Skip to main content

4thnation

Physiotherapy Distance Degree: छत्तीसगढ़ में घर बैठे हेल्थकेयर डिग्री का खेल उजागर

Physiotherapy Distance Degree के नाम पर छत्तीसगढ़ में कथित तौर पर ऐसा नेटवर्क संचालित होने का खुलासा हुआ है, जहां बिना नियमित कॉलेज जाए दूसरे राज्यों के विश्वविद्यालयों और संस्थानों से फिजियोथेरेपी, नर्सिंग, फार्मेसी, पैरामेडिकल और लैब टेक्नीशियन जैसे हेल्थकेयर कोर्स की डिग्री या डिप्लोमा दिलाने का दावा किया जा रहा है। एक मीडिया जांच में सामने आया कि प्रदेश में कई एजुकेशन सेंटर छात्रों को दूसरे राज्यों की यूनिवर्सिटी से प्रवेश दिलाने और केवल परीक्षा देने जाने की सुविधा बताकर लाखों रुपए तक की फीस लेने की बात कर रहे हैं।

यह मामला इसलिए भी गंभीर माना जा रहा है क्योंकि हेल्थकेयर शिक्षा सीधे मरीजों की सुरक्षा और गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण से जुड़ी होती है। जांच में सामने आए दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी बाकी है, इसलिए संबंधित संस्थानों की मान्यता और वैधता की जांच आधिकारिक रिकॉर्ड के आधार पर ही की जानी चाहिए।

यह भी पढ़ें: IGKV Paper Leak: तीसरे पेपर पर भी संकट

Physiotherapy Distance Degree का पूरा मामला क्या है?

छत्तीसगढ़ में फिजियोथेरेपिस्ट की बढ़ती मांग के साथ ऐसे एजुकेशन सेंटरों की संख्या तेजी से बढ़ने का दावा किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, ये सेंटर स्वयं को मध्यप्रदेश, उत्तराखंड, महाराष्ट्र, ओडिशा, तेलंगाना, आंध्रप्रदेश और कर्नाटक के विश्वविद्यालयों या संस्थानों से संबद्ध बताते हैं।

मीडिया पड़ताल में यह भी सामने आया कि कई सेंटरों के पास नियमित पढ़ाई कराने के पर्याप्त संसाधन होने के बजाय उनका मुख्य काम काउंसलिंग और एडमिशन कराना बताया गया। छात्रों को दूसरे राज्यों की निजी यूनिवर्सिटी से डिग्री दिलाने का दावा करते हुए 3 से 5 लाख रुपए तक फीस लेने की बात भी सामने आई।

प्रदेश में वर्तमान में केवल एक सरकारी फिजियोथेरेपी कॉलेज संचालित होने और छह नए कॉलेज प्रस्तावित होने की जानकारी रिपोर्ट में दी गई है। इसी बीच 100 से अधिक संस्थानों द्वारा फिजियोथेरेपी कोर्स कराने का दावा किए जाने से शिक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हुए हैं।

WhatsApp पर 4thnation चैनल जॉइन करें

छत्तीसगढ़ में 100 से अधिक सेंटरों का दावा

रिपोर्ट के अनुसार, राजधानी सहित प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में संचालित कई एजुकेशन सेंटर छात्रों को हेल्थकेयर कोर्स में प्रवेश दिलाने के लिए प्रचार कर रहे हैं। इनमें फिजियोथेरेपी के अलावा नर्सिंग, फार्मेसी, डीएमएलटी, लैब टेक्नीशियन और अन्य पैरामेडिकल कोर्स शामिल बताए गए हैं।

इन सेंटरों की सबसे बड़ी विशेषता यह बताई गई कि वे छात्रों को नियमित कॉलेज जाने की आवश्यकता कम या समाप्त होने का भरोसा दिलाते हैं। हालांकि, किसी भी डिग्री की वैधता संबंधित विश्वविद्यालय, नियामक संस्था और आधिकारिक मान्यता पर निर्भर करती है।

मीडिया जांच में यह भी कहा गया कि कई छात्र ऐसे दावों के आधार पर प्रवेश लेने की तैयारी कर रहे हैं, जबकि उन्हें यह स्पष्ट जानकारी नहीं होती कि संबंधित कोर्स की मान्यता, पढ़ाई का माध्यम और व्यावहारिक प्रशिक्षण वास्तव में किस नियम के तहत संचालित होगा।

WhatsApp पर 4thnation चैनल जॉइन करें

Physiotherapy Distance Degree स्टिंग में एजेंटों ने क्या कहा?

