IMPCL Disinvestment: ₹121 करोड़ में सरकारी आयुर्वेदिक कंपनी की बिक्री को मंजूरी

IMPCL Disinvestment को केंद्र सरकार ने अंतिम मंजूरी दे दी है। आयुष मंत्रालय के अधीन संचालित सरकारी कंपनी Indian Medicines Pharmaceutical Corporation Limited (IMPCL) को निजी क्षेत्र की कंपनी Skymap Pharmaceuticals Private Limited ₹121.01 करोड़ में खरीदेगी। इस सौदे के साथ कंपनी की 100% इक्विटी हिस्सेदारी और प्रबंधन नियंत्रण भी निजी कंपनी को हस्तांतरित किया जाएगा।

यह फैसला केवल एक सरकारी कंपनी की बिक्री तक सीमित नहीं है, बल्कि उत्तराखंड की आयुर्वेदिक विरासत, स्थानीय रोजगार और सार्वजनिक संपत्तियों से जुड़े बड़े सवाल भी खड़े कर रहा है।


IMPCL Disinvestment क्या है?

IMPCL Disinvestment के तहत केंद्र सरकार ने अपनी पूरी हिस्सेदारी बेचने का निर्णय लिया है। यह रणनीतिक विनिवेश (Strategic Disinvestment) प्रक्रिया कई वर्षों से चल रही थी।

मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति (CCEA) ने नवंबर 2017 में IMPCL की संपूर्ण हिस्सेदारी को रणनीतिक खरीदार को बेचने की सैद्धांतिक मंजूरी दी थी। इसके बाद चरणबद्ध तरीके से बोली प्रक्रिया शुरू की गई।

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स्काईमैप फार्मास्युटिकल्स ने जीती बोली

सरकार द्वारा जारी जानकारी के अनुसार Skymap Pharmaceuticals Private Limited सबसे ऊंची बोली लगाने वाली कंपनी के रूप में उभरी।

बोली प्रक्रिया में वित्त मंत्रालय के निवेश एवं लोक परिसंपत्ति प्रबंधन विभाग (DIPAM) और आयुष मंत्रालय की निगरानी में प्रतिस्पर्धी प्रक्रिया अपनाई गई।

कंपनी की अंतिम बोली:

  • ₹121,00,94,400 (121.01 करोड़ रुपये)
  • 100% इक्विटी हिस्सेदारी का अधिग्रहण
  • प्रबंधन नियंत्रण का हस्तांतरण

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₹121 करोड़ में हुई 100% हिस्सेदारी की बिक्री

सरकार ने बताया कि यह सौदा दो-स्तरीय खुली प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया के माध्यम से पूरा किया गया।

मुख्य तथ्य:

  • 1 सितंबर 2023 को Expression of Interest (EOI) जारी किया गया।
  • 7 कंपनियों ने रुचि दिखाई।
  • सभी पात्र कंपनियों को शॉर्टलिस्ट किया गया।
  • गृह मंत्रालय से सुरक्षा मंजूरी प्राप्त की गई।
  • 1 दिसंबर 2025 को Request for Proposal (RFP) जारी हुआ।
  • 20 जनवरी 2026 तक दो वित्तीय बोलियां प्राप्त हुईं।
  • दोनों तकनीकी रूप से योग्य पाई गईं।
  • Skymap Pharmaceuticals सबसे ऊंची बोलीदाता रही।

सरकार ने सफल बोलीदाता को Letter of Award भी जारी कर दिया है।


IMPCL का इतिहास और महत्व

IMPCL Disinvestment से पहले कंपनी की पहचान

Indian Medicines Pharmaceutical Corporation Limited (IMPCL) की स्थापना 12 जुलाई 1978 को हुई थी।

कंपनी का मुख्य उद्देश्य था:

  • मानकीकृत आयुर्वेदिक दवाओं का निर्माण
  • यूनानी दवाओं का उत्पादन
  • सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं के लिए दवाओं की आपूर्ति

यह कंपनी लंबे समय तक आयुष मंत्रालय के अधीन कार्यरत रही और एक समय पर लाभ कमाने वाली मिनी रत्न (Mini Ratna) कंपनी के रूप में भी जानी जाती थी।

उत्तराखंड स्थित इसका संयंत्र राज्य की पारंपरिक औषधीय विरासत से भी जुड़ा माना जाता है।


IMPCL Disinvestment पर क्यों हो रहा विरोध?

