IGKV Paper Leak मामले में इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय (IGKV), रायपुर की परीक्षा व्यवस्था पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। बीएससी कृषि प्रथम वर्ष के Fundamentals of Genetics विषय का प्रश्नपत्र परीक्षा से कई घंटे पहले छात्रों तक पहुंचने के आरोप के बाद विश्वविद्यालय ने परीक्षा रद्द कर दी है। मामले की जांच के लिए विश्वविद्यालय ने समिति बनाई है और पुलिस को भी जांच के लिए शिकायत दी गई है।
यह IGKV में हाल के दिनों में प्रश्नपत्र से जुड़ा तीसरा विवाद है। इससे पहले Entomology और Plant Pathology के प्रश्नपत्रों को लेकर भी परीक्षा व्यवस्था पर सवाल उठे थे। ऐसे में लगातार सामने आ रहे मामलों ने छात्रों और विश्वविद्यालय प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है।
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IGKV Paper Leak में Genetics परीक्षा क्यों हुई रद्द?
Fundamentals of Genetics की परीक्षा 19 अगस्त 2026 को आयोजित की गई थी। परीक्षा का समय सुबह 10 बजे से दोपहर 1 बजे तक निर्धारित था। रिपोर्टों के मुताबिक, परीक्षा से लगभग पांच से छह घंटे पहले प्रश्नपत्र की PDF सोशल मीडिया और WhatsApp के माध्यम से प्रसारित होने की जानकारी सामने आई।
विश्वविद्यालय को जब परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र के प्रसारित होने की जानकारी मिली, तो मामले को गंभीरता से लिया गया। बाद में वायरल सामग्री और परीक्षा में पूछे गए सवालों के बीच समानता की जांच की गई।
कुछ रिपोर्टों में वायरल प्रश्नपत्र और वास्तविक परीक्षा के प्रश्नों के 100 प्रतिशत मिलान का दावा किया गया है। हालांकि, इस मामले में अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।
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IGKV Paper Leak की जांच में लिफाफे से मिले अहम संकेत
मामले की जांच के लिए विश्वविद्यालय ने पांच सदस्यीय समिति गठित की। समिति ने दुर्ग स्थित भारती कृषि महाविद्यालय को भेजे गए प्रश्नपत्र के लिफाफे की जांच की।
जांच के दौरान लिफाफे पर छेड़छाड़ के निशान मिलने की बात सामने आई है। विश्वविद्यालय के अनुसार, छेड़छाड़ का तरीका पहले सामने आए प्रश्नपत्र लीक मामले से मिलता-जुलता बताया गया है।
यह बिंदु जांच के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि प्रश्नपत्र की सुरक्षा व्यवस्था में किसी स्तर पर सेंध लगने की आशंका इससे मजबूत होती है।
भारती कृषि कॉलेज को 10 दिन का नोटिस
प्रश्नपत्र के लिफाफे में कथित छेड़छाड़ सामने आने के बाद विश्वविद्यालय प्रबंधन ने भारती कृषि कॉलेज को नोटिस जारी किया है।
कॉलेज से 10 दिन के भीतर जवाब मांगा गया है। विश्वविद्यालय ने संकेत दिया है कि यदि कॉलेज की ओर से संतोषजनक जवाब नहीं मिलता है, तो उसे डिफॉल्टर घोषित करने की कार्रवाई की जा सकती है।
फिलहाल यह कार्रवाई जांच के निष्कर्ष और कॉलेज की ओर से दिए जाने वाले जवाब पर निर्भर करेगी। इसलिए किसी व्यक्ति या संस्था की जिम्मेदारी को अंतिम रूप से तय करना जांच पूरी होने के बाद ही उचित होगा।
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योगेश सोनकेसरिया की भूमिका पर भी जांच
मामले की जांच में सहायक प्राध्यापक योगेश सोनकेसरिया की भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, उनका नाम पहले सामने आए प्रश्नपत्र लीक मामले में भी जांच के दायरे में आया था।
पुलिस ने इससे पहले IGKV से जुड़े पेपर लीक मामले में कई आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की थी। हालांकि, मौजूदा Genetics पेपर प्रकरण में किसी व्यक्ति की अंतिम जिम्मेदारी जांच और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर ही तय होगी।
