Skip to main content

4thnation

GPM Irrigation में 25 साल का बड़ा बदलाव

GPM Irrigation यानी गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले की सिंचाई व्यवस्था में पिछले 25 वर्षों के दौरान बड़ा विस्तार दर्ज किया गया है। उपलब्ध विभागीय जानकारी के अनुसार, राज्य गठन के समय जिले में 4,458 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई की क्षमता थी, जो वर्ष 2026 में बढ़कर 25,936 हेक्टेयर हो गई है।

इस तरह 25 वर्षों में सिंचाई क्षमता में 21,478 हेक्टेयर की वृद्धि हुई है। यह आंकड़ा शुरुआती क्षमता के मुकाबले करीब 5.8 गुना है। जल संसाधन विभाग के रिकॉर्ड में जीपीएम जिले में लगातार सिंचाई योजनाओं, नहरों, एनीकट और सूक्ष्म सिंचाई परियोजनाओं से जुड़े कार्य दर्ज हैं।

देश-दुनिया और अपराध जगत की ताजा खबरों के लिए 4thnation WhatsApp Channel से जुड़ें

राज्य गठन के समय सीमित थी सिंचाई सुविधा

1 नवंबर 2000 से पहले जिले में कुल 28 जल संसाधन परियोजनाएं निर्मित थीं। इनमें 17 जलाशय, 4 व्यपवर्तन योजनाएं, 2 स्टॉप डेम और 5 एनीकट शामिल थे।

इन परियोजनाओं से 4,458 हेक्टेयर क्षेत्र में ही सिंचाई संभव थी। सीमित सिंचाई संसाधनों के कारण कृषि गतिविधियां काफी हद तक मानसूनी वर्षा पर निर्भर थीं।

GPM Irrigation के लिए 57 नई परियोजनाएं

राज्य गठन के बाद जल संसाधन विभाग की ओर से जिले में सिंचाई अधोसंरचना के विस्तार पर लगातार काम किया गया। दिए गए विभागीय विवरण के अनुसार, पिछले 25 वर्षों में 57 नई जल संसाधन परियोजनाओं का निर्माण पूरा हुआ।

पुरानी 28 परियोजनाओं को मिलाकर जिले में कुल 85 जल संसाधन योजनाओं का आधार तैयार हुआ। नहरों के जीर्णोद्धार और विस्तार के साथ दूर-दराज के खेतों तक पानी पहुंचाने के प्रयास किए गए।

जल संसाधन विभाग के मौजूदा रिकॉर्ड में भी जीपीएम में माइक्रो इरिगेशन, एनीकट, जलाशयों और नहरों के निर्माण व जीर्णोद्धार से संबंधित कई स्वीकृतियां दर्ज हैं।

GPM Irrigation क्षमता 25,936 हेक्टेयर पहुंची

जीपीएम जिले में सिंचाई विस्तार का सबसे प्रमुख परिणाम सिंचाई क्षमता में हुई वृद्धि के रूप में सामने आया है। वर्ष 2000 के आसपास 4,458 हेक्टेयर की क्षमता अब 25,936 हेक्टेयर तक पहुंचने की जानकारी दी गई है।

इस हिसाब से सिंचाई क्षमता में 21,478 हेक्टेयर का इजाफा हुआ है। इससे जिले के अधिक कृषि क्षेत्र को सिंचाई सुविधा के दायरे में लाने का आधार तैयार हुआ है।

सिंचाई सुविधाओं के विस्तार के साथ माइक्रो एवं लिफ्ट इरिगेशन को बढ़ावा देने, सोलर पंप तथा डिजिटल तकनीक के इस्तेमाल से जल वितरण की निगरानी जैसे प्रयासों का भी उल्लेख किया गया है।

यह भी पढ़ें: Chhattisgarh AI Mission से बदलेगा तकनीक का भविष्य

कृषि को मिला सिंचाई विस्तार का लाभ

सिंचाई सुविधा बढ़ने से जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि गतिविधियों के विस्तार का अवसर मिला है। खेतों में पानी की उपलब्धता बढ़ने से किसानों के लिए कृषि कार्यों को अधिक व्यवस्थित तरीके से करने और बहुफसलीय खेती की दिशा में आगे बढ़ने की संभावनाएं बढ़ी हैं।

जल संरचनाओं में ग्राम देवरगांव का मलनिया जलाशय, ग्राम आंदुल का जोगीडोंगरी जलाशय और ग्राम बनझोरका का एनीकट प्रमुख संरचनाओं में बताए गए हैं।

आधुनिक तकनीक से जल प्रबंधन

GPM Irrigation के विस्तार के साथ जल के बेहतर उपयोग और संरक्षण पर भी जोर दिया जा रहा है। माइक्रो इरिगेशन, लिफ्ट इरिगेशन और सोलर पंप जैसी तकनीकों के इस्तेमाल से सीमित जल संसाधनों का अधिक प्रभावी उपयोग करने का प्रयास किया जा रहा है।

इसके अलावा नदियों के संरक्षण, एनीकट निर्माण और भू-जल संवर्धन से जुड़े कार्यों को भी जल प्रबंधन के व्यापक प्रयासों का हिस्सा बनाया गया है।

छत्तीसगढ़ जल संसाधन विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर जीपीएम जिले में विभिन्न जलाशयों, एनीकट और सिंचाई योजनाओं से संबंधित प्रशासनिक स्वीकृतियां लगातार प्रकाशित की जाती हैं। उदाहरण के लिए, विभाग ने 2026 में मरवाही क्षेत्र में गगनई जलाशय के शीर्ष कार्य, माइनर नहर में चैनल निर्माण और सीसी लाइनिंग से जुड़ी स्वीकृति दर्ज की है।

नई योजनाओं से और बढ़ेगी सिंचाई क्षमता

जिले में कुछ नई सिंचाई योजनाओं पर काम जारी होने की जानकारी दी गई है। इनके पूरा होने के बाद सिंचाई क्षमता में और विस्तार होने की उम्मीद है।

विभागीय रिकॉर्ड में जीपीएम की कई परियोजनाओं के लिए नहर लाइनिंग, जलाशय सुधार, माइक्रो इरिगेशन और एनीकट से जुड़े कार्यों की स्वीकृतियां मौजूद हैं।

सिंचाई अधोसंरचना के विस्तार से खेतों तक पानी की उपलब्धता बढ़ाने के साथ जल संरक्षण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का आधार तैयार होता है।

देश-दुनिया और अपराध जगत की ताजा खबरों के लिए 4thnation WhatsApp Channel से जुड़ें

GPM Irrigation की 25 वर्षों की यात्रा में 4,458 हेक्टेयर से बढ़कर 25,936 हेक्टेयर तक पहुंची सिंचाई क्षमता एक बड़ा अधोसंरचनात्मक बदलाव दर्शाती है। 57 नई परियोजनाओं, नहरों के विस्तार, एनीकट, माइक्रो इरिगेशन और आधुनिक जल प्रबंधन तकनीकों के जरिए जिले में सिंचाई का दायरा बढ़ा है। आगे निर्माणाधीन योजनाओं के पूरा होने से जीपीएम में कृषि और जल प्रबंधन के लिए उपलब्ध आधारभूत ढांचे का और विस्तार हो सकता है।

One thought on “GPM Irrigation में 25 साल का बड़ा बदलाव

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *