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Farmers Movement को मजबूत करने की तैयारी

Farmers Movement को और मजबूत करने की दिशा में त्रिपुरा में किसान संगठन ने बड़ा कार्यक्रम घोषित किया है। अगरतला में 1 से 3 सितंबर तक अखिल भारतीय किसान सभा का राज्य सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। सम्मेलन के पहले दिन 1 सितंबर को आस्तबल मैदान में सार्वजनिक रैली भी आयोजित की जाएगी।

29 अगस्त को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में किसान सभा के राज्य अध्यक्ष अघोर देबबर्मा, सचिव पवित्र कर और सह-सचिव रतन दास ने सम्मेलन और रैली के कार्यक्रम की जानकारी दी। संगठन की ओर से सम्मेलन को सफल बनाने के लिए तैयारियां तेज कर दी गई हैं।

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1 सितंबर को अगरतला में Farmers Movement की रैली

अखिल भारतीय किसान सभा का राज्य सम्मेलन 1 से 3 सितंबर तक अगरतला टाउन हॉल में होगा। सम्मेलन के पहले दिन आस्तबल मैदान में सार्वजनिक सभा का आयोजन किया गया है।

इस कार्यक्रम में राज्य के अलग-अलग हिस्सों से किसान संगठन के प्रतिनिधियों के शामिल होने की बात कही गई है। संगठन का कहना है कि सम्मेलन के जरिए किसानों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया जाएगा।

रैली और सम्मेलन के माध्यम से किसानों के हितों से जुड़े सवालों पर चर्चा के साथ संगठन को मजबूत करने की रणनीति पर भी विचार किया जाएगा।

Farmers Movement में किन मुद्दों पर होगी चर्चा?

किसान सभा के राज्य अध्यक्ष अघोर देबबर्मा के अनुसार सम्मेलन में त्रिपुरा के किसानों और कृषि क्षेत्र की विभिन्न समस्याओं पर गंभीर चर्चा होगी। इसके अलावा किसानों की मांगों और देश की मौजूदा परिस्थितियों से जुड़े मुद्दे भी एजेंडे में रहेंगे।

संगठन के मुताबिक किसानों के हितों की रक्षा के लिए आंदोलन को आगे किस तरह मजबूत किया जाए, इस पर भी सम्मेलन में रणनीति बनाई जाएगी। किसान सभा ने किसानों की आर्थिक समस्याओं को दूर करने के लिए प्रभावी कदम उठाने की जरूरत बताई है।

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किसान हित और संगठन मजबूत करने पर जोर

किसान सभा की प्रेस कॉन्फ्रेंस में कृषि क्षेत्र को देश की आर्थिक और समग्र प्रगति के लिए महत्वपूर्ण बताया गया। संगठन ने कृषि उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ किसानों की आय और रोजगार के अवसर बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया।

इसके अलावा मछली उत्पादन, दूध और डेयरी उत्पादों सहित विभिन्न कृषि उत्पादों के उत्पादन को बढ़ाने की बात भी कही गई। किसान सभा के नेताओं के अनुसार कृषि आधारित उद्योग और कारखानों के विकास से किसानों की आर्थिक स्थिति सुधारने तथा रोजगार के अवसर बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

Farmers Movement में आर्थिक संकट का मुद्दा

किसान सभा के नेताओं ने किसानों के आर्थिक संकट और कर्ज के दबाव को भी प्रमुख मुद्दा बताया। संगठन ने ऐसी किसान हितैषी नीतियों की जरूरत पर जोर दिया, जिससे किसानों को गंभीर आर्थिक परिस्थितियों का सामना न करना पड़े।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में अघोर देबबर्मा ने आरोप लगाया कि 2014 में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली बीजेपी सरकार के सत्ता में आने के बाद कृषि और किसानों को लेकर कई वादे किए गए, लेकिन किसानों की अनेक समस्याएं अब भी बनी हुई हैं।

यह बयान किसान सभा के नेताओं का राजनीतिक आरोप है। इसे संगठन के पक्ष के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

Farmers Movement को आगे बढ़ाने की रणनीति

राज्य सम्मेलन का एक प्रमुख उद्देश्य किसान संगठन को और मजबूत करना तथा आने वाले समय में किसानों से जुड़े आंदोलनों को प्रभावी बनाने की रणनीति पर चर्चा करना है।

संगठन का कहना है कि किसानों की सहायता, कृषि उत्पादन में वृद्धि और उनकी आय तथा रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए आगे और कदम उठाने की जरूरत है।

किसानों के व्यापक विकास के साथ कृषि क्षेत्र को मजबूत करना भी सम्मेलन में चर्चा का महत्वपूर्ण विषय रहेगा।

सम्मेलन में जुटेंगे किसान प्रतिनिधि

अखिल भारतीय किसान सभा के राज्य सम्मेलन को लेकर संगठन के विभिन्न स्तरों पर तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। त्रिपुरा के अलग-अलग हिस्सों से किसान संगठनों के प्रतिनिधियों के सम्मेलन में पहुंचने की उम्मीद है।

1 सितंबर की सार्वजनिक रैली इस तीन दिवसीय सम्मेलन की शुरुआत का प्रमुख कार्यक्रम होगी। इसके बाद 2 और 3 सितंबर को सम्मेलन के दौरान किसानों से जुड़े मुद्दों, संगठनात्मक मजबूती और आगे की रणनीति पर चर्चा जारी रहेगी।

Farmers Movement को मजबूत करने के उद्देश्य से अगरतला में होने वाला यह राज्य सम्मेलन और 1 सितंबर की सार्वजनिक रैली किसानों के मुद्दों को राजनीतिक और सामाजिक चर्चा के केंद्र में लाने की कोशिश है। किसान सभा ने कृषि समस्याओं, किसानों की आर्थिक स्थिति, आय-रोजगार और संगठन को मजबूत करने को प्रमुख मुद्दा बनाया है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि सम्मेलन के बाद किसान हितों को लेकर संगठन किस तरह की आगे की रणनीति घोषित करता है।

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