IMPCL Disinvestment को लेकर उत्तराखंड में व्यापक विरोध देखने को मिल रहा है।

विरोध के प्रमुख कारण:

1. रोजगार पर खतरे की आशंका

स्थानीय कर्मचारियों और संगठनों का कहना है कि निजीकरण के बाद सैकड़ों कर्मचारियों के रोजगार पर असर पड़ सकता है।

2. आयुर्वेदिक विरासत का सवाल

आलोचकों का मानना है कि कंपनी केवल एक व्यावसायिक इकाई नहीं है बल्कि उत्तराखंड की पारंपरिक औषधीय पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

3. कम कीमत पर बिक्री के आरोप

कई सामाजिक संगठनों और विपक्षी समूहों ने दावा किया है कि ₹121 करोड़ की कीमत कंपनी की वास्तविक क्षमता और संपत्तियों की तुलना में कम हो सकती है।

आलोचकों का कहना है कि हाल के वर्षों में कंपनी की लाभप्रदता को देखते हुए यह सौदा “डिस्ट्रेस प्राइस” जैसा प्रतीत होता है।

हालांकि सरकार का कहना है कि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी रही है तथा सर्वोच्च बोली को मंजूरी दी गई है।


कर्मचारियों और उत्तराखंड में बढ़ी चिंता

कर्मचारी संगठनों ने इस निर्णय पर चिंता व्यक्त की है।

उनका मानना है कि:

  • स्थानीय रोजगार प्रभावित हो सकते हैं।
  • भविष्य में उत्पादन संरचना बदल सकती है।
  • पारंपरिक आयुर्वेदिक उत्पादन मॉडल पर असर पड़ सकता है।

उत्तराखंड के कई सामाजिक संगठनों ने भी इस निर्णय की समीक्षा की मांग की है।


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IMPCL Disinvestment प्रक्रिया कैसे पूरी हुई?

बहु-स्तरीय निर्णय प्रक्रिया

सरकार के अनुसार इस सौदे में कई संस्थाओं की भूमिका रही:

  • DIPAM
  • आयुष मंत्रालय
  • अंतर-मंत्रालयी समूह (IMG)
  • Core Group of Secretaries on Disinvestment
  • Alternative Mechanism (मंत्रियों का समूह)

इन सभी स्तरों पर समीक्षा के बाद अंतिम मंजूरी प्रदान की गई।

आगे क्या होगा?

अब सरकार की ओर से DIPAM और आयुष मंत्रालय के सचिवों को लेनदेन को जल्द से जल्द पूरा करने की अनुमति दी गई है।

प्रबंधन हस्तांतरण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद Skymap Pharmaceuticals कंपनी का संचालन संभालेगी।


IMPCL Disinvestment के प्रमुख तथ्य

विवरणजानकारी
कंपनीIndian Medicines Pharmaceutical Corporation Limited (IMPCL)
स्थापना12 जुलाई 1978
मंत्रालयआयुष मंत्रालय
खरीदारSkymap Pharmaceuticals Pvt. Ltd.
बिक्री मूल्य₹121.01 करोड़
हिस्सेदारी100%
प्रबंधन नियंत्रणहस्तांतरित होगा
मंजूरीAlternative Mechanism द्वारा

IMPCL Disinvestment भारत के सार्वजनिक क्षेत्र में होने वाले महत्वपूर्ण रणनीतिक विनिवेशों में से एक माना जा रहा है। जहां केंद्र सरकार इसे पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी प्रक्रिया का परिणाम बता रही है, वहीं उत्तराखंड में कर्मचारियों, सामाजिक संगठनों और स्थानीय लोगों के बीच रोजगार और आयुर्वेदिक विरासत को लेकर चिंता बनी हुई है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि IMPCL Disinvestment के बाद कंपनी का संचालन, कर्मचारियों की स्थिति और आयुर्वेदिक उत्पादन व्यवस्था किस दिशा में आगे बढ़ती है।

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