HIV Viral Load को नियंत्रित करने के मामले में छत्तीसगढ़ से राहत देने वाली खबर सामने आई है। राज्य में एचआईवी के साथ जीवन जी रहे करीब 18 हजार मरीजों का वायरल लोड 1,000 copies/ml से नीचे दर्ज किया गया है।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार प्रदेश में करीब 36 हजार HIV मरीजों की पहचान हुई है। इनमें लगभग 33 हजार मरीजों का वायरल लोड टेस्ट किया जा चुका है, जबकि करीब 28 हजार मरीजों का इलाज शुरू हो चुका है।
नियमित दवा लेने और स्वास्थ्य विभाग की निगरानी के चलते बड़ी संख्या में मरीजों में वायरस का स्तर नियंत्रित हुआ है। राष्ट्रीय HIV कार्यक्रम में 1,000 copies/ml या उससे अधिक वायरल लोड को virological failure की सीमा के रूप में परिभाषित किया गया है।
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18 हजार मरीजों का HIV Viral Load 1000 से नीचे
आंकड़ों के मुताबिक नियमित रूप से ART दवा लेने वाले करीब 18 हजार मरीजों में वायरल लोड 1,000 से नीचे पहुंच गया है। बताया गया है कि पहले इनमें से कई मरीजों का वायरल लोड करीब 6,000 तक रहता था।
वायरल लोड में कमी उपचार की प्रभावशीलता और दवा के नियमित सेवन से जुड़ा महत्वपूर्ण संकेतक है। हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि मरीज के शरीर से HIV पूरी तरह समाप्त हो गया है।
राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन के दिशा-निर्देशों के अनुसार वायरल लोड टेस्ट HIV उपचार की निगरानी और उपचार की प्रभावशीलता समझने का महत्वपूर्ण माध्यम है।
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HIV Viral Load नियंत्रित होने का क्या मतलब?
वायरल लोड कम होने से शरीर में HIV की सक्रियता को नियंत्रित रखने में मदद मिलती है। इससे प्रतिरक्षा प्रणाली पर वायरस का दबाव कम करने और HIV से जुड़ी स्वास्थ्य संबंधी जटिलताओं के जोखिम को घटाने में मदद मिल सकती है।
एड्स नियंत्रण कार्यक्रम के अतिरिक्त परियोजना संचालक डॉ. खेमराज सोनवानी के अनुसार, अनियंत्रित संक्रमण की स्थिति में रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो सकती है, जिससे निमोनिया, बार-बार डायरिया और टीबी जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।
उन्होंने बताया कि नियमित उपचार से वायरल लोड घटने पर रोग प्रतिरोधक क्षमता बेहतर बनाए रखने में मदद मिलती है। मरीजों को उपचार बीच में नहीं छोड़ना चाहिए और चिकित्सकीय सलाह के अनुसार ART जारी रखना जरूरी है।
सात जिलों में 95% मरीजों का वायरल लोड नियंत्रित
राज्य के सात जिलों में मरीजों के HIV Viral Load नियंत्रण को लेकर विशेष सुधार दर्ज किया गया है। इनमें मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी, बालोद, मुंगेली, सक्ती, सारंगढ़-बिलाईगढ़, सूरजपुर और धमतरी शामिल हैं।
इन जिलों में करीब 95 प्रतिशत मरीजों का वायरल लोड नियंत्रित पाया गया है। स्वास्थ्य विभाग से संबंधित 5 सितंबर 2026 की रिपोर्ट में भी इन सात जिलों के Third 95 प्रदर्शन में उल्लेखनीय प्रगति की जानकारी दी गई है।
मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले में भी स्थिति में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार वहां First 95, Second 95 और Third 95, तीनों लक्ष्यों में प्रगति दर्ज हुई है।
ART और काउंसलर की निगरानी बनी अहम
HIV मरीजों के उपचार में केवल दवा उपलब्ध कराना ही पर्याप्त नहीं है। दवा नियमित रूप से लेना और मरीज की लगातार निगरानी भी महत्वपूर्ण है।
ART सेंटर के काउंसलर मरीजों और उनके परिवारों के संपर्क में रहते हैं। मरीज को निर्धारित अवधि की दवाएं दी जाती हैं। यदि कोई मरीज दवा लेने के लिए नहीं पहुंचता, तो काउंसलर परिवार से संपर्क कर कारण जानने का प्रयास करते हैं।
जरूरत पड़ने पर मरीज को उपचार दोबारा नियमित करने के लिए प्रेरित किया जाता है। यही सतत निगरानी कई क्षेत्रों में उपचार की निरंतरता बनाए रखने में मदद कर रही है।
हर छह महीने में HIV Viral Load टेस्ट
मरीजों का वायरल लोड टेस्ट नियमित अंतराल पर किया जाता है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार मरीजों का हर छह महीने में HIV Viral Load टेस्ट किया जाता है।
जनवरी से मरीजों की निगरानी और दवा वितरण व्यवस्था को और मजबूत किया गया है। जिन जिलों में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ है, वहां HIV की जल्द पहचान, अधिक जांच और पॉजिटिव मरीजों को जल्द ART से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है।
इलाज बीच में छोड़ने वाले मरीजों की अलग से निगरानी भी की जा रही है, ताकि उन्हें दोबारा नियमित उपचार से जोड़ा जा सके।
किन जिलों में हुआ सुधार?
सात जिलों के अलावा बेमेतरा, दुर्ग, गरियाबंद, जांजगीर-चांपा, जशपुर, कबीरधाम, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई, कोरबा, महासमुंद, रायगढ़, रायपुर और राजनांदगांव में भी नियमित दवा लेने वाले मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी की जानकारी सामने आई है।
राष्ट्रीय स्तर पर भी HIV उपचार कवरेज में वृद्धि दर्ज हुई है। केंद्र सरकार के आंकड़ों के अनुसार दिसंबर 2025 तक देश में 18 लाख से अधिक HIV संक्रमित लोग NACP सुविधाओं पर एंटीरेट्रोवायरल उपचार ले रहे थे।
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आगे की रणनीति क्या होगी?
स्वास्थ्य विभाग का फोकस अब उन जिलों पर है जहां HIV की पहचान, उपचार से जोड़ने और वायरल लोड नियंत्रण में अभी और सुधार की जरूरत है।
इसके लिए ज्यादा जांच, मरीजों की जल्द पहचान, ART से तत्काल लिंक करने और इलाज की निरंतरता पर जोर दिया जा रहा है। काउंसलरों की भूमिका भी महत्वपूर्ण बनी रहेगी।
मरीजों के लिए सबसे जरूरी संदेश यही है कि HIV का उपचार डॉक्टर की सलाह के अनुसार नियमित रूप से जारी रखा जाए और दवा बिना चिकित्सकीय सलाह के बंद न की जाए।
छत्तीसगढ़ में HIV Viral Load नियंत्रण के आंकड़े HIV उपचार व्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत देते हैं। करीब 18 हजार मरीजों का वायरल लोड 1,000 से नीचे पहुंचना और सात जिलों में 95 प्रतिशत मरीजों के नियंत्रण की जानकारी उपचार की निरंतरता और निगरानी के महत्व को दिखाती है। हालांकि HIV पूरी तरह समाप्त नहीं होता, लेकिन नियमित ART, समय पर जांच और लगातार काउंसलिंग से वायरस को नियंत्रित रखने और स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में महत्वपूर्ण मदद मिल सकती है।
