El-Nino के संभावित प्रभाव को देखते हुए कृषि विभाग ने किसानों को मौसम आधारित फसल प्रबंधन अपनाने की सलाह दी है। विभाग का अनुमान है कि इस वर्ष प्रदेश में सामान्य से कम वर्षा हो सकती है, जिससे पारंपरिक खेती प्रभावित होने की संभावना है।
ऐसी स्थिति में किसानों को फसल चयन और खेती की रणनीति में बदलाव करने की आवश्यकता होगी। कृषि विभाग का मानना है कि समय रहते सही निर्णय लेकर किसान उत्पादन जोखिम को कम कर सकते हैं।
El-Nino के कारण कम वर्षा की संभावना
कृषि विभाग के अनुसार El-Nino की स्थिति बनने पर मानसून प्रभावित हो सकता है, जिससे कई क्षेत्रों में सामान्य से कम बारिश दर्ज होने की आशंका रहती है।
विशेष रूप से अपलैंड और कम जलधारण क्षमता वाली भूमि में धान की खेती जोखिमपूर्ण हो सकती है। ऐसे क्षेत्रों में किसानों को वैकल्पिक फसलों की ओर ध्यान देने की सलाह दी गई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि जल संकट की स्थिति में कम पानी की आवश्यकता वाली फसलें किसानों के लिए अधिक लाभदायक साबित हो सकती हैं।
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El-Nino के दौरान कौन-सी फसलें रहेंगी बेहतर विकल्प?
कृषि विभाग ने किसानों को अरहर, मूंग, उड़द, कुल्थी, मूंगफली, तिल, रामतिल, कोदो, कुटकी और रागी जैसी फसलों की खेती को प्राथमिकता देने की सलाह दी है।
ये फसलें अपेक्षाकृत कम पानी में भी अच्छी पैदावार देती हैं और प्रतिकूल मौसम परिस्थितियों में नुकसान की संभावना कम रहती है।
विशेषज्ञों के अनुसार फसल विविधीकरण से किसानों की आय स्थिर बनी रहती है और मौसम संबंधी जोखिमों का प्रभाव भी कम पड़ता है।
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दलहन-तिलहन खेती पर मिलेगा विशेष प्रोत्साहन
राज्य सरकार किसानों को फसल विविधीकरण के लिए प्रोत्साहित कर रही है। इसके तहत अपलैंड क्षेत्रों में धान के स्थान पर दलहन एवं तिलहन फसलों की खेती करने वाले किसानों को 15 हजार रुपये प्रति एकड़ तक की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी।
यह पहल किसानों को कम जोखिम वाली खेती अपनाने और आय बढ़ाने के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से शुरू की गई है।
इसके अलावा इन फसलों की खरीदी प्रधानमंत्री आशा योजना के अंतर्गत समर्थन मूल्य पर की जाती है, जिससे किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य प्राप्त हो सके।
El-Nino में फसल विविधीकरण क्यों है फायदेमंद?
कृषि वैज्ञानिकों का मानना है कि El-Nino जैसी परिस्थितियों में फसल विविधीकरण सबसे प्रभावी रणनीति साबित हो सकती है।
दलहन फसलें भूमि में नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ाने में मदद करती हैं, जिससे मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है। इसके कारण आगामी फसलों की उत्पादकता पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
तिलहन और मोटे अनाज की फसलें कम लागत में बेहतर उत्पादन देती हैं तथा बाजार में इनकी मांग भी लगातार बनी रहती है।
किसानों की आय बढ़ाने में मददगार साबित होंगी वैकल्पिक फसलें
विशेषज्ञों का कहना है कि वैकल्पिक फसलें न केवल मौसमीय जोखिम कम करती हैं बल्कि किसानों की आर्थिक स्थिति को भी मजबूत बनाती हैं।
कम सिंचाई, कम लागत और बेहतर बाजार मूल्य के कारण दलहन एवं तिलहन फसलें किसानों को अतिरिक्त लाभ प्रदान कर सकती हैं।
ऐसे में El-Nino की संभावित परिस्थितियों को देखते हुए कृषि विभाग की सलाह किसानों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
अल्प अवधि वाली धान किस्मों का चयन करने की सलाह
कृषि विभाग ने मध्यम भूमि वाले किसानों को भी सतर्क रहने की सलाह दी है। विभाग का कहना है कि कम वर्षा की आशंका को देखते हुए अल्प अवधि में तैयार होने वाली धान किस्मों का चयन करना अधिक लाभकारी रहेगा।
इससे जल उपलब्धता में कमी होने की स्थिति में भी फसल को सुरक्षित रखा जा सकेगा और उत्पादन हानि का जोखिम कम होगा।
किसानों को कृषि वैज्ञानिकों और विभागीय अधिकारियों की सलाह के अनुसार ही बीज और फसल का चयन करने की अपील की गई है।
El-Nino के संभावित प्रभाव के कारण इस वर्ष सामान्य से कम वर्षा होने की आशंका जताई जा रही है। ऐसी परिस्थितियों में कृषि विभाग द्वारा सुझाए गए फसल विविधीकरण, दलहन-तिलहन खेती और अल्प अवधि वाली धान किस्मों का चयन किसानों के लिए लाभदायक साबित हो सकता है। El-Nino के प्रभाव को ध्यान में रखते हुए यदि किसान वैज्ञानिक सलाह और सरकारी योजनाओं का लाभ उठाते हैं, तो वे न केवल मौसम संबंधी जोखिम कम कर सकते हैं बल्कि अपनी आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि कर सकते हैं।