पहले भी दो परीक्षाओं पर उठे थे सवाल
IGKV में प्रश्नपत्र लीक का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले BSc Agriculture द्वितीय वर्ष की Entomology परीक्षा का प्रश्नपत्र परीक्षा से पहले सोशल मीडिया पर प्रसारित होने की जानकारी सामने आई थी। इसके बाद विश्वविद्यालय ने परीक्षा रद्द कर दी थी।
इसके बाद Plant Pathology के प्रश्नपत्र को लेकर भी लीक की शिकायत सामने आई। लगातार सामने आए मामलों के कारण विश्वविद्यालय की परीक्षा प्रणाली और प्रश्नपत्रों की गोपनीयता को लेकर गंभीर सवाल उठे।
पहले मामले में पुलिस जांच के दौरान कई लोगों की गिरफ्तारी की खबर भी सामने आई थी।
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छात्रों की चिंता भी बढ़ी
प्रश्नपत्र लीक के कारण सबसे ज्यादा असर उन विद्यार्थियों पर पड़ता है, जिन्होंने पूरी तैयारी और मेहनत के बाद निर्धारित समय पर परीक्षा दी होती है।
यदि किसी परीक्षा को रद्द कर दोबारा आयोजित किया जाता है, तो छात्रों को फिर से तैयारी करनी पड़ती है। इससे उनकी पढ़ाई, अगले पेपर की तैयारी और परीक्षा परिणाम की पूरी समय-सारणी प्रभावित हो सकती है।
यही वजह है कि विश्वविद्यालय के सामने अब दोहरी चुनौती है। एक तरफ मामले की निष्पक्ष जांच करना जरूरी है, वहीं दूसरी ओर भविष्य की परीक्षाओं में प्रश्नपत्र की गोपनीयता और सुरक्षा को मजबूत करना भी जरूरी होगा।
IGKV Paper Leak पर आगे क्या होगा?
अब जांच समिति और पुलिस की रिपोर्ट पर सभी की नजर रहेगी। जांच में यह पता लगाया जाएगा कि प्रश्नपत्र सुरक्षित स्थान से बाहर कैसे पहुंचा और इसे WhatsApp या अन्य माध्यमों से छात्रों तक किसने पहुंचाया।
साथ ही, भारती कृषि कॉलेज से मिले जवाब और प्रश्नपत्र के लिफाफे में मिले कथित छेड़छाड़ के साक्ष्यों की भी जांच की जाएगी।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने पहले IGKV से जुड़े प्रश्नपत्र प्रसारण मामले को गंभीरता से लेते हुए दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही थी। मुख्यमंत्री के निर्देश पर पांच सदस्यीय जांच समिति और पुलिस शिकायत की कार्रवाई भी की गई थी।
परीक्षा व्यवस्था की गोपनीयता पर बड़ा सवाल
एक ही विश्वविद्यालय की परीक्षाओं से जुड़े लगातार मामले सामने आने के बाद प्रश्नपत्र तैयार करने से लेकर प्रिंटिंग, पैकिंग, परिवहन और परीक्षा केंद्र तक पहुंचाने की पूरी प्रक्रिया की समीक्षा जरूरी हो गई है।
विशेष रूप से प्रश्नपत्र के सीलबंद लिफाफे की सुरक्षा अहम है। यदि जांच में लिफाफे से छेड़छाड़ की बात प्रमाणित होती है, तो यह पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि सुरक्षा व्यवस्था में किस स्तर पर कमी हुई।
विश्वविद्यालय के लिए यह मामला केवल एक परीक्षा रद्द करने तक सीमित नहीं है। छात्रों का भरोसा बनाए रखने और परीक्षा की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए दोषियों की पहचान तथा भविष्य में ऐसी घटनाएं रोकने के ठोस उपाय जरूरी होंगे।
IGKV Paper Leak मामले में Fundamentals of Genetics की परीक्षा रद्द होने के बाद विश्वविद्यालय की परीक्षा व्यवस्था पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। परीक्षा से कई घंटे पहले प्रश्नपत्र के प्रसारित होने की जानकारी, भारती कृषि कॉलेज भेजे गए लिफाफे में कथित छेड़छाड़ और पहले सामने आए मामलों से समानता जांच का अहम हिस्सा है। फिलहाल जांच जारी है और किसी व्यक्ति की अंतिम जिम्मेदारी तय होना बाकी है। अब छात्रों और अभिभावकों की नजर जांच के निष्कर्ष, कॉलेज के जवाब और विश्वविद्यालय की आगे की कार्रवाई पर है।
