TCS (Tata Consultancy Services) के नासिक यूनिट में यौन उत्पीड़न और जबरन धर्म परिवर्तन के आरोपों ने पूरे देश को हिला दिया है। यह मामला तब सामने आया जब कई महिला कर्मचारियों ने अपने वरिष्ठ सहकर्मियों पर मानसिक और यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए।
पीड़ित महिलाओं ने यह भी आरोप लगाया कि HR विभाग ने उनकी शिकायतों को नजरअंदाज किया और कुछ मामलों में जबरन धर्म परिवर्तन की कोशिश भी की गई।
अब तक सात कर्मचारियों को गिरफ्तार किया जा चुका है — जिनमें छह पुरुष और एक महिला HR मैनेजर शामिल हैं।
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आरोपी के रिश्तेदार का चौंकाने वाला दावा — “सब कुछ स्क्रिप्टेड था”
Bajrang Dal पर षड्यंत्र का आरोप
TCS मामले में नया मोड़ तब आया जब एक आरोपी के चाचा ने मीडिया के सामने यह विस्फोटक दावा किया कि यह पूरा मामला एक “सुनियोजित षड्यंत्र” है।
आरोपी के रिश्तेदार ने कहा:
“सभी परिवार परेशान हैं। सब कुछ एक षड्यंत्र के तहत हो रहा है… इसमें Bajrang Dal शामिल है। लड़की के परिवार ने Bajrang Dal को बुलाया। एक व्यक्ति को जांच के बाद छोड़ा गया और फिर पुलिस ने उसे दोबारा गिरफ्तार कर लिया। जो कुछ भी हुआ वह स्क्रिप्टेड था।”
“छोटी बात को बड़ा बनाया गया”
आरोपी के रिश्तेदार ने यह भी कहा कि “मुख्य मुद्दों को नजरअंदाज कर एक छोटी सी बात को अनावश्यक रूप से हाइलाइट और अतिरंजित किया गया है।”
उनके अनुसार यह एक “झूठा मामला” है जिसमें बिना ठोस सबूत के आरोप लगाए जा रहे हैं।
हालांकि, पुलिस और जांच एजेंसियों ने अभी तक इन दावों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।
TCS कर्मचारियों पर क्या-क्या धाराएं लगाई गई हैं?
TCS कर्मचारियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की निम्नलिखित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है:
- धारा 74 — महिला की मर्यादा को ठेस पहुंचाना (Outraging the modesty of a woman)
- धारा 75 — यौन उत्पीड़न (Sexual Harassment)
- धारा 79 — महिला की मर्यादा का अपमान करने के इरादे से शब्द, इशारा, कार्य या वस्तु का उपयोग
इन धाराओं के तहत दर्ज मामले अत्यंत गंभीर प्रकृति के हैं और दोष सिद्ध होने पर आरोपियों को कठोर सजा का प्रावधान है।
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Nashik कोर्ट का फैसला — 18 अप्रैल तक पुलिस हिरासत
कोर्ट में पेशी और रिमांड
TCS मामले में दो आरोपियों को गुरुवार को Nashik कोर्ट में पेश किया गया, जहां कोर्ट ने उन्हें 18 अप्रैल तक पुलिस हिरासत में भेज दिया।
ये दोनों आरोपी बुधवार को दोबारा गिरफ्तार किए गए थे — इससे पहले वे एक संबंधित मामले में न्यायिक हिरासत में थे।
पुलिस का मानना है कि इन दोनों से पूछताछ के जरिए मामले की कई अहम परतें उजागर हो सकती हैं।
SIT जांच और पीड़ित महिलाओं की शिकायतें
8 महिलाओं की शिकायत पर SIT गठित
Nashik पुलिस ने TCS की आठ महिला कर्मचारियों की शिकायतों की जांच के लिए एक Special Investigation Team (SIT) का गठन किया है।
