Social Boycott का एक मामला छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले से सामने आया है। परपोड़ी गांव में मानिकपुरी समाज के 9 परिवारों के करीब 55 लोगों ने पिछले 3-4 वर्षों से सामाजिक बहिष्कार किए जाने का आरोप लगाया है।
पीड़ित परिवारों के मुताबिक, उन्हें समाज के सामाजिक कार्यक्रमों, बैठकों और शादी समारोहों में नहीं बुलाया जाता। इतना ही नहीं, आरोप है कि उनकी बेटी के लिए रिश्ता लेकर आने वाले रिश्तेदारों को भी कथित तौर पर बाहर से वापस लौटा दिया जाता है।
मामले को लेकर निर्मल दास मानिकपुरी सहित पीड़ित परिवार ने बेमेतरा कलेक्टर से शिकायत की है। शिकायत के बाद कलेक्टर प्रतिष्ठा ममगाई ने तहसीलदार और परपोड़ी थाना प्रभारी को मामले की जांच के निर्देश दिए हैं।
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9 परिवारों के 55 लोगों के Social Boycott का दावा
शिकायतकर्ता निर्मल दास के अनुसार, उनके परिवार समेत 9 परिवारों के 55 लोगों को लंबे समय से समाज से अलग रखा जा रहा है। उनका आरोप है कि समाज के कुछ लोगों ने इन परिवारों के साथ सामाजिक संबंध रखने पर भी रोक लगाने की बात कही है।
परिवार का कहना है कि इस कथित बहिष्कार के कारण वे सामाजिक आयोजनों में शामिल नहीं हो पा रहे हैं। इससे परिवारों को सामाजिक स्तर पर अपमान और मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
Social Boycott की शुरुआत को लेकर क्या कहा गया?
पीड़ित परिवार के अनुसार, परपोड़ी क्षेत्र में वर्षों पहले मानिकपुरी समाज के दो गुटों के बीच विवाद हुआ था। समय के साथ इनमें से एक गुट प्रभावशाली होता गया, जबकि दूसरा गुट कमजोर पड़ता गया।
परिवार का दावा है कि मई 2023 में संभाग स्तरीय समाज की बैठक में उन्हें नहीं बुलाया गया था। उन्होंने इस पर समाज के लोगों के सामने आपत्ति जताई। आरोप है कि इसके बाद से उनके खिलाफ सामाजिक बहिष्कार की स्थिति बन गई।
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Social Boycott से बेटी की शादी की चिंता
पीड़ित परिवार की सरिता मानिकपुरी ने अपनी बेटी की शादी को लेकर चिंता जताई है। उनका कहना है कि बेटी अब विवाह योग्य है, लेकिन परिवार को उसके रिश्ते को लेकर परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
परिवार का आरोप है कि जब कोई व्यक्ति बेटी के लिए रिश्ता लेकर आता है तो उसे घर के बाहर से ही वापस लौटा दिया जाता है। साथ ही समाज के लोगों को भी परिवार से सामाजिक संबंध नहीं रखने के लिए कहा जाता है।
ऐसे आरोपों के कारण परिवार को बेटी की शादी को लेकर भविष्य की चिंता सता रही है।
सामाजिक कार्यक्रमों और शादी समारोहों से दूरी
निर्मल दास का आरोप है कि उनके परिवारों को समाज की बैठकों, सामाजिक कार्यक्रमों और शादी समारोहों से लगातार दूर रखा जा रहा है।
परिवार का कहना है कि किसी सामाजिक विवाद का समाधान बातचीत और उचित प्रक्रिया के जरिए होना चाहिए। बिना पूरी बात सुने किसी परिवार को सामाजिक रूप से अलग करना उनके लिए गंभीर परेशानी का कारण बन रहा है।
आर्थिक दंड लगाए जाने का भी आरोप
शिकायत में पुराने मामलों का भी उल्लेख किया गया है। परिवार की ओर से आरोप लगाया गया कि वर्ष 2010 में मुन्ना दास से 10 हजार रुपये और वर्ष 2003 में नरेश दास से 9 हजार रुपये आर्थिक दंड लिया गया था।
शिकायतकर्ता का कहना है कि परिवार के खिलाफ सार्वजनिक रूप से बातें किए जाने से उन्हें अपमान और मानसिक तनाव झेलना पड़ रहा है।
समाज अध्यक्ष ने बहिष्कार की बताई अलग वजह
परपोड़ी मानिकपुरी समाज के अध्यक्ष जगतारण मानिकपुरी ने आरोपों पर अपना पक्ष रखा है। उनका कहना है कि पीड़ित परिवार की ओर से समाज के पास अब तक कोई आवेदन नहीं आया है।
अध्यक्ष के मुताबिक, परिवार समाज के सामने मामला रखने के बजाय थाना और कलेक्टर के पास आवेदन दे रहा है। उन्होंने कहा कि साजा ब्लॉक में आवेदन दिया गया है, जबकि निर्णय परपोड़ी गांव में होना है।
उन्होंने कहा कि यदि परिवार समाज को आवेदन देता है तो बैठक बुलाकर उनकी बात उचित तरीके से सुनी जाएगी। इसके बाद मामले पर निर्णय लिया जाएगा। अध्यक्ष ने परिवार के बहिष्कार की वजह गाली-गलौज से जुड़े विवाद को बताया है।
कलेक्टर ने तहसीलदार और थाना प्रभारी को सौंपी जांच
मामले में प्रशासन ने जांच शुरू करने के निर्देश दिए हैं। कलेक्टर प्रतिष्ठा ममगाई ने बताया कि शिकायतकर्ता ने दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई, परिवारों को न्याय और सुरक्षा देने की मांग की है।
प्रशासन की जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि सामाजिक बहिष्कार के आरोपों की वास्तविक स्थिति क्या है और इसमें किन लोगों की भूमिका रही है।
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जांच के बाद साफ होगी पूरी तस्वीर
फिलहाल मामले में दोनों पक्षों के दावे सामने आए हैं। एक ओर पीड़ित परिवार लंबे समय से सामाजिक बहिष्कार और मानसिक तनाव का आरोप लगा रहा है, वहीं समाज अध्यक्ष ने अपनी ओर से अलग कारण बताते हुए बैठक के जरिए मामले के समाधान की बात कही है।
अब प्रशासनिक जांच की रिपोर्ट इस विवाद की वास्तविक स्थिति सामने लाने में महत्वपूर्ण होगी।
बेमेतरा के परपोड़ी गांव का यह Social Boycott मामला सामाजिक संबंधों, परिवार की गरिमा और बेटी की शादी जैसे संवेदनशील मुद्दों से जुड़ा है। 9 परिवारों के 55 लोगों द्वारा लगाए गए आरोपों के बाद कलेक्टर ने तहसीलदार और थाना प्रभारी को जांच सौंपी है। जांच पूरी होने के बाद ही आरोपों की पुष्टि और आगे की कानूनी कार्रवाई को लेकर स्थिति स्पष्ट होगी।
