफर किया गया, जहां शनिवार को इलाज के दौरान उन्होंने भी दम तोड़ दिया।
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दोनों मृतक छत्तीसगढ़ के रहने वाले थे
अधिकारियों के मुताबिक दोनों मजदूरों की उम्र लगभग 20 वर्ष के आसपास थी। वे रोजगार की तलाश में छत्तीसगढ़ से जम्मू-कश्मीर आए थे और कुलगाम के एक ईंट-भट्ठे पर कार्यरत थे।
इस घटना के बाद छत्तीसगढ़ समेत पूरे देश में शोक और आक्रोश का माहौल है। प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है।
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Kulgam Terror Attack के बाद सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
यह हमला ऐसे समय हुआ है जब हाल ही में घाटी में आतंकी गतिविधियों को लेकर सुरक्षा एजेंसियां सतर्क थीं।
22 जुलाई को अनंतनाग के लाल चौक में अमरनाथ यात्रा ड्यूटी पर तैनात जम्मू-कश्मीर पुलिस के हेड कांस्टेबल आशिक हुसैन कुरैशी की आतंकियों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी।
वह हमला 22 अप्रैल 2025 के पहलगाम आतंकी हमले के बाद घाटी में पहली बड़ी आतंकी घटना माना गया था। पहलगाम हमले में 26 लोगों की जान गई थी।
अब Kulgam Terror Attack ने एक बार फिर सुरक्षा एजेंसियों के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है।
उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने दिए सख्त निर्देश
जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने इस आतंकी हमले की कड़ी निंदा की है।
उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि यह कायरतापूर्ण हमला है और सुरक्षा बलों को आतंकियों के खिलाफ अभियान तेज करने के निर्देश दिए गए हैं।
उन्होंने बताया कि उन्होंने पुलिस महानिदेशक नलिन प्रभात सहित वरिष्ठ अधिकारियों से बात कर स्थिति की समीक्षा की है और आतंकियों के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई करने को कहा है।
महबूबा मुफ्ती ने भी की निंदा
पीडीपी अध्यक्ष और जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने भी इस हमले की निंदा करते हुए मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की।
उन्होंने कहा कि निर्दोष नागरिकों की हत्या किसी भी परिस्थिति में स्वीकार नहीं की जा सकती और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।
पहले भी निशाने पर रहे हैं प्रवासी मजदूर
घाटी में प्रवासी मजदूरों पर हमले की घटनाएं पहले भी सामने आ चुकी हैं।
- फरवरी 2024 में श्रीनगर में पंजाब के अमृतपाल सिंह और रोहित मसीह की आतंकियों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी।
- अक्टूबर 2021 में कुलगाम के वानपोह क्षेत्र में बिहार के राजा ऋषि देव और जोगिंदर ऋषि देव की भी आतंकियों ने हत्या कर दी थी।
इन घटनाओं से साफ है कि प्रवासी मजदूर लगातार आतंकियों के निशाने पर रहे हैं।
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Kulgam Terror Attack केवल दो मजदूरों की हत्या का मामला नहीं है, बल्कि यह जम्मू-कश्मीर में काम करने वाले हजारों प्रवासी श्रमिकों की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मुद्दा भी है। छत्तीसगढ़ के दो युवाओं की मौत ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि घाटी में गैर-स्थानीय मजदूरों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाएगी। सुरक्षा एजेंसियों ने आतंकियों के खिलाफ अभियान तेज करने का भरोसा दिया है, लेकिन भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकना सबसे बड़ी चुनौती होगी।
