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Bastar Naxal Free Villages: नक्सल हिंसा घटने के बाद लौटने लगे विस्थापित परिवार, विकास कार्यों को मिली रफ्तार

Bastar Naxal Free Villages की दिशा में छत्तीसगढ़ में तेजी से बदलाव देखने को मिल रहा है। नक्सल हिंसा में कमी आने के बाद बस्तर क्षेत्र से वर्षों पहले पलायन करने वाले कई परिवार अब अपने पैतृक गांवों में लौट रहे हैं। राज्य सरकार ने इन परिवारों के पुनर्वास को प्राथमिकता देते हुए सड़क, आवास, पेयजल, शिक्षा और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विकास कार्य तेज कर दिए हैं।

बस्तर प्रशासन का कहना है कि लौट रहे परिवारों को सम्मानजनक और सुरक्षित जीवन उपलब्ध कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। इसके लिए कई विकास परियोजनाओं पर तेजी से काम किया जा रहा है।

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Bastar Naxal Free Villages में लौट रहे हैं विस्थापित परिवार

बस्तर कलेक्टर आकाश छिकारा ने बताया कि नक्सल प्रभाव कम होने के बाद बड़ी संख्या में विस्थापित परिवार अपने गांवों में वापस आ रहे हैं।

उन्होंने कहा कि पहले नक्सली हिंसा और असुरक्षा के कारण कई परिवार गांव छोड़ने को मजबूर हुए थे। अब हालात सामान्य होने पर सरकार उनकी वापसी को सुविधाजनक बनाने के लिए बुनियादी ढांचे का तेजी से विकास कर रही है।

प्रशासन का लक्ष्य है कि लौटने वाले परिवारों को सड़क, बिजली, पानी, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।

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Bastar Naxal Free Villages में सड़क और बुनियादी सुविधाओं पर विशेष फोकस

Bastar Naxal Free Villages के विकास के लिए प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के तहत सड़क नेटवर्क का विस्तार किया जा रहा है।

प्रशासन के अनुसार—

  • फेज-4 (बैच-1) में 236 किलोमीटर सड़कें स्वीकृत हो चुकी हैं।
  • बैच-2 में 292 किलोमीटर अतिरिक्त सड़कों का प्रस्ताव भेजा गया है।

इन परियोजनाओं का उद्देश्य दूरस्थ गांवों को हर मौसम में सड़क संपर्क उपलब्ध कराना है, जिससे शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार तक लोगों की पहुंच आसान हो सके।


सरकार पुनर्वास के लिए चला रही है कई योजनाएं

राज्य सरकार केवल सड़क निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि गांवों में मूलभूत सुविधाओं को भी बहाल किया जा रहा है।

लौटने वाले परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) के तहत आवास उपलब्ध कराने की प्रक्रिया जारी है। इसके साथ ही गांवों में स्कूल, पेयजल व्यवस्था, सार्वजनिक भवन और अन्य आवश्यक सुविधाओं का विकास किया जा रहा है।

सरकार का उद्देश्य उन गांवों को फिर से बसाना है, जो कभी नक्सल हिंसा के कारण लगभग खाली हो गए थे।


ग्रामीणों ने बताया क्यों लौट रहे हैं लोग

कोलेंग-छिंगगुर गांव के निवासी फुलदेव ठाकुर ने बताया कि पहले गांव में 107 परिवार रहते थे, लेकिन नक्सली हिंसा के कारण लगभग 60 से 70 परिवार पलायन कर गए थे।

उन्होंने कहा कि अब सुरक्षा व्यवस्था बेहतर होने के कारण 30 से अधिक परिवार वापस लौट चुके हैं और अन्य परिवार भी धीरे-धीरे लौट रहे हैं। लोगों को अपने पैतृक गांवों में फिर से बसने का भरोसा मिला है।

ग्रामीणों का कहना है कि पहले वे नक्सली हिंसा और असुरक्षा के कारण गांव छोड़ने को मजबूर थे, जबकि अब हालात पहले की तुलना में काफी बेहतर हैं।


विकास और सुरक्षा साथ-साथ

प्रशासन का मानना है कि केवल सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करना पर्याप्त नहीं है। स्थायी शांति के लिए गांवों में रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं का विकास भी जरूरी है।

इसी रणनीति के तहत प्रशासन गांवों में आधारभूत संरचना को मजबूत करने और लोगों के जीवन स्तर में सुधार लाने के लिए लगातार कार्य कर रहा है।


Bastar Naxal Free Villages की पहल बस्तर में बदलते हालात की सकारात्मक तस्वीर पेश करती है। नक्सल हिंसा में कमी के बाद विस्थापित परिवारों की घर वापसी और सरकार द्वारा सड़क, आवास, पेयजल तथा अन्य मूलभूत सुविधाओं का विस्तार इस क्षेत्र के पुनर्निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। यदि विकास और सुरक्षा का यह अभियान इसी तरह जारी रहता है, तो बस्तर के दूरस्थ गांव फिर से सामाजिक और आर्थिक रूप से मजबूत बन सकते हैं।

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