नई दिल्ली। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से इस बार के बजट 2025 में आम जनता को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। खासतौर पर, सालाना 15 लाख रुपये तक की आय वाले मध्यम वर्गीय करदाताओं के लिए आयकर दरों में कटौती की मांग तेज हो गई है। यह कदम उपभोक्ता मांग को बढ़ाने और आर्थिक सुस्ती को दूर करने के उद्देश्य से उठाया जा सकता है।
मध्यम वर्ग की प्रमुख मांगें:
मध्यम वर्ग, लंबे समय से बढ़ते कर बोझ से परेशान है। महंगाई के कारण उनकी क्रय शक्ति घट गई है और वेतन वृद्धि महंगाई दर के साथ तालमेल नहीं बैठा पा रही है। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों दोनों में कमजोर उपभोक्ता मांग के कारण आर्थिक गतिविधियों में गिरावट देखी गई है।

आर्थिक विशेषज्ञों की राय:
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) और कई अर्थशास्त्रियों ने चेतावनी दी है कि यदि महंगाई पर नियंत्रण नहीं पाया गया तो यह भारत की आर्थिक वृद्धि को कमजोर कर सकती है। ऐसे में आयकर में कटौती से मध्यम वर्ग को न केवल राहत मिलेगी बल्कि उपभोग में वृद्धि से आर्थिक विकास को भी गति मिलेगी।
बजट के लिए वित्त मंत्री की चुनौती:
सरकार को इस बार के बजट में आर्थिक विकास और वित्तीय अनुशासन के बीच संतुलन बनाना होगा। आयकर में कटौती का निर्णय राजस्व संग्रह पर असर डाल सकता है, लेकिन इससे मध्यम वर्ग और उपभोक्ता विश्वास में सुधार आने की उम्मीद है।
महत्वपूर्ण घोषणाओं पर नजर:
बजट 2025 में क्या आयकर दरों में कटौती होगी? यह फैसला न केवल मध्यम वर्ग के लिए राहत लेकर आएगा, बल्कि सरकार की आर्थिक नीतियों की दिशा भी तय करेगा।
