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Nepal Flash Flood: 160 मौतें, सैकड़ों अब भी लापता

Nepal Flash Flood ने हिमालयी क्षेत्र में भारी तबाही मचा दी है। नेपाल और चीन के तिब्बत क्षेत्र की सीमा के पास आई अचानक बाढ़ और भूस्खलन में कम से कम 160 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि सैकड़ों लोग अब भी लापता हैं। नेपाल में 157 शव बरामद किए गए हैं और तिब्बत के ग्यिरोंग काउंटी में तीन मौतों की सूचना है। बचाव दल लगातार मलबे में फंसे लोगों की तलाश कर रहे हैं।

26 अगस्त की सुबह आई इस आपदा में पानी, चट्टान और कीचड़ का विशाल प्रवाह पहाड़ी घाटियों से नीचे आया। इसकी चपेट में घर, सड़कें, पुल, वाहन और कई महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे आ गए। कुछ इलाकों में पूरे गांवों और बाजारों के तबाह होने की खबर है।

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Nepal Flash Flood में 160 मौतें, सैकड़ों लापता

नेपाल पुलिस के अनुसार देश में अब तक 157 शव बरामद किए जा चुके हैं। वहीं चीन के तिब्बत क्षेत्र से तीन मौतों की पुष्टि हुई है। इस तरह दोनों तरफ मृतकों की संख्या कम से कम 160 हो गई है। हालांकि, अधिकारियों को आशंका है कि राहत और बचाव अभियान आगे बढ़ने के साथ मृतकों की संख्या बढ़ सकती है।

नेपाल में 400 से ज्यादा लोगों के लापता होने की जानकारी सामने आई है। इनमें स्थानीय लोगों के अलावा बड़ी संख्या में विदेशी पर्यटक और तीर्थयात्री शामिल हैं। नेपाल पुलिस के 28 अधिकारी भी लापता बताए गए हैं।

प्रभावित पर्वतीय इलाकों तक पहुंचना बचाव दलों के लिए बड़ी चुनौती है। कई सड़कें और पुल बाढ़ में बह गए हैं, जबकि कुछ स्थानों पर पानी का स्तर इतना अधिक है कि हेलीकॉप्टरों के उतरने में भी परेशानी हो रही है।

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विदेशी पर्यटकों और भारतीयों की चिंता

आपदा के बाद नेपाल के पर्यटन अधिकारियों ने बताया कि करीब 403 पर्यटक लापता बताए गए थे, जिनमें 341 विदेशी नागरिक थे। इनमें भारतीय नागरिकों की संख्या भी बड़ी है। रिपोर्टों में 142 भारतीयों के लापता होने की जानकारी दी गई थी।

इसके अलावा अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, दक्षिण कोरिया और अन्य देशों के नागरिक भी लापता लोगों में शामिल बताए गए हैं।

यह इलाका कैलाश मानसरोवर यात्रा और हिमालयी पर्यटन के लिए महत्वपूर्ण मार्गों के करीब है। इसी कारण आपदा के बाद विदेशी नागरिकों की सुरक्षा को लेकर कई देशों की सरकारें सक्रिय हो गई हैं।

तिब्बत में भी भारी तबाही

नेपाल के साथ चीन के तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र में भी इस आपदा का गंभीर असर हुआ है। चीन की सरकारी मीडिया के अनुसार, ग्यिरोंग काउंटी में एक बड़े मलबे के भूस्खलन ने सीमा क्षेत्र में स्थित ग्यिरोंग पोर्ट को प्रभावित किया।

चीनी अधिकारियों ने तीन लोगों की मौत और 265 लोगों के लापता होने की जानकारी दी है। सड़क, बिजली और संचार व्यवस्था भी प्रभावित हुई है। हालांकि, चीनी पक्ष के आंकड़ों की पुष्टि और विस्तृत आकलन अभी जारी है।

चीन ने करीब 800 आपातकालीन कर्मचारियों और 150 वाहनों को राहत कार्यों में लगाया है। बचाव अभियान में खोजी कुत्तों और नावों का भी इस्तेमाल किया जा रहा है।

चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने लापता लोगों की तलाश और बचाव को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए हैं।

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Nepal Flash Flood की वजह क्या थी?