मीडिया की स्टिंग जांच में एक एजेंट से डीएमएलटी कोर्स के संबंध में बातचीत की गई। बातचीत में एजेंट ने अटेंडिंग और नॉन-अटेंडिंग दोनों विकल्प होने का दावा किया।

रिपोर्ट के अनुसार, एजेंट ने कहा कि जो छात्र नियमित रूप से कॉलेज नहीं जा सकता, उसके लिए नॉन-अटेंडिंग विकल्प उपलब्ध कराया जा सकता है। इसके लिए अधिक फीस लेने की बात कही गई और यह दावा भी किया गया कि छात्र को केवल परीक्षा देने के लिए मध्यप्रदेश जाना होगा।

एजेंट ने दो वर्षीय कोर्स के लिए अटेंडिंग छात्रों से लगभग 50 हजार रुपए प्रतिवर्ष और नॉन-अटेंडिंग छात्रों से करीब 65 हजार रुपए प्रतिवर्ष फीस लेने की बात कही। साथ ही परीक्षा दिलाने के लिए स्वयं ले जाने और बाद में काउंसिल रजिस्ट्रेशन कराने का भी दावा किया गया।

यहां यह ध्यान देना जरूरी है कि यह बातचीत एजेंट द्वारा किया गया दावा है। इसकी कानूनी वैधता, विश्वविद्यालय की अनुमति और वास्तविक मान्यता की पुष्टि संबंधित आधिकारिक दस्तावेजों से ही की जा सकती है।

नर्सिंग से फिजियोथेरेपी तक हर डिग्री दिलाने का दावा

दूसरे स्टिंग में मेडिकल एजुकेशन काउंसलिंग के नाम से संचालित एक संस्था के संचालक से नर्सिंग कोर्स के बारे में बातचीत की गई। रिपोर्ट के मुताबिक संचालक ने दावा किया कि छात्रा घर पर रहकर पढ़ाई कर सकती है और केवल परीक्षा के समय उपस्थित होना पड़ेगा।

बातचीत में संचालक ने यह भी दावा किया कि मध्यप्रदेश की यूनिवर्सिटी से डिग्री दिलाई जा सकती है। इतना ही नहीं, उसने फार्मेसी, फिजियोथेरेपी, नर्सिंग सहित लगभग हर प्रकार के हेल्थकेयर कोर्स उपलब्ध कराने की बात कही।

ऐसे दावे छात्रों और अभिभावकों के लिए आकर्षक लग सकते हैं, लेकिन किसी भी प्रवेश से पहले यह जांचना आवश्यक है कि संबंधित विश्वविद्यालय को उस कोर्स के लिए नियामक मंजूरी प्राप्त है या नहीं और शिक्षा का माध्यम नियमों के अनुरूप है या नहीं।

Physiotherapy Distance Degree और डिजिटल मार्केटिंग का जाल

मीडिया जांच में सामने आया कि कई एजुकेशन सेंटर छात्रों तक पहुंचने के लिए सोशल मीडिया, गूगल विज्ञापन और अन्य डिजिटल मार्केटिंग माध्यमों का उपयोग कर रहे हैं। इसके अलावा कुछ एजेंसियां स्कूल और कॉलेज परिसरों में भी प्रचार करने जाती हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, छात्रों को बेहतर करियर और जल्दी डिग्री मिलने का भरोसा देकर प्रवेश के लिए प्रेरित किया जाता है। कई मामलों में 3 से 5 लाख रुपए तक फीस लेने की बात सामने आई, जबकि डिग्री की मान्यता को