पीड़ित महिलाओं ने आरोप लगाया है कि:
- वरिष्ठ सहकर्मियों ने उनके साथ मानसिक और यौन उत्पीड़न किया।
- HR विभाग ने उनकी शिकायतों को सुनने से इनकार किया और उन्हें दबाया।
- कुछ मामलों में जबरन धर्म परिवर्तन की कोशिश की गई।
- धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाई गई।
कुल 9 मामले, 7 गिरफ्तारियां
TCS Nashik यूनिट में अब तक कुल 9 FIR दर्ज की गई हैं और 7 कर्मचारियों को गिरफ्तार किया जा चुका है — जिनमें 6 पुरुष कर्मचारी और 1 महिला HR मैनेजर शामिल हैं।
TCS प्रबंधन और Tata Sons का बयान
“जीरो टॉलरेंस” की नीति
TCS ने आधिकारिक बयान में कहा है कि कंपनी उत्पीड़न के मामलों में “जीरो टॉलरेंस” की नीति अपनाती है।
जिन कर्मचारियों पर आरोप लगे हैं, उन्हें कंपनी द्वारा निलंबित कर दिया गया है।
Tata Sons चेयरमैन का बयान
Tata Sons के चेयरमैन N. Chandrasekaran ने इस मामले को “गंभीर और पीड़ाजनक” बताया है।
उन्होंने कहा कि COO Arathi Subramanian की निगरानी में एक विस्तृत आंतरिक जांच चल रही है।
यह बयान TCS की वरिष्ठ नेतृत्व की मामले पर गंभीरता को दर्शाता है।
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राष्ट्रीय महिला आयोग का हस्तक्षेप
TCS Nashik मामले की गंभीरता को देखते हुए राष्ट्रीय महिला आयोग (National Commission for Women) ने भी सक्रिय भूमिका निभाई है।
आयोग ने इस मामले की जांच के लिए एक तथ्य-अन्वेषण समिति (Fact-Finding Committee) का गठन किया है।
यह समिति पीड़ित महिलाओं की शिकायतों की स्वतंत्र जांच करेगी और अपनी रिपोर्ट आयोग को सौंपेगी।
इससे स्पष्ट है कि यह मामला अब केवल एक कंपनी का आंतरिक मामला नहीं रहा, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर महिला सुरक्षा का मुद्दा बन गया है।
पीड़िताओं की पहचान उजागर करना अपराध — पुलिस की चेतावनी
मीडिया और सोशल मीडिया को चेतावनी
Nashik पुलिस ने TCS मामले में एक महत्वपूर्ण चेतावनी जारी की है।
पुलिस ने कहा कि कुछ मीडिया संस्थान और सोशल मीडिया अकाउंट कथित पीड़िताओं की पहचान उजागर कर सकते हैं — जो कि एक आपराधिक अपराध है।
पुलिस ने स्पष्ट किया कि ऐसे खुलासे पीड़िताओं को “अत्यधिक पीड़ा” पहुंचाते हैं और कानून का सख्त पालन करने की अपील की।
पीड़िता की पहचान सुरक्षित रखना कानूनी दायित्व
भारतीय कानून के अनुसार यौन उत्पीड़न की पीड़िता की पहचान किसी भी माध्यम से उजागर करना दंडनीय अपराध है।
TCS Nashik यूनिट का यह मामला देश के कॉर्पोरेट जगत में महिला सुरक्षा, HR जवाबदेही और कार्यस्थल पर धार्मिक उत्पीड़न जैसे गंभीर सवाल खड़े करता है।
एक तरफ जहां TCS प्रबंधन ने “जीरो टॉलरेंस” की बात कही है, वहीं आरोपी के रिश्तेदार षड्यंत्र का दावा कर रहे हैं।
SIT जांच, राष्ट्रीय महिला आयोग की समिति और कोर्ट की कार्यवाही — ये सब मिलकर इस मामले की सच्चाई सामने लाएंगे।
देश की नजरें अब Nashik कोर्ट और SIT की जांच पर टिकी हैं। TCS जैसी बड़ी कंपनी के लिए यह मामला न केवल कानूनी बल्कि नैतिक परीक्षा की घड़ी भी है।
