Delhi Hotel Fire Case में हर दिन नए और चौंकाने वाले खुलासे सामने आ रहे हैं। नई दिल्ली के मालवीय नगर स्थित फ्लोरिश स्टे (Flourish Stay) बेड एंड ब्रेकफास्ट में लगी भीषण आग में 21 लोगों की मौत के बाद पुलिस जांच तेज हो गई है। इस बीच होटल मालिक लवकेश बजाज की गिरफ्तारी के बाद कई गंभीर तथ्य सामने आए हैं।
पुलिस पूछताछ में होटल मालिक ने स्वीकार किया कि आग लगने के दौरान वह मौके पर पहुंचा था, लेकिन लोगों की मदद करने के बजाय डर के कारण वहां से चला गया।
Delhi Hotel Fire Case में होटल मालिक की गिरफ्तारी
दिल्ली पुलिस ने फ्लोरिश स्टे BnB के मालिक लवकेश बजाज को आग की घटना के कुछ घंटों बाद गिरफ्तार कर लिया।
पूछताछ के दौरान बजाज ने बताया कि उसने वर्ष 2022 में यह भवन अहलूवालिया नामक व्यक्ति से खरीदा था। इससे पहले इस इमारत में खादी स्टोर संचालित होता था।
उसने यह भी माना कि भवन पहले से ही काफी जर्जर स्थिति में था, इसके बावजूद वहां होटल-कम-गेस्ट हाउस का संचालन किया जा रहा था।
आग लगने के दौरान क्यों भाग गया मालिक?
जांच में सबसे बड़ा खुलासा यह हुआ कि आग लगने के समय लवकेश बजाज घटनास्थल के पास से गुजरा था।
उसने पुलिस को बताया कि इमारत को जलता हुआ देखकर वह घबरा गया और बिना रुके वहां से निकल गया।
जब होटल के अंदर फंसे लोग जान बचाने के लिए संघर्ष कर रहे थे, तब होटल मालिक मदद करने के बजाय शहर में इधर-उधर घूमता रहा।
इस खुलासे के बाद घटना को लेकर लोगों में भारी नाराजगी है।
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BnB लाइसेंस में बड़ा नियम उल्लंघन
Delhi Hotel Fire Case की जांच में लाइसेंस संबंधी गंभीर अनियमितताएं भी सामने आई हैं।
लवकेश बजाज ने स्वीकार किया कि उसने केवल BnB (Bed and Breakfast) योजना के तहत लाइसेंस लिया था।
इस योजना के अनुसार:
- किसी संपत्ति में अधिकतम 6 डबल बेड कमरे ही संचालित किए जा सकते हैं।
- मालिक का परिसर में रहना अनिवार्य होता है।
- भवन का उपयोग मुख्य रूप से आवासीय होना चाहिए।
- अग्नि सुरक्षा और बुनियादी सुरक्षा मानकों का पालन आवश्यक होता है।
लेकिन जांच में सामने आया कि होटल में कथित रूप से 25 कमरे संचालित किए जा रहे थे, जिनमें कुछ कमरे बेसमेंट में भी बनाए गए थे।
Delhi Hotel Fire Case में सामने आई सुरक्षा चूक
प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में कई गंभीर सुरक्षा खामियां उजागर हुई हैं।
केवल एक प्रवेश और निकास मार्ग
पुलिस के अनुसार भवन में केवल एक ही एंट्री और एग्जिट पॉइंट था।
आग लगने के बाद लोगों के लिए बाहर निकलना बेहद मुश्किल हो गया।
खिड़कियां थीं पूरी तरह सील
जांच में पाया गया कि भवन की कई खिड़कियां बंद और सील थीं।
ऐसी स्थिति में धुआं तेजी से कमरों में भर गया और लोगों के पास बचने का विकल्प सीमित हो गया।
सेंसर आधारित मुख्य दरवाजा
मुख्य प्रवेश द्वार सेंसर आधारित था।
पुलिस यह जांच कर रही है कि आग के दौरान इस व्यवस्था ने लोगों के बाहर निकलने में कोई बाधा तो उत्पन्न नहीं की।
21 मौतों में 12 विदेशी नागरिक शामिल
इस दर्दनाक हादसे में कुल 21 लोगों की मौत हुई।
मृतकों में 12 विदेशी नागरिकों की पहचान की जा चुकी है।
आग बुधवार सुबह लगभग 8:30 बजे बेसमेंट में शुरू हुई और तेजी से ऊपरी मंजिलों तक फैल गई।
उस समय अधिकांश मेहमान सो रहे थे या नाश्ता कर रहे थे।
दमकल विभाग ने आग पर काबू पाने के लिए 17 फायर टेंडर तैनात किए।
करीब 58 लोगों को सुरक्षित निकालकर आसपास के अस्पतालों में भर्ती कराया गया।
एक परिवार के 8 सदस्यों की मौत
Delhi Hotel Fire Case का सबसे दुखद पहलू गुरुग्राम के एक परिवार की मौत है।
चार्टर्ड अकाउंटेंट विवेक अग्रवाल अपने 80 वर्षीय पिता राधेश्याम अग्रवाल से मिलने दिल्ली आए थे, जो अस्पताल में उपचाराधीन हैं।
उनके साथ उनकी पत्नी, दो बेटियां और चार अन्य रिश्तेदार भी थे।
सभी ने फ्लोरिश स्टे में दो कमरे बुक किए थे।
हादसे के समय वे नाश्ता कर रहे थे, तभी आग फैल गई।
इस त्रासदी में परिवार के आठ सदस्यों की मौत हो गई। परिवार में केवल अस्पताल में भर्ती राधेश्याम अग्रवाल ही जीवित बचे हैं।
पुलिस जांच और मैनेजर की तलाश
होटल मालिक ने पूछताछ में बताया कि होटल का दैनिक संचालन जय मिश्रा नामक व्यक्ति संभाल रहा था।
उसने दावा किया कि होटल से जुड़े लाइसेंस भी जय मिश्रा के नाम पर जारी किए गए थे।
दिल्ली पुलिस अब जय मिश्रा की तलाश कर रही है और मामले में उसकी भूमिका की जांच कर रही है।
पुलिस आज अदालत में लवकेश बजाज को पेश कर रिमांड की मांग कर सकती है ताकि मामले की गहन जांच की जा सके।
Delhi Hotel Fire Case से उठे बड़े सवाल
यह हादसा एक बार फिर देशभर में होटलों और गेस्ट हाउसों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अग्नि सुरक्षा मानकों का सही तरीके से पालन किया गया होता, पर्याप्त निकास मार्ग होते और भवन नियमों का उल्लंघन नहीं किया गया होता, तो कई जानें बचाई जा सकती थीं।
Delhi Hotel Fire Case केवल एक आग की घटना नहीं बल्कि सुरक्षा नियमों की अनदेखी और कथित लापरवाही का बड़ा उदाहरण बनकर सामने आया है। 21 लोगों की मौत, 12 विदेशी नागरिकों का जान गंवाना और एक परिवार के 8 सदस्यों की मृत्यु ने पूरे देश को झकझोर दिया है। अब सभी की नजर पुलिस जांच और अदालत की कार्रवाई पर है, जिससे इस दर्दनाक हादसे के लिए जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय हो सके।
