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छत्तीसगढ़ के कांकेर में दफन विवाद बना हिंसा की वजह, दो चर्च जलाए गए, पुलिस-ग्रामीण घायल

Chhattisgarh burial dispute violence। छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले के अमाबेड़ा गांव में एक दफन विवाद ने गुरुवार को हिंसक रूप ले लिया। विवाद इतना बढ़ गया कि दो चर्चों को आग के हवाले कर दिया गया, एक कब्र खोद दी गई और पुलिस व ग्रामीणों के बीच झड़प में कई लोग घायल हो गए। यह घटना रायपुर से करीब 150 किलोमीटर दूर कांकेर जिले की है, जहां बीते दो दिनों से तनावपूर्ण माहौल बना हुआ था।


दफन को लेकर क्यों भड़का विवाद?

बड़े टेवड़ा ग्राम पंचायत में विवाद तब शुरू हुआ जब सरपंच राजमन सलाम के परिवार ने उनके पिता चमराराम सलाम (70 वर्ष) का अंतिम संस्कार निजी भूमि पर किया। ग्रामीणों के एक वर्ग का आरोप है कि यह दफन आदिवासी परंपराओं के खिलाफ और गुप्त रूप से किया गया। चमराराम सलाम की 15 दिसंबर को इलाज के दौरान मौत हुई थी।

ग्रामीणों का दावा था कि सरपंच ईसाई धर्म अपना चुके हैं और अंतिम संस्कार ईसाई रीति से किया गया, जबकि प्रशासन का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है।


स्थिति बिगड़ी, पुलिस को करना पड़ा लाठीचार्ज

दफन के विरोध में बुधवार से ही गांव में तनाव था, जो गुरुवार को हिंसा में बदल गया। दोनों पक्षों के बीच पत्थरबाजी हुई, जिसमें अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सहित करीब 20 पुलिसकर्मी और कई ग्रामीण घायल हो गए। हालात काबू में करने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा।


कब्र खोदने का आदेश, जांच जारी

कांकेर पुलिस के अनुसार ग्रामीणों की शिकायत पर कार्यपालक मजिस्ट्रेट ने शव को कब्र से बाहर निकालने का आदेश दिया। शव का पोस्टमार्टम किया जाएगा और पूरे मामले की कानूनी जांच जारी है। हिंसा के दौरान कई संपत्तियों को नुकसान भी पहुंचा है।


प्रशासन और समुदाय के अलग-अलग दावे

अतिरिक्त कलेक्टर अंजोर सिंह पैकरा ने कहा कि सरपंच के पिता हिंदू धर्म का पालन करते थे, जबकि अंतिम संस्कार ईसाई परंपरा से किया गया, जिससे ग्रामीणों में आक्रोश फैला।

वहीं, छत्तीसगढ़ क्रिश्चियन फोरम के अध्यक्ष अरुण पन्नालाल ने आरोपों को भ्रामक बताया। उन्होंने कहा कि सरपंच ने धर्म परिवर्तन नहीं किया है और अंतिम संस्कार आदिवासी रीति से निजी जमीन पर किया गया था। गलत जानकारी फैलने के कारण यह Chhattisgarh burial dispute violence गंभीर रूप ले बैठी।


गांव में पुलिस-प्रशासन तैनात

स्थिति को नियंत्रित रखने के लिए जिला प्रशासन और पुलिस अधिकारी गांव में कैंप कर रहे हैं। प्रशासन का दावा है कि अब हालात नियंत्रण में हैं, लेकिन एहतियात के तौर पर सुरक्षा बढ़ा दी गई है।