GST Fake Billing Scam के खिलाफ छत्तीसगढ़ राज्य कर विभाग (स्टेट जीएसटी) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए राजनांदगांव स्थित मैसर्स आदेश्वर ट्रेड लिंक के संचालक आदेश्वर चौरड़िया को गिरफ्तार किया है। विभागीय जांच में करोड़ों रुपये के कथित फर्जी लेन-देन और बोगस इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) के इस्तेमाल का मामला सामने आया है।
राज्य सरकार द्वारा कर चोरी और फर्जी बिलिंग के विरुद्ध चलाए जा रहे अभियान के तहत यह कार्रवाई की गई है। अधिकारियों के अनुसार प्रारंभिक जांच में कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं, जिनसे बड़े स्तर पर राजस्व नुकसान की आशंका जताई जा रही है।
GST Fake Billing Scam क्या है?
जीएसटी व्यवस्था में कुछ कारोबारी फर्जी खरीद-बिक्री के दस्तावेज तैयार कर इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का गलत लाभ लेते हैं। इसे आमतौर पर GST Fake Billing Scam कहा जाता है।
ऐसे मामलों में वास्तविक माल की खरीद या परिवहन नहीं होता, लेकिन कागजों में कारोबार दिखाकर टैक्स लाभ प्राप्त किया जाता है। इससे सरकार को भारी राजस्व हानि होती है और ईमानदार करदाताओं पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
राजनांदगांव में 76 करोड़ के लेन-देन का खुलासा
राज्य कर विभाग की जांच में सामने आया कि मैसर्स आदेश्वर ट्रेड लिंक ने पिछले लगभग छह महीनों के दौरान करीब 76 करोड़ रुपये के कारोबार को कागजों में दर्शाया था।
विभाग ने जीएसटी रिटर्न, व्यापारिक अभिलेखों और अन्य वित्तीय दस्तावेजों का विस्तृत विश्लेषण किया। जांच के दौरान कई लेन-देन संदिग्ध पाए गए, जिसके बाद मामले की गहन जांच शुरू की गई।
अधिकारियों का कहना है कि उपलब्ध दस्तावेजों से यह संकेत मिलता है कि बड़ी मात्रा में व्यापार केवल कागजी रिकॉर्ड तक सीमित था।
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GST Fake Billing Scam में 8.22 करोड़ की संदिग्ध ITC
जांच के दौरान लगभग 8.22 करोड़ रुपये की इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) संदिग्ध पाई गई।
विभाग के अनुसार इस ITC का उपयोग शासन को राजस्व हानि पहुंचाने के उद्देश्य से किया गया हो सकता है। प्रारंभिक तथ्यों के आधार पर यह भी पाया गया कि फर्म ने पश्चिम बंगाल स्थित कुछ संदिग्ध संस्थाओं से आयरन एवं स्टील की खरीद दर्शाई थी।
हालांकि जांच में वास्तविक व्यापार के पर्याप्त प्रमाण उपलब्ध नहीं हुए। इसी कारण संबंधित लेन-देन को संदेह के दायरे में रखा गया है।
GST Fake Billing Scam में फर्जी फर्मों की भूमिका
जांच में सामने आया कि जिन आपूर्तिकर्ता फर्मों से खरीद दिखाई गई थी, उनमें से अधिकांश के जीएसटी पंजीयन पहले ही निरस्त किए जा चुके थे।
विभागीय अधिकारियों के मुताबिक इन फर्मों द्वारा वास्तविक व्यापार किए जाने के विश्वसनीय साक्ष्य नहीं मिले। कई संस्थाओं को केवल फर्जी बिल जारी करने और अवैध ITC उपलब्ध कराने के उद्देश्य से संचालित किए जाने की आशंका है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार का नेटवर्क कई राज्यों में फैला हो सकता है, जहां पेपर ट्रेडिंग के माध्यम से कर लाभ प्राप्त किया जाता है।
GST Fake Billing Scam और पेपर ट्रेडिंग नेटवर्क
पेपर ट्रेडिंग का अर्थ है कि बिना वास्तविक माल की खरीद-बिक्री किए केवल कागजी बिलों के आधार पर कारोबार दिखाया जाए।
विभाग का मानना है कि इस मामले में भी माल का वास्तविक आवागमन नहीं हुआ और केवल दस्तावेजी लेन-देन के माध्यम से कर लाभ लेने की कोशिश की गई।
ई-वे बिल, परिवहन रिकॉर्ड और बैंकिंग लेन-देन की जांच से कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आने की संभावना है।
विभाग की कार्रवाई और गिरफ्तारी
पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद राज्य कर विभाग ने आदेश्वर चौरड़िया को गिरफ्तार कर लिया है।
अधिकारियों के अनुसार गिरफ्तारी के बाद मामले की विस्तृत जांच जारी है। जांच एजेंसियां बैंक खातों, ई-वे बिलों, परिवहन दस्तावेजों और संबंधित फर्मों के नेटवर्क की गहन पड़ताल कर रही हैं।
विभाग का कहना है कि यदि अन्य व्यक्तियों या कंपनियों की संलिप्तता सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
आगे की जांच में क्या सामने आ सकता है?
राज्य कर विभाग को आशंका है कि जांच के दौरान और भी महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं।
प्रारंभिक जांच में कई अन्य व्यक्तियों और फर्मों के इस नेटवर्क से जुड़े होने के संकेत मिले हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में कार्रवाई का दायरा बढ़ सकता है।
विभाग ने स्पष्ट किया है कि कर चोरी, फर्जी बिलिंग और बोगस ITC जैसे मामलों में किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
ईमानदार करदाताओं के हितों की सुरक्षा पर जोर
राज्य कर विभाग का कहना है कि उसका उद्देश्य केवल कार्रवाई करना नहीं बल्कि ईमानदार करदाताओं के हितों की रक्षा करना भी है।
फर्जी बिलिंग और कर चोरी के मामलों पर सख्ती से नियंत्रण स्थापित कर पारदर्शी कर व्यवस्था को मजबूत बनाने का प्रयास किया जा रहा है। इससे राजस्व संग्रह बढ़ेगा और विकास कार्यों के लिए अधिक संसाधन उपलब्ध होंगे।
GST Fake Billing Scam के इस मामले ने एक बार फिर फर्जी बिलिंग और बोगस ITC नेटवर्क की गंभीरता को उजागर किया है। राजनांदगांव में 76 करोड़ रुपये के कथित फर्जी कारोबार और 8.22 करोड़ रुपये की संदिग्ध ITC की जांच राज्य कर विभाग के लिए बड़ी सफलता मानी जा रही है। यदि जांच में और तथ्य सामने आते हैं तो यह GST Fake Billing Scam प्रदेश के सबसे बड़े कर चोरी मामलों में से एक साबित हो सकता है। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि फर्जी बिलिंग और कर चोरी के खिलाफ कार्रवाई आगे भी लगातार जारी रहेगी।
