Ek Ped Maa Ke Naam: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बरगद का पौधा लगाकर दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश

Ek Ped Maa Ke Naam अभियान 2026-27 का शुभारंभ विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने राजधानी रायपुर स्थित राजीव स्मृति वन में किया। मुख्यमंत्री ने कृष्ण वट (बरगद) का पौधा रोपित कर प्रदेशवासियों को पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। इस अवसर पर वन मंत्री श्री केदार कश्यप ने भी बेल का पौधा लगाकर अभियान में सहभागिता निभाई।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रकृति और मानव जीवन का संबंध अटूट है तथा पर्यावरण संरक्षण प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है। उन्होंने प्रदेशवासियों से अपनी माता के नाम एक पौधा लगाने का आह्वान किया।

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Ek Ped Maa Ke Naam अभियान का हुआ राज्य स्तरीय शुभारंभ

विश्व पर्यावरण दिवस पर आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू किया गया Ek Ped Maa Ke Naam अभियान पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन बनाने की दिशा में एक प्रेरक और भावनात्मक पहल है।

उन्होंने कहा कि अनियंत्रित वृक्ष कटाई और पर्यावरणीय असंतुलन आज पूरी मानवता के लिए गंभीर चुनौती बन चुके हैं। ऐसे समय में पौधारोपण और प्रकृति संरक्षण अत्यंत आवश्यक हो गया है।

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Ek Ped Maa Ke Naam से जनभागीदारी को मिली नई ताकत

मुख्यमंत्री ने बताया कि पिछले वर्ष राज्य में ढाई करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन जनसहभागिता और विभागीय प्रयासों के कारण साढ़े तीन करोड़ से अधिक पौधे लगाए गए।

उन्होंने विश्वास जताया कि इस वर्ष भी Ek Ped Maa Ke Naam अभियान के तहत प्रदेशवासी निर्धारित लक्ष्य से कहीं अधिक पौधारोपण कर नया रिकॉर्ड बनाएंगे।

44 प्रतिशत वन क्षेत्र छत्तीसगढ़ की बड़ी ताकत

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ देश के उन चुनिंदा राज्यों में शामिल है जहां लगभग 44 प्रतिशत भू-भाग वनाच्छादित है।

राज्य सरकार और वन विभाग लगातार वन संरक्षण, जैव विविधता संवर्धन और हरित क्षेत्र विस्तार के लिए कार्य कर रहे हैं। उन्होंने लोगों से अपने घर, खेत, मेड़ों और आंगन में पौधे लगाने की अपील की।

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आदिवासी परंपराएं बनीं प्रकृति संरक्षण की मिसाल

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में आदिवासी समाज की प्रकृति संरक्षण परंपराओं का विशेष उल्लेख किया।

उन्होंने कहा कि जनजातीय समुदाय सदियों से जंगलों और वृक्षों को अपनी संस्कृति का हिस्सा मानकर उनकी रक्षा करता आया है। सरना स्थलों में वृक्षों की पूजा प्रकृति के प्रति सम्मान और संरक्षण का जीवंत उदाहरण है।

यह परंपरा आज भी पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।


पद्मश्री सम्मानित विभूतियों का किया गया सम्मान

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने समाज सेवा और जनकल्याण के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले पद्मश्री सम्मानित व्यक्तित्वों का सम्मान किया।

इनमें श्री पंडी राम मंडावी, श्री जागेश्वर यादव और डॉ. रामचंद्र गोडबोले शामिल रहे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इन विभूतियों का जीवन समाज सेवा, समर्पण और जनहित के प्रति प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत करता है।


जैव विविधता से जुड़ी पुस्तकों का विमोचन

कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ राज्य जैव विविधता बोर्ड द्वारा प्रकाशित कई महत्वपूर्ण पुस्तकों का भी विमोचन किया गया।

इन पुस्तकों में ‘द बैगा’, ‘वेटलैंड्स ऑफ छत्तीसगढ़’, ‘फ्लोरल डायवर्सिटी ऑफ बीजापुर डिवीजन’, ‘मैमल्स ऑफ छत्तीसगढ़’ तथा ‘उत्तरी छत्तीसगढ़ के अनूठे पर्यटन स्थल और उनकी विविधता’ शामिल हैं।

इन प्रकाशनों का उद्देश्य राज्य की जैव विविधता और प्राकृतिक धरोहरों के बारे में जागरूकता बढ़ाना है।


ग्रामीण महिलाओं ने साझा किए संरक्षण और जैविक खेती के अनुभव

भानुप्रतापपुर विकासखंड के ग्राम सिलीबहार की सुश्री चंदनबती कोला ने कार्यक्रम में स्व-सहायता समूहों द्वारा किए जा रहे पर्यावरण संरक्षण कार्यों की जानकारी दी।

उन्होंने बताया कि गांव में 138 एकड़ क्षेत्र में प्राकृतिक और जैविक खेती की जा रही है। इस पहल से युवाओं का पलायन रुका है और पर्यावरण संरक्षण को नई दिशा मिली है।

वन मंत्री केदार कश्यप ने भी Ek Ped Maa Ke Naam अभियान को जन-जन का आंदोलन बनाने का आह्वान किया।


कोपरा जलाशय को रामसर साइट मिलने पर बधाई

वन मंत्री श्री केदार कश्यप ने बिलासपुर जिले के कोपरा जलाशय को रामसर साइट का दर्जा मिलने पर प्रदेशवासियों को बधाई दी।

उन्होंने इसे छत्तीसगढ़ के लिए गौरवपूर्ण उपलब्धि बताते हुए कहा कि इससे राज्य की अंतरराष्ट्रीय पहचान और मजबूत होगी तथा वेटलैंड संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा।

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Ek Ped Maa Ke Naam केवल एक पौधारोपण अभियान नहीं, बल्कि प्रकृति और मातृत्व के प्रति सम्मान व्यक्त करने का एक जनआंदोलन है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय द्वारा शुरू किया गया यह अभियान पर्यावरण संरक्षण को नई दिशा देने के साथ जनभागीदारी को भी मजबूत करेगा। यदि प्रत्येक नागरिक Ek Ped Maa Ke Naam के संकल्प के साथ एक पौधा लगाकर उसका संरक्षण करे, तो आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ और हरित भविष्य सुनिश्चित किया जा सकता है।

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