Dhaldas Saheb Congress में शामिल हो गए हैं। छत्तीसगढ़ की राजनीति में यह घटनाक्रम इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि ढालदास साहेब राज्य की भाजपा सरकार में मंत्री गुरु खुशवंत साहेब के बड़े भाई हैं। दोनों सतनामी समाज से जुड़े प्रमुख चेहरे हैं।
ढालदास साहेब ने शुक्रवार को पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता भूपेश बघेल की मौजूदगी में कांग्रेस की सदस्यता ली। उनके कांग्रेस में शामिल होने के बाद राज्य की राजनीति में 2028 विधानसभा चुनाव को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
भूपेश बघेल ने सोशल मीडिया पर ढालदास साहेब का स्वागत करते हुए लिखा कि एक शुरुआत हो गई है और मिलकर भाजपा को हटाया जाएगा। कांग्रेस में शामिल होने के बाद ढालदास साहेब ने भी अपने चुनावी इरादे स्पष्ट किए।
Dhaldas Saheb Congress के साथ 2028 चुनाव की तैयारी
ढालदास साहेब ने मीडिया से बातचीत में कहा कि यदि कांग्रेस उन्हें टिकट देती है तो वह 2028 विधानसभा चुनाव लड़ना चाहते हैं। उन्होंने चुनाव लड़ने के लिए मुंगेली विधानसभा क्षेत्र को अपनी पहली पसंद बताया है।
हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया कि वह अपने भाई के खिलाफ चुनाव नहीं लड़ेंगे। उनका कहना है कि वह मुंगेली से चुनाव लड़ना चाहते हैं और आरंग सीट से तभी मैदान में उतरेंगे, जब उनके भाई गुरु खुशवंत साहेब वहां से चुनाव नहीं लड़ते हैं।
गुरु खुशवंत साहेब वर्तमान में आरंग विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं। छत्तीसगढ़ विधानसभा की आधिकारिक जानकारी में भी आरंग सीट से उनका नाम भाजपा विधायक के रूप में दर्ज है।
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भाई के खिलाफ चुनाव नहीं लड़ने का फैसला
Dhaldas Saheb Congress में शामिल होने के बाद सबसे ज्यादा चर्चा उनके और मंत्री खुशवंत साहेब के राजनीतिक रिश्ते को लेकर हो रही है। दोनों भाई होने के बावजूद उनके राजनीतिक रास्ते अब अलग हो गए हैं।
ढालदास साहेब ने स्पष्ट किया है कि वह अपने भाई के खिलाफ चुनावी मुकाबला नहीं चाहते। उनका कहना है कि आरंग से उनकी उम्मीदवारी तभी होगी, जब खुशवंत साहेब वहां से चुनाव मैदान में नहीं उतरेंगे।
यह बयान इसलिए भी अहम है क्योंकि 2028 का विधानसभा चुनाव अभी दूर है, लेकिन प्रमुख राजनीतिक दलों ने संगठन और संभावित उम्मीदवारों को लेकर गतिविधियां तेज कर दी हैं।
सतनामी समाज से जुड़ा राजनीतिक परिवार
ढालदास साहेब ने अपने परिवार की राजनीतिक पृष्ठभूमि का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि उनका परिवार आजादी से पहले के समय से राजनीति से जुड़ा रहा है।
उन्होंने खुद को बाबा गुरु घासीदास की वंश परंपरा से जुड़ा बताया। बाबा गुरु घासीदास सतनाम पंथ के संस्थापक माने जाते हैं और छत्तीसगढ़ के सतनामी समाज में उनका महत्वपूर्ण स्थान है।
सतनामी समाज छत्तीसगढ़ के प्रमुख अनुसूचित जाति समुदायों में शामिल है। राज्य की राजनीति में इस समुदाय का सामाजिक और राजनीतिक प्रभाव महत्वपूर्ण माना जाता है।
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परिवार के कई सदस्य राजनीति में सक्रिय
ढालदास साहेब ने बताया कि उनके तीन भाई और एक बहन हैं। उनकी बहन पहले तिल्दा-नेवरा नगरपालिका की अध्यक्ष रह चुकी हैं, जबकि उनके भाई गुरु सौरभ साहेब रायपुर जिला पंचायत के अध्यक्ष हैं।
उनके एक अन्य रिश्तेदार गुरु रुद्र कुमार कांग्रेस से विधायक और मंत्री रह चुके हैं। हालांकि, वह 2023 के विधानसभा चुनाव में चुनाव हार गए थे।
Dhaldas Saheb Congress में क्यों आए?
कांग्रेस में शामिल होने की वजह बताते हुए ढालदास साहेब ने कहा कि उनके परिवार के लोग लंबे समय से राजनीति में रहे हैं। उन्होंने कांग्रेस को पुरानी राजनीतिक पार्टी बताते हुए कहा कि उनके पूर्वज भी कांग्रेस से जुड़े रहे हैं।
उन्होंने कांग्रेस के ऐतिहासिक नेताओं का उल्लेख करते हुए अपनी राजनीतिक पसंद की वजह बताई। उनके कांग्रेस में आने को 2028 विधानसभा चुनाव की तैयारियों के संदर्भ में देखा जा रहा है।
गौरतलब है कि गुरु खुशवंत साहेब भी पहले कांग्रेस में थे। 2023 विधानसभा चुनाव से पहले टिकट नहीं मिलने के बाद उन्होंने भाजपा का रुख किया था। भाजपा के टिकट पर आरंग से चुनाव जीतने के बाद उन्हें राज्य सरकार में मंत्री बनाया गया।
छत्तीसगढ़ की राजनीति पर कितना असर?
Dhaldas Saheb Congress में शामिल होने से कांग्रेस को सतनामी समाज के बीच अपनी राजनीतिक सक्रियता बढ़ाने का एक अवसर मिल सकता है। हालांकि, इसका वास्तविक चुनावी असर 2028 के विधानसभा चुनाव में ही स्पष्ट होगा।
फिलहाल सबसे अहम बात यह है कि एक ही राजनीतिक परिवार के दो प्रमुख सदस्य अलग-अलग दलों के साथ दिखाई दे रहे हैं। ढालदास साहेब कांग्रेस से चुनाव लड़ने की इच्छा जता चुके हैं, जबकि उनके भाई गुरु खुशवंत साहेब भाजपा सरकार में मंत्री हैं।
आने वाले समय में कांग्रेस उन्हें किस विधानसभा क्षेत्र से चुनाव मैदान में उतारती है, यह राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण सवाल रहेगा। यदि मुंगेली से उन्हें टिकट मिलता है, तो वहां भी मुकाबला दिलचस्प हो सकता है।
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Dhaldas Saheb Congress में शामिल होने की घटना ने छत्तीसगढ़ की राजनीति में नया सियासी समीकरण जरूर खड़ा कर दिया है। मंत्री गुरु खुशवंत साहेब के बड़े भाई का कांग्रेस में जाना और 2028 में चुनाव लड़ने की इच्छा जताना आने वाले विधानसभा चुनाव की तैयारियों के लिहाज से महत्वपूर्ण है। हालांकि, अंतिम तस्वीर कांग्रेस के टिकट और 2028 के चुनावी समीकरण सामने आने के बाद ही साफ होगी।
