रायपुर। Bastar Surguja Olympic के आयोजन से पहले छत्तीसगढ़ के खेल एवं युवा कल्याण विभाग की खेल सामग्री खरीदी विवादों में घिर गई है। बस्तर और सरगुजा क्षेत्र के खिलाड़ियों के लिए करीब 2.90 करोड़ रुपये की खेल सामग्री खरीदने के मामले में कीमतों, टेंडर प्रक्रिया और सप्लाई की समयसीमा को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। इस संबंध में 3 नवंबर 2026 को मुख्यमंत्री को लिखित शिकायत भेजे जाने की जानकारी सामने आई है।
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि दूसरे राज्यों में उपलब्ध दरों की तुलना में छत्तीसगढ़ में कई खेल सामग्रियां काफी अधिक कीमत पर खरीदी गईं। इसके अलावा क्रय आदेश जारी होने के महज सात दिनों के भीतर सामग्री की आपूर्ति, सत्यापन और भुगतान की प्रक्रिया शुरू होने पर भी सवाल उठाए गए हैं।
यह फिलहाल शिकायत में लगाए गए आरोप हैं। इनकी स्वतंत्र जांच और संबंधित विभाग का आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद ही अनियमितताओं की पुष्टि हो सकेगी।
Bastar Surguja Olympic: 2.89 करोड़ रुपये का क्रय आदेश
शिकायत के मुताबिक, खेल एवं युवा कल्याण विभाग ने 10 सितंबर 2026 को गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (GeM) पोर्टल पर खेल सामग्री की खरीदी के लिए टेंडर आमंत्रित किए थे।
इसके बाद 21 अक्टूबर 2026 की रात 10:30 बजे रायपुर की फर्म नेशनल प्रोडक्ट मार्ट को 2 करोड़ 89 लाख 74 हजार 940 रुपये का क्रय आदेश जारी किया गया।
शिकायतकर्ता ने टेंडर प्रक्रिया में प्रतिस्पर्धा, उत्पादों के चयन और कीमतों के निर्धारण को लेकर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि अलग-अलग राज्यों में उपलब्ध बाजार दरों की तुलना में खरीदी गई सामग्री की कीमत काफी अधिक दिखाई देती है।
ट्रैक सूट और टी-शर्ट की कीमतों में अंतर का आरोप
शिकायत में अलग-अलग खेल सामग्रियों की दरों की तुलना प्रस्तुत की गई है। इसके अनुसार, छत्तीसगढ़ में एक ट्रैक सूट की कीमत 1,800 रुपये बताई गई है, जबकि आगरा में 1,100 रुपये, उत्तर प्रदेश में 1,200 रुपये और कांकेर में आदिवासी विकास विभाग की खरीदी में 1,000 रुपये प्रति नग की दर का उल्लेख किया गया है।
इसी तरह स्पोर्ट्स टी-शर्ट की खरीदी 490 रुपये प्रति नग की दर से होने का दावा किया गया है। शिकायत में दिल्ली में इसकी कीमत 200 रुपये और ओडिशा में 250 रुपये बताई गई है।
स्पोर्ट्स शॉर्ट्स को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। शिकायत के अनुसार, छत्तीसगढ़ में इसकी कीमत 485 रुपये बताई गई, जबकि दिल्ली में 200 रुपये की दर का उल्लेख किया गया है।
यूनिस्टार जूतों की खरीदी पर भी उठे सवाल
Bastar Surguja Olympic खेल किट खरीदी विवाद में सबसे अधिक सवाल स्पोर्ट्स फुटवियर की कीमत को लेकर उठाए गए हैं।
शिकायत के अनुसार, यूनिस्टार कंपनी के जूते 1,500 रुपये प्रति सेट की दर से खरीदे गए। वहीं, शिकायतकर्ता का दावा है कि Amazon, Flipkart और स्थानीय बाजार में इसी कंपनी के जूते लगभग 500 रुपये में उपलब्ध हैं।
हालांकि, बाजार में उपलब्ध उत्पादों की कीमत और सरकारी टेंडर में खरीदे गए उत्पादों की गुणवत्ता, मॉडल, स्पेसिफिकेशन तथा सप्लाई शर्तें समान हैं या नहीं, इसकी जांच जरूरी है।
शिकायत में ट्रैक सूट, टी-शर्ट, शॉर्ट्स और जूतों की तुलनात्मक दरों के आधार पर कुल 1 करोड़ 47 लाख 87 हजार 500 रुपये के अतिरिक्त वित्तीय बोझ का दावा किया गया है। यह राशि शिकायतकर्ता की गणना है, किसी आधिकारिक जांच में प्रमाणित नुकसान नहीं।
Bastar Surguja Olympic: सात दिन में सप्लाई और भुगतान पर सवाल
खरीदी प्रक्रिया में समयसीमा को लेकर भी शिकायतकर्ता ने गंभीर सवाल उठाए हैं। शिकायत में दिए गए विवरण के अनुसार, 21 अक्टूबर 2026 को क्रय आदेश जारी हुआ और 31 अक्टूबर 2026 को सामग्री का सत्यापन कर GeM पोर्टल पर CRAC अपडेट किया गया।
इसके बाद उसी दिन शाम 4 बजे भुगतान की प्रक्रिया शुरू होने का उल्लेख किया गया है।
शिकायतकर्ता का सवाल है कि इतनी बड़ी मात्रा में खेल सामग्री की आपूर्ति के साथ उसकी गुणवत्ता और अन्य औपचारिकताओं की जांच इतने कम समय में कैसे पूरी हुई?
