PEKB Green Restoration के तहत छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में स्थित पarsa East और Kanta Basan (PEKB) कोयला खदान क्षेत्र में बड़े पैमाने पर हरित विकास किया जा रहा है। इस परियोजना के अंतर्गत अब तक 16 लाख से अधिक पेड़ और पौधे लगाए जा चुके हैं, जिससे खनन के बाद भूमि को दोबारा हरित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है।
📢 Join 4thNation WhatsApp Channel: https://whatsapp.com/channel/0029VaOjosfFHWq7ssCngl1j
PEKB Green Restoration के तहत 568 हेक्टेयर क्षेत्र में हरियाली
सरगुजा जिले के PEKB कोयला खदान क्षेत्र में 568 हेक्टेयर भूमि पर व्यापक वृक्षारोपण किया गया है। इस खदान का संचालन राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड (RVUNL) के लिए डेवलपर और ऑपरेटर के रूप में किया जा रहा है।
कंपनी का लक्ष्य इस दशक के अंत तक 40 लाख से अधिक पेड़ लगाने का है, जिससे क्षेत्र की जैव विविधता को बढ़ावा मिले और खनन प्रभावित भूमि का पुनर्वास हो सके।
PEKB Green Restoration में हर कटे पेड़ के बदले लगाए जा रहे 40 पेड़
इस परियोजना की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि खनन के दौरान हटाए गए प्रत्येक पेड़ के बदले 40 नए पेड़ लगाए जा रहे हैं।
लगाए जा रहे हैं स्थानीय प्रजातियों के पौधे
परियोजना के तहत साल, महुआ, तेंदू, अमलतास और सिधा जैसी स्थानीय प्रजातियों का रोपण किया गया है। कंपनी के अनुसार इन पौधों की जीवित रहने की दर लगभग 88 प्रतिशत है, जो इस अभियान की सफलता को दर्शाती है।
यह भी पढ़ें: CG PPT 2026 Counselling: डिप्लोमा एडमिशन के लिए बड़ी अपडेट
PEKB Green Restoration को केंद्र सरकार ने बताया अनुकरणीय मॉडल
केंद्रीय कोयला मंत्रालय ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया पोस्ट में PEKB परियोजना को पर्यावरण संरक्षण और जिम्मेदार खनन का उत्कृष्ट उदाहरण बताया है।
मंत्रालय के अनुसार, कोयला खनन के बाद भूमि का पुनर्स्थापन केवल पर्यावरणीय दायित्व नहीं बल्कि एक टिकाऊ भविष्य की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। PEKB खदान आज इस बात का प्रमाण बन रही है कि खनन और पर्यावरण संरक्षण साथ-साथ चल सकते हैं।
3.5 हेक्टेयर की नर्सरी और लाखों पौधों की तैयारी
परियोजना के अंतर्गत लगभग 3.5 हेक्टेयर में एक विशाल नर्सरी विकसित की गई है, जहां करीब 5 लाख पौधे तैयार किए जा रहे हैं। इसके साथ ही क्षेत्र में साल वन के प्राकृतिक पुनर्जनन का भी सफल प्रयास किया गया है।
4 हजार हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में प्रतिपूरक वनीकरण
जानकारी के अनुसार सरगुजा, कोरिया, बलरामपुर और सूरजपुर वन मंडलों में 4 हजार हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में प्रतिपूरक वनीकरण किया गया है।
इसके अलावा छत्तीसगढ़ सरकार के पास वनीकरण, वन्यजीव संरक्षण और अन्य पर्यावरणीय उपायों के लिए 259 करोड़ रुपये से अधिक की राशि जमा कराई गई है।
स्थानीय समुदायों को भी मिल रहा लाभ
पर्यावरणीय पुनर्वास के साथ-साथ क्षेत्र में शिक्षा, स्वास्थ्य और आजीविका से जुड़े कार्यक्रम भी संचालित किए जा रहे हैं। स्थानीय लोगों के लिए विभिन्न सामाजिक विकास योजनाओं पर काम किया जा रहा है।
अधिकारियों के अनुसार परियोजना सभी वन एवं पर्यावरणीय स्वीकृतियों का पालन करती है और नियमित रूप से राज्य एवं केंद्र सरकार को निगरानी रिपोर्ट भी प्रस्तुत की जाती है।
📢 Join 4thNation WhatsApp Channel: https://whatsapp.com/channel/0029VaOjosfFHWq7ssCngl1j
PEKB Green Restoration छत्तीसगढ़ में खनन के बाद पर्यावरण संरक्षण का एक बड़ा उदाहरण बनकर उभर रहा है। 16 लाख से अधिक पेड़ों का रोपण, स्थानीय प्रजातियों का संरक्षण, 40:1 वृक्षारोपण नीति और सामुदायिक विकास कार्यक्रम इस परियोजना को विशेष बनाते हैं। यदि आने वाले वर्षों में 40 लाख पेड़ों का लक्ष्य पूरा होता है, तो यह देश में खनन क्षेत्र के पुनर्वास का एक मॉडल बन सकता है।