शुरुआत में इस आपदा को लेकर भूकंप की आशंका जताई गई थी। अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण यानी USGS ने शुरुआत में क्षेत्र में 4.4 तीव्रता का भूकंपीय संकेत दर्ज किया था।

लेकिन बाद के विश्लेषण में तस्वीर बदल गई। USGS के अनुसार, शुरुआती तौर पर भूकंप समझी गई गतिविधि वास्तव में भूस्खलन से पैदा हुई भूकंपीय ऊर्जा हो सकती है। बाद के विश्लेषण ने संकेत दिया कि शक्तिशाली भूस्खलन फ्लैश फ्लड से पहले हुआ था।

नेपाल की आपदा एजेंसी के शुरुआती आकलन में भी सीमा क्षेत्र में बर्फ और चट्टानों के बड़े भूस्खलन की संभावना जताई गई थी। इससे नदी का प्रवाह बाधित हुआ और बाद में अचानक पानी तथा मलबे का भारी प्रवाह नीचे की ओर आया।

ग्लेशियर और भूस्खलन ने बढ़ाया खतरा

जलवायु विशेषज्ञों के अनुसार, ग्लेशियर से जुड़े बर्फ-चट्टान के बड़े ढहाव ने नदी को अस्थायी रूप से रोक दिया हो सकता है। जब पानी ने इस प्राकृतिक अवरोध को तोड़ा, तो अचानक तेज बहाव ने निचले क्षेत्रों को अपनी चपेट में ले लिया।

नेपाल में मानसून के दौरान बाढ़ और भूस्खलन का खतरा पहले से अधिक रहता है। विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ता तापमान और बदलते मौसम के पैटर्न हिमालयी क्षेत्र में चरम मौसम की घटनाओं का जोखिम बढ़ा सकते हैं।

दूसरे फ्लैश फ्लड का खतरा

बचाव अभियान के बीच विशेषज्ञों ने एक और खतरे की चेतावनी दी है। यदि ऊपरी क्षेत्र में भूस्खलन से नदी का प्रवाह दोबारा बाधित हुआ, तो वहां पानी जमा होकर दूसरी अचानक बाढ़ पैदा कर सकता है।

इसी कारण नदी किनारे रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी जा रही है। प्रशासन प्रभावित क्षेत्रों में स्थिति की निगरानी कर रहा है और जोखिम वाले इलाकों से लोगों को हटाने का प्रयास कर रहा है।

राहत और बचाव अभियान तेज

नेपाल सेना और पुलिस ने प्रभावित इलाकों में बचाव दल तैनात किए हैं। हेलीकॉप्टरों की मदद से लोगों को सुरक्षित निकालने और दूरदराज के क्षेत्रों तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी मदद की पेशकश की गई है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव António Guterres ने कहा है कि UN की टीमें और साझेदार नेपाल में प्रभावित समुदायों की सहायता के लिए आपूर्ति और कर्मियों को जुटा रहे हैं।

इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ रेड क्रॉस एंड रेड क्रिसेंट सोसाइटीज ने भी कंबल, प्राथमिक उपचार सामग्री, स्ट्रेचर और अन्य जरूरी सामान भेजने की प्रक्रिया शुरू की है।

Nepal Flash Flood से बिजली और परिवहन पर असर

आपदा ने केवल जनजीवन ही नहीं, बल्कि नेपाल के महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को भी नुकसान पहुंचाया है। सड़कें और पुल बहने से कई इलाकों का संपर्क टूट गया है।

नेपाल विद्युत प्राधिकरण के अनुसार, करीब 430 मेगावाट उत्पादन क्षमता से जुड़ी बिजली उत्पादन, ट्रांसमिशन और वितरण सुविधाएं प्रभावित हुई हैं। इससे कुछ क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति बाधित हुई है।

सीमा व्यापार और तीर्थयात्रा के महत्वपूर्ण मार्गों पर भी इसका असर पड़ा है। कई स्थानों पर सड़कें मलबे से ढक गई हैं और वाहन पानी तथा कीचड़ में फंस गए।

Nepal Flash Flood ने नेपाल और तिब्बत सीमा के हिमालयी क्षेत्र में बेहद भयावह मानवीय और भौतिक तबाही मचाई है। कम से कम 160 लोगों की मौत और सैकड़ों लोगों के लापता होने के बीच राहत एवं बचाव अभियान लगातार जारी है। शुरुआती भूकंप की आशंका के बाद वैज्ञानिक विश्लेषण में भूस्खलन और संभावित ग्लेशियल गतिविधि को आपदा का प्रमुख कारण माना जा रहा है। आने वाले दिनों में मलबे की तलाश, लापता लोगों की खोज और संभावित दूसरी बाढ़ के खतरे से निपटना प्रशासन की सबसे बड़ी चुनौती होगी।

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