Disability Child Survey: दुर्ग में 18 वर्ष तक के दिव्यांग बच्चों की पहचान के लिए चलेगा बड़ा सर्वे अभियान

Disability Child Survey के तहत दुर्ग जिले में शून्य से 18 वर्ष तक के दिव्यांग बच्चों की पहचान के लिए व्यापक सर्वे अभियान शुरू किया जाएगा। कलेक्टर श्री अभिजीत सिंह की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में इस अभियान को प्रभावी ढंग से संचालित करने के लिए विभिन्न विभागों को समन्वय बनाकर कार्य करने के निर्देश दिए गए।

इस सर्वे का उद्देश्य विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ना, उनका नामांकन सुनिश्चित करना और आवश्यक शैक्षणिक सहायता उपलब्ध कराना है।

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Disability Child Survey के लिए कलेक्टर ने दिए निर्देश

कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में आयोजित बैठक में कलेक्टर अभिजीत सिंह ने समाज कल्याण विभाग, जिला शिक्षा अधिकारी, महिला एवं बाल विकास विभाग, एडीपीओ और डीएमसी को मिलकर अभियान संचालित करने के निर्देश दिए।

उन्होंने कहा कि सर्वे केवल औपचारिकता नहीं होना चाहिए, बल्कि जिले के प्रत्येक दिव्यांग बच्चे तक पहुंचने का प्रयास होना चाहिए ताकि कोई भी पात्र बच्चा सरकारी योजनाओं और शिक्षा सुविधाओं से वंचित न रहे।

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Disability Child Survey के तहत 21 प्रकार की दिव्यांगताओं की होगी पहचान

समग्र शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने बताया कि यह सर्वे दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016 में वर्णित 21 प्रकार की दिव्यांगताओं के आधार पर किया जाएगा।

सर्वे के दौरान निम्न प्रकार की दिव्यांगताओं से प्रभावित बच्चों की पहचान की जाएगी:

  • दृष्टिबाधित बच्चे
  • कम दृष्टि वाले बच्चे
  • श्रवण बाधित बच्चे
  • कुष्ठ रोग से प्रभावित एवं शारीरिक विकृति वाले बच्चे
  • जीर्ण स्नायविक स्थिति से प्रभावित बच्चे
  • अन्य विशेष आवश्यकता वाले बच्चे

विशेष बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने का लक्ष्य

Disability Child Survey का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जिले का कोई भी दिव्यांग बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे।

चिन्हित बच्चों को स्कूलों में नामांकित करने के साथ-साथ उनकी आवश्यकताओं के अनुसार विशेष शैक्षणिक सहयोग, उपकरण और सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी।

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विकासखंड और क्लस्टर स्तर पर दिया जाएगा प्रशिक्षण

कलेक्टर ने निर्देश दिए कि सर्वे अभियान को जमीनी स्तर तक प्रभावी बनाने के लिए व्यापक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएं।

बीआरपी और स्पेशल एजुकेटर निभाएंगे अहम भूमिका

विकासखंड और क्लस्टर स्तर पर बीआरपी तथा स्पेशल एजुकेटर सुपरवाइजर, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, सहायिका और मितानिनों को प्रशिक्षण देंगे।

इन कर्मचारियों की सहायता से गांव-गांव जाकर बच्चों की पहचान की जाएगी और आवश्यक जानकारी एकत्रित की जाएगी।

प्रत्येक विद्यालय में बनेगा इंक्लूसिव एजुकेशन एंबेसडर

बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि जिले के प्रत्येक विद्यालय से एक शिक्षक को इंक्लूसिव एजुकेशन एंबेसडर के रूप में चिन्हित किया जाएगा।

उन्हें विशेष प्रशिक्षण देकर समावेशी शिक्षा को बढ़ावा देने और दिव्यांग बच्चों की सहायता के लिए तैयार किया जाएगा।


Disability Child Survey से समावेशी शिक्षा को मिलेगा बढ़ावा

विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे सर्वे अभियान समावेशी शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

Disability Child Survey के माध्यम से प्रशासन को जिले में दिव्यांग बच्चों की वास्तविक संख्या और उनकी आवश्यकताओं की जानकारी मिलेगी। इसके आधार पर योजनाएं तैयार कर बच्चों तक सुविधाएं पहुंचाई जा सकेंगी।

यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति और समावेशी शिक्षा के उद्देश्यों को भी मजबूती प्रदान करेगी।


आम जनता भी कर सकती है सहयोग

कलेक्टर अभिजीत सिंह ने जिलेवासियों से अपील की है कि यदि उनके आसपास कोई दिव्यांग बच्चा हो तो उसकी जानकारी प्रशासन तक पहुंचाएं।

लोग नाम, पता और अन्य जानकारी संबंधित अधिकारियों को फोन या व्हाट्सएप के माध्यम से साझा कर सकते हैं ताकि सर्वे में सभी पात्र बच्चों को शामिल किया जा सके।

सर्वे से जुड़े बच्चों को मिलेगी सरकारी योजनाओं का लाभ

सर्वे से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर चिन्हित बच्चों को विभिन्न सरकारी योजनाओं, शैक्षणिक संसाधनों और विशेष सुविधाओं से जोड़ा जाएगा।

इससे न केवल उनकी शिक्षा बेहतर होगी, बल्कि उनके सामाजिक और व्यक्तिगत विकास को भी नई दिशा मिलेगी।

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Disability Child Survey दुर्ग जिले में समावेशी शिक्षा और दिव्यांग बच्चों के सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हो सकता है। 21 प्रकार की दिव्यांगताओं के आधार पर होने वाला यह सर्वे बच्चों की पहचान कर उन्हें शिक्षा, संसाधनों और सरकारी योजनाओं से जोड़ने का मार्ग प्रशस्त करेगा। Disability Child Survey के सफल क्रियान्वयन से जिले के हजारों विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को बेहतर भविष्य और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का अवसर मिलेगा।

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