Chhattisgarh Urban Budget को लेकर सामने आए आंकड़े नगरीय विकास की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं। वित्तीय वर्ष 2025-26 में केंद्र प्रवर्तित योजनाओं और 15वें वित्त आयोग के तहत नगरीय निकायों के लिए करीब 4,977 करोड़ रुपये का प्रावधान बताया गया था। इसमें से लगभग 3,543 करोड़ रुपये ही खर्च हो सके, जबकि करीब 1,434 करोड़ रुपये खर्च नहीं हो पाए।
यानी कुल प्रावधान का लगभग 28.8 प्रतिशत हिस्सा वित्तीय वर्ष समाप्त होने तक उपयोग नहीं हो सका। इसका सीधा असर सड़क, नाली, जल निकासी, कचरा प्रबंधन, सीवेज, पानी और आवास जैसी बुनियादी सुविधाओं से जुड़े कार्यों पर पड़ सकता है।
छत्तीसगढ़ सरकार के आधिकारिक बजट पोर्टल पर 2025-26 के बजट दस्तावेज उपलब्ध हैं।
Chhattisgarh Urban Budget में 1434 करोड़ क्यों नहीं खर्च हुए?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब योजनाओं के लिए बजट उपलब्ध था, तो बड़ी राशि खर्च क्यों नहीं हो सकी। इसके पीछे केवल फंड की कमी को जिम्मेदार नहीं माना जा सकता। कई मामलों में परियोजनाओं की तैयारी, प्रशासनिक प्रक्रिया और स्थानीय निकायों की कार्यक्षमता भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
किसी बड़े विकास कार्य के लिए केवल बजट स्वीकृत होना पर्याप्त नहीं होता। पहले डीपीआर यानी Detailed Project Report, तकनीकी स्वीकृति, टेंडर, वर्क ऑर्डर और साइट से जुड़ी प्रक्रियाएं पूरी करनी होती हैं।
कई परियोजनाओं में जमीन की उपलब्धता, विभागीय अनुमति, ठेकेदार की नियुक्ति और केंद्र-राज्य हिस्सेदारी से जुड़ी औपचारिकताएं भी पूरी करनी पड़ती हैं। इनमें देरी होने पर बजट होने के बावजूद काम शुरू नहीं हो पाता।
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रायपुर का Urban Flood Management प्रोजेक्ट
राजधानी रायपुर इसका प्रमुख उदाहरण सामने आता है। शहर को जलभराव से बचाने के लिए Urban Flood Risk Management Programme के तहत ₹200 करोड़ के अनुदान का प्रावधान सामने आया था। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार रायपुर उन शहरों में शामिल था जिन्हें इस कार्यक्रम के तहत सहायता मिलनी थी।
इस राशि में केंद्र और राज्य की हिस्सेदारी शामिल थी। रिपोर्ट के अनुसार परियोजना के लिए कार्ययोजना तैयार कर संबंधित स्तर पर भेजना जरूरी था। यदि प्लान समय पर स्वीकृत नहीं होता है तो राशि का उपयोग भी आगे नहीं बढ़ पाता।
यही स्थिति बताती है कि Chhattisgarh Urban Budget में केवल धनराशि उपलब्ध कराना पर्याप्त नहीं है। योजना को जमीन पर उतारने के लिए मजबूत प्रोजेक्ट प्लानिंग और समयबद्ध क्रियान्वयन भी जरूरी है।
राज्य योजना में खर्च की तस्वीर बेहतर
केंद्रीय योजनाओं के मुकाबले राज्य योजना में खर्च का प्रदर्शन बेहतर बताया गया है। करीब 2,900 करोड़ रुपये के बजट में से 2,800 करोड़ रुपये से अधिक खर्च हुए। यानी लगभग 96.4 प्रतिशत राशि उपयोग हो गई और करीब 104.47 करोड़ रुपये शेष रहे।
यह अंतर महत्वपूर्ण है। इससे संकेत मिलता है कि समस्या केवल बजट उपलब्ध होने की नहीं है। केंद्रीय योजनाओं में स्वीकृति, डीपीआर, फंडिंग पैटर्न और दूसरी प्रक्रियाओं की जटिलता भी खर्च की गति को प्रभावित कर सकती है।
पैसा खाते में, काम फाइलों में क्यों?