टेंडर की शर्तों के अनुसार, शिकायतकर्ता ने निम्नलिखित प्रक्रियाओं को लेकर स्पष्टीकरण मांगा है:
- सामग्री के सैंपल की जांच।
- लोगो, सील और डिजाइन की मंजूरी।
- आवश्यक लैब टेस्ट और गुणवत्ता परीक्षण।
- सामग्री की संख्या और गुणवत्ता का भौतिक सत्यापन।
- आपूर्ति के बाद दस्तावेजों का परीक्षण और भुगतान की स्वीकृति।
इन सभी प्रक्रियाओं के वास्तविक रिकॉर्ड सामने आने पर ही समयसीमा को लेकर उठाए गए सवालों की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
टेंडर की शर्तों और उत्पाद चयन पर भी आपत्ति
शिकायत में यह आरोप भी लगाया गया है कि टेंडर में जूतों को Primary Product बनाया गया, जबकि ट्रैक सूट को प्राथमिक उत्पाद बनाया जाना चाहिए था।
इसके अलावा निविदा की समयसीमा दो बार बढ़ाए जाने पर भी सवाल उठाए गए हैं। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि समयसीमा बढ़ाने के स्पष्ट कारण सार्वजनिक नहीं किए गए।
इन आरोपों के बीच यह जानना महत्वपूर्ण होगा कि टेंडर में उत्पादों की प्राथमिकता किस आधार पर तय की गई थी और समयसीमा बढ़ाने के पीछे विभागीय कारण क्या थे।
मुख्यमंत्री से लेकर EOW-ACB तक जांच की मांग
इस मामले में शिकायतकर्ता ने केवल मुख्यमंत्री तक ही शिकायत सीमित नहीं रखी है। शिकायत की प्रतिलिपि प्रधानमंत्री, राज्यपाल, खेल मंत्री, मुख्य सचिव और आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW-ACB) को भी भेजे जाने की जानकारी दी गई है।
शिकायत में पूरे मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की गई है। साथ ही खरीदी प्रक्रिया में यदि कोई अनियमितता सामने आती है तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी की गई है।
अब इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि क्या विभाग खरीदी गई सामग्री की वास्तविक गुणवत्ता, बाजार दर, टेंडर की शर्तों और भुगतान से जुड़े दस्तावेजों की जांच कराएगा?
खेल मंत्री अरुण साव ने जांच कराने की बात कही
इस विवाद पर खेल एवं युवा कल्याण मंत्री अरुण साव की प्रतिक्रिया भी सामने आई है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, मंत्री ने कहा कि खरीदी GeM पोर्टल के माध्यम से की गई है, इसलिए गड़बड़ी की गुंजाइश कम है।
हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि मामले की जांच करवा ली जाएगी और यदि कोई गड़बड़ी पाई जाती है तो निश्चित रूप से कार्रवाई की जाएगी।
मंत्री के इस बयान के बाद अब विभागीय जांच और खरीदी से जुड़े दस्तावेजों की पारदर्शिता महत्वपूर्ण हो गई है।
Bastar Surguja Olympic खेल किट खरीदी की जांच पर टिकी नजरें
Bastar Surguja Olympic के लिए करीब 2.90 करोड़ रुपये की खेल सामग्री खरीदी का मामला अब कीमतों के अंतर, गुणवत्ता परीक्षण, टेंडर प्रक्रिया और भुगतान की समयसीमा को लेकर चर्चा में है। शिकायतकर्ता ने 1.47 करोड़ रुपये के अतिरिक्त वित्तीय बोझ का दावा करते हुए उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
हालांकि, अभी तक इन आरोपों को जांच में प्रमाणित अनियमितता नहीं माना जा सकता। खिलाड़ियों के हित और सरकारी धन की पारदर्शिता को देखते हुए जरूरी है कि विभाग सभी सवालों का दस्तावेजों के साथ जवाब दे। अब देखना होगा कि Bastar Surguja Olympic खेल किट खरीदी विवाद में जांच क्या निष्कर्ष सामने लाती है और जिम्मेदारी किसकी तय होती है।
