Court Order के तहत दुर्ग कोर्ट ने 10 जून 2025 की रात हुई मारपीट के मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराने की जिम्मेदारी जिले के एसएसपी को सौंपी है। अदालत ने कहा कि जिस थाना प्रभारी पर खुद गंभीर आरोप लगाए गए हैं, उसी थाने से मामले की जांच कराना निष्पक्ष न्याय की भावना के अनुरूप नहीं होगा।
मामला दुर्ग के कोतवाली थाना क्षेत्र का है। मारपीट की घटना के बाद थाना प्रभारी समेत कुल आठ लोगों के खिलाफ अदालत में परिवाद दायर किया गया था। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पुलिस की जांच प्रक्रिया को लेकर उठाए गए आरोपों पर विचार किया।
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Court Order के पीछे क्या है पूरा मामला?
अधिवक्ता सौरभ चौबे के अनुसार, घटना 10 जून 2025 की रात करीब 10:30 बजे हुई। पीड़ित निहाल जसवानी ने अपने साले सूरज ठाकुर के साथ कुछ लोगों को विवाद और मारपीट करते देखा था।
निहाल कथित तौर पर बीच-बचाव करने के लिए वहां पहुंचा। आरोप है कि इसी दौरान लक्ष्य यादव, राजा यादव और तिलक साहू ने उस पर नुकीली चीज से हमला कर दिया।
हमले में निहाल की आंख के पास और पसली में गंभीर चोटें आने का आरोप है। इसके बाद मामले को लेकर पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए गए।
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Court Order: साले को बचाने पहुंचे युवक पर हमला
परिवाद में आरोप लगाया गया है कि निहाल अपने साले को बचाने के लिए घटनास्थल पर गया था। इसी दौरान उसके साथ मारपीट की गई और नुकीली वस्तु से हमला किया गया।
पीड़ित पक्ष का कहना है कि घटना के बाद पुलिस से निष्पक्ष कार्रवाई की उम्मीद थी, लेकिन आरोप है कि जांच की दिशा ही बदल गई।
पीड़ितों पर ही केस दर्ज करने का आरोप
परिवाद में कोतवाली पुलिस पर आरोपियों के साथ कथित सांठ-गांठ करने का आरोप लगाया गया है। आरोप है कि निहाल का उचित मेडिकल परीक्षण कराने के बजाय दूसरे पक्ष के घायल व्यक्ति का मेडिकल कराया गया।
इसके अलावा पुलिस पर बयानों में कथित हेरफेर करने का भी आरोप लगाया गया। परिवाद के अनुसार, बाद में निहाल और उसके साले के खिलाफ ही मामला दर्ज कर दिया गया।
वहीं कुंती यादव नाम की महिला पर भी कथित तौर पर झूठी FIR और फर्जी शपथ पत्र के जरिए वास्तविक आरोपियों को बचाने की कोशिश करने का आरोप लगाया गया है। ये सभी आरोप परिवाद में लगाए गए हैं और इनकी स्वतंत्र न्यायिक जांच अभी बाकी है।
Court Order में थाना प्रभारी की भूमिका पर सवाल
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने जांच की निष्पक्षता को महत्वपूर्ण माना। परिवाद में थाना प्रभारी पर ही पक्षपात और बयानों में गड़बड़ी करने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
ऐसी स्थिति में कोर्ट ने माना कि उसी थाना स्तर से जांच कराना उचित नहीं होगा, क्योंकि इससे जांच प्रभावित होने की आशंका बनी रह सकती है। अदालत का निर्देश इसी निष्पक्षता को सुनिश्चित करने की दिशा में है।
स्वतंत्र जांच की जिम्मेदारी एसएसपी को
Court Order के बाद अब दुर्ग के एसएसपी किसी अन्य और स्वतंत्र पुलिस अधिकारी से पूरे मामले की जांच कराएंगे। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि शिकायत में लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष तरीके से जांच हो।
जांच के दौरान घटना से जुड़े दस्तावेज, मेडिकल रिपोर्ट, बयान और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों की पड़ताल की जा सकती है। जांच पूरी होने के बाद सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई तय होगी।
भारत में पुलिस और आपराधिक न्याय व्यवस्था से संबंधित आधिकारिक जानकारी के लिए भारत सरकार का गृह मंत्रालय देखा जा सकता है। न्यायिक मामलों और अदालतों से जुड़ी आधिकारिक सेवाओं के लिए ई-कोर्ट्स पोर्टल उपयोगी स्रोत है।
मामले में आगे क्या होगा?
अब जांच दुर्ग कोतवाली पुलिस के बजाय एसएसपी द्वारा नियुक्त स्वतंत्र अधिकारी से कराई जाएगी। इस जांच से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि 10 जून की घटना में वास्तव में क्या हुआ था और पुलिस की शुरुआती कार्रवाई में लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है।
यह भी महत्वपूर्ण होगा कि जांच अधिकारी मेडिकल रिकॉर्ड, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और पुलिस रिकॉर्ड सहित उपलब्ध साक्ष्यों का किस तरह परीक्षण करते हैं।
दुर्ग कोर्ट का यह Court Order निष्पक्ष जांच के महत्व को रेखांकित करता है। अदालत ने थाना प्रभारी पर ही आरोप होने के कारण उसी पुलिस थाने से जांच कराने के बजाय एसएसपी को स्वतंत्र अधिकारी नियुक्त करने का निर्देश दिया है। अब मामले की आगे की जांच से 10 जून की मारपीट और पुलिस कार्रवाई को लेकर लगाए गए आरोपों की वास्तविक स्थिति सामने आने की उम्मीद है।