केंद्रीय योजनाओं का पैसा मिलते ही उसे सीधे निर्माण कार्य में नहीं लगाया जा सकता। हर परियोजना को निर्धारित प्रशासनिक और तकनीकी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है।
यदि डीपीआर तैयार नहीं है, जमीन उपलब्ध नहीं है या तकनीकी स्वीकृति और टेंडर प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है, तो काम शुरू करना मुश्किल होता है। यही वजह है कि वित्तीय वर्ष के अंत में बजट का एक बड़ा हिस्सा बिना खर्च रह सकता है।
इस समस्या का समाधान परियोजनाओं की पहले से तैयारी में छिपा है। वित्तीय वर्ष शुरू होने से पहले ही प्राथमिकता वाली योजनाओं की डीपीआर और जरूरी अनुमतियां तैयार रखने से खर्च की गति बढ़ाई जा सकती है।
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Chhattisgarh Urban Budget का शहरों पर असर
बजट खर्च में देरी का असर केवल सरकारी आंकड़ों तक सीमित नहीं रहता। इसका सीधा प्रभाव शहरों में रहने वाले लोगों पर दिखाई देता है।
नालियों और जल निकासी से जुड़े काम अटकने पर बारिश के दौरान जलभराव की समस्या बढ़ सकती है। रायपुर समेत कई शहरों में बेहतर ड्रेनेज सिस्टम की जरूरत लंबे समय से महसूस की जाती रही है।
इसी तरह कचरा प्रबंधन, सीवेज, पेयजल, सड़क और आवास से जुड़े प्रोजेक्ट समय पर पूरे नहीं होने से नागरिक सुविधाओं पर दबाव बढ़ता है।
निकायों की प्रोजेक्ट मैनेजमेंट क्षमता बढ़ाने की जरूरत
विशेषज्ञों के अनुसार नगरीय निकायों में Project Management Cell, तकनीकी विशेषज्ञों और वित्तीय प्रबंधन से जुड़ी टीम को मजबूत करना जरूरी है।
यदि संभावित परियोजनाओं की डीपीआर वित्तीय वर्ष शुरू होने से पहले तैयार हो जाए, जमीन और डिजाइन की स्थिति स्पष्ट हो तथा टेंडर और स्वीकृतियों की प्रक्रिया पहले से पूरी हो, तो बजट का उपयोग बेहतर तरीके से किया जा सकता है।
राज्य के आधिकारिक बजट दस्तावेजों में नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के लिए अलग-अलग प्रावधान दर्ज हैं, जिससे शहरी विकास के लिए बजट योजना की व्यापकता स्पष्ट होती है।
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Chhattisgarh Urban Budget के आंकड़े यह संकेत देते हैं कि शहरी विकास में चुनौती केवल पैसा उपलब्ध कराने की नहीं, बल्कि उसे समय पर जमीन पर उतारने की भी है। करीब 4,977 करोड़ रुपये के प्रावधान में लगभग 1,434 करोड़ रुपये का खर्च नहीं हो पाना बताता है कि योजना निर्माण, तकनीकी स्वीकृति, टेंडर और प्रोजेक्ट मैनेजमेंट पर अधिक ध्यान देने की जरूरत है। यदि निकाय पहले से तैयार परियोजनाओं के साथ वित्तीय वर्ष की शुरुआत करें, तो सड़क, नाली, सीवेज, कचरा प्रबंधन और जलभराव जैसी समस्याओं से जुड़े काम तेजी से पूरे किए जा सकते हैं।
