Body Donation यानी देहदान का संकल्प लेकर दुर्ग के कैलाश नगर निवासी त्रिपाठी परिवार ने मानव सेवा और समाजहित की मिसाल पेश की है। परिवार के चार सदस्यों ने अपनी देहदान की वसीयत नवदृष्टि फाउंडेशन के सदस्यों को सौंपकर मृत्यु के बाद भी चिकित्सा शिक्षा और समाज के काम आने की इच्छा जताई।
परिवार के इस निर्णय को मानव सेवा की दिशा में प्रेरणादायी कदम माना जा रहा है। खास बात यह है कि परिवार ने आपसी सहमति से यह निर्णय लिया और इसे समाज के लिए उपयोगी कार्य से जोड़ने का प्रयास किया।
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Body Donation के लिए चार सदस्यों ने दी सहमति
देहदान का संकल्प लेने वालों में श्री मनोज कुमार त्रिपाठी, उनकी माताजी श्रीमती सावित्री देवी, पुत्र अनमोल त्रिपाठी और पत्नी श्रीमती संगीता त्रिपाठी शामिल हैं।
परिवार की ओर से नम्रता, अर्चना और अमृता ने भी अपनी सहमति देते हुए इस निर्णय का समर्थन किया। चार सदस्यों द्वारा एक साथ देहदान की वसीयत सौंपना इस पहल को और विशेष बनाता है।
त्रिपाठी परिवार ने अपनी वसीयत नवदृष्टि फाउंडेशन के सदस्यों कुलवंत भाटिया, राज आढ़तिया, हरमन दुलई, प्रभु दयाल उजाला और सपन जैन को सौंपी।
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देहदान का विचार कैसे आया?
अनमोल किराना के संचालक मनोज कुमार त्रिपाठी ने बताया कि कुछ समय पहले वे एक परिचित के अंतिम संस्कार में मुक्तिधाम गए थे। वहां उन्होंने नवदृष्टि फाउंडेशन का देहदान से संबंधित फ्लेक्स देखा।
इस जानकारी ने उनके मन में Body Donation का विचार पैदा किया। उन्होंने घर लौटकर परिवार के सदस्यों से इस विषय पर चर्चा की। परिवार के सभी सदस्यों ने सहमति जताई और देहदान का संकल्प लेने का निर्णय किया।
अनमोल त्रिपाठी ने बताया कि कोरोना संक्रमण के बाद से उनकी तबीयत ठीक नहीं रहती, लेकिन समाज के लिए कुछ करने की इच्छा उनके मन में हमेशा रही है। उनका मानना है कि मृत्यु के बाद शरीर चिकित्सा शिक्षा और अध्ययन के काम आए, तो यह समाज के लिए महत्वपूर्ण योगदान हो सकता है।
Body Donation से चिकित्सा शिक्षा को मिलेगा लाभ
देहदान चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। मेडिकल विद्यार्थियों को मानव शरीर की संरचना को समझने के लिए अध्ययन की आवश्यकता होती है। ऐसे में स्वैच्छिक देहदान चिकित्सा शिक्षा के लिए उपयोगी हो सकता है।
इसी सोच के साथ त्रिपाठी परिवार ने अपने निर्णय को केवल व्यक्तिगत इच्छा तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे समाजहित से जोड़ने का प्रयास किया है।
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परिवार के फैसले को बताया प्रेरणादायी
नवदृष्टि फाउंडेशन के कुलवंत भाटिया ने त्रिपाठी परिवार के निर्णय की सराहना की। उन्होंने कहा कि परिवार विषम परिस्थितियों में भी समाज और मानव सेवा के प्रति सकारात्मक सोच रखता है।
उन्होंने इसे परिवार के बड़े हृदय और संवेदनशीलता का परिचायक बताया। फाउंडेशन ने त्रिपाठी परिवार के इस समाजहितैषी निर्णय के लिए सम्मान व्यक्त करते हुए उनके उत्तम स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना की।
समाज में जागरूकता बढ़ाने की उम्मीद
नवदृष्टि फाउंडेशन के अनुसार, त्रिपाठी परिवार का Body Donation संकल्प समाज में देहदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने में मदद कर सकता है।
ऐसे फैसले लोगों को मृत्यु के बाद भी समाज के लिए योगदान देने के विकल्पों के बारे में सोचने के लिए प्रेरित करते हैं। साथ ही, परिवार की सहमति और जागरूकता इस तरह के निर्णयों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
फाउंडेशन से जुड़े अनिल बल्लेवार, कुलवंत भाटिया, राज आढ़तिया, प्रवीण तिवारी, मुकेश आढ़तिया, हरमन दुलई, रितेश जैन, राजेश पारख, प्रभु दयाल उजाला, जितेंद्र हासवानी, मंगल अग्रवाल, किरण भंडारी, उज्ज्वल पींचा, सत्येंद्र राजपूत, सुरेश जैन, पीयूष मालवीय, दीपक बंसल, विकास जायसवाल सहित अन्य सदस्यों ने परिवार के निर्णय की सराहना की।
सेवा की भावना का मजबूत संदेश
त्रिपाठी परिवार का यह फैसला बताता है कि समाजसेवा केवल जीवनकाल तक सीमित नहीं है। व्यक्ति अपने बाद भी चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान जैसे क्षेत्रों में योगदान देने का संकल्प ले सकता है।
निष्कर्ष: दुर्ग के त्रिपाठी परिवार का Body Donation संकल्प मानव सेवा और सामाजिक जिम्मेदारी की प्रेरक मिसाल है। परिवार के चार सदस्यों का यह निर्णय न केवल चिकित्सा शिक्षा के लिए संभावित योगदान का संदेश देता है, बल्कि समाज में देहदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।
