Fake Compensation Claims: फर्जी दावा याचिकाओं पर हाईकोर्ट सख्त, पूरे छत्तीसगढ़ में निगरानी के निर्देश

Fake Compensation Claims को लेकर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने गंभीर चिंता व्यक्त की है। अदालत ने राज्यभर में कथित फर्जी मुआवजा दावा याचिकाओं के बढ़ते मामलों को न्याय व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा बताते हुए सभी संबंधित अधिकारियों और न्यायिक संस्थानों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं।

मुख्य न्यायाधीश श्री रमेश सिन्हा की पीठ ने एक मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि यदि वकील इस प्रकार की अनैतिक और अवैध गतिविधियों में शामिल पाए जाते हैं, तो इससे न केवल उनकी व्यक्तिगत प्रतिष्ठा बल्कि पूरे न्यायिक तंत्र की विश्वसनीयता प्रभावित होती है।

Fake Compensation Claims पर हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी

14 मई 2026 को सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि न्यायिक प्रक्रिया सत्य, निष्पक्षता और न्याय के सिद्धांतों पर आधारित होती है।

अदालत ने स्पष्ट किया कि Fake Compensation Claims दाखिल करना न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग है और इससे आम जनता का न्याय व्यवस्था पर विश्वास कमजोर पड़ सकता है।

मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि कानूनी पेशे की गरिमा बनाए रखना प्रत्येक अधिवक्ता की जिम्मेदारी है।

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न्याय व्यवस्था की साख पर असर

अदालत ने टिप्पणी की कि फर्जी मामलों के कारण न्यायिक संस्थानों की विश्वसनीयता प्रभावित होती है।

यदि ऐसे मामलों पर समय रहते कार्रवाई नहीं की गई तो यह न्याय वितरण प्रणाली के लिए गंभीर चुनौती बन सकते हैं।

राज्यभर में सामने आ रहा चिंताजनक पैटर्न

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने दावा किया कि Fake Compensation Claims के कई मामले छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों में सामने आए हैं।

हाईकोर्ट ने इस दावे को गंभीरता से लेते हुए कहा कि यदि यह तथ्य सही हैं तो यह पूरे राज्य के लिए चिंता का विषय है।

अदालत ने माना कि यह केवल एक अलग-थलग घटना नहीं बल्कि व्यापक स्तर पर उभरती हुई प्रवृत्ति हो सकती है।

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वकीलों पर लगे गंभीर आरोप

यह मामला दो युवा अधिवक्ताओं वैभव सिंह और शुभम चंद्रवंशी द्वारा दायर अग्रिम जमानत याचिकाओं से जुड़ा है।

हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार दोनों अधिवक्ता वरिष्ठ अधिवक्ता एन.पी. चंद्रवंशी के मार्गदर्शन में कार्य कर रहे थे। इस मामले में भगवती कश्यप का नाम भी FIR में शामिल है।

ट्रायल कोर्ट के निर्देश पर दर्ज हुई FIR

जांच के बाद सक्षम न्यायालय ने कथित फर्जी दावा याचिका दायर किए जाने के आरोप में आपराधिक कार्रवाई शुरू करने के निर्देश दिए थे।

इसके बाद संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ FIR दर्ज की गई।

Fake Compensation Claims मामले में बिलासपुर SSP को जिम्मेदारी

मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने बिलासपुर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) को जांच की व्यक्तिगत निगरानी करने का निर्देश दिया है।

अदालत ने कहा कि जांच निष्पक्ष, प्रभावी और समयबद्ध तरीके से पूरी की जानी चाहिए।

प्रगति रिपोर्ट पेश करने के निर्देश

हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि अगली सुनवाई से पहले जांच की स्थिति और प्रगति रिपोर्ट सक्षम न्यायालय तथा हाईकोर्ट के समक्ष प्रस्तुत की जाए।

यह निर्देश न्यायिक प्रक्रिया के दुरुपयोग से जुड़े मामलों की गंभीरता को दर्शाता है।

सुप्रीम कोर्ट भी कर रहा है निगरानी

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में उल्लेख किया कि Fake Compensation Claims का मुद्दा केवल छत्तीसगढ़ तक सीमित नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट भी इस प्रकार के मामलों पर सुनवाई कर रहा है। अदालत ने Safiq Ahmad vs ICICI Lombard General Insurance Company Ltd मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि शीर्ष अदालत ने मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण और श्रमिक मुआवजा मामलों में फर्जी दावों को लेकर चिंता व्यक्त की है।

राष्ट्रीय स्तर का बनता मुद्दा

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में राज्यों, भारतीय बार काउंसिल और विभिन्न राज्य बार काउंसिलों से जवाब मांगा है।

इससे स्पष्ट है कि Fake Compensation Claims अब राष्ट्रीय स्तर पर न्यायिक संस्थानों के लिए चुनौती बनते जा रहे हैं।

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जिला न्यायाधीशों को विशेष निर्देश

हाईकोर्ट ने राज्य के सभी प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीशों को निर्देश दिया है कि उनके संज्ञान में आने वाले किसी भी फर्जी दावा मामले की तत्काल सूचना दी जाए।

यह जानकारी हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को भेजी जाएगी, जो इसे आगे सुप्रीम कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत करेंगे।

राज्यव्यापी निगरानी तंत्र स्थापित

इस कदम को फर्जी दावों पर नियंत्रण के लिए एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

इससे ऐसे मामलों की पहचान और निगरानी अधिक प्रभावी ढंग से हो सकेगी।

जूनियर अधिवक्ताओं को अंतरिम राहत

हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि वर्तमान मामले में जूनियर अधिवक्ताओं की स्थिति वरिष्ठ अधिवक्ता से अलग है।

अदालत ने रिकॉर्ड में दर्ज किया कि विवादित दावा याचिका के समर्थन में दिए गए शपथपत्र पर वरिष्ठ अधिवक्ता एन.पी. चंद्रवंशी और भगवती कश्यप के हस्ताक्षर बताए गए हैं।

9 जुलाई को अगली सुनवाई

परिस्थितियों को देखते हुए अदालत ने दोनों आवेदकों को पहले से प्राप्त अंतरिम संरक्षण जारी रखा।

साथ ही उन्हें व्यक्तिगत उपस्थिति से भी छूट प्रदान की गई। मामले की अगली सुनवाई 9 जुलाई 2026 को निर्धारित की गई है।

Fake Compensation Claims को लेकर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी और राज्यव्यापी निगरानी के निर्देश न्याय व्यवस्था की पारदर्शिता बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि फर्जी दावा याचिकाओं के माध्यम से न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा। Fake Compensation Claims पर बढ़ती चिंता अब केवल छत्तीसगढ़ ही नहीं बल्कि पूरे देश के न्यायिक तंत्र के लिए गंभीर विषय बन चुकी है, जिस पर उच्चतम न्यायालय भी नजर बनाए हुए है।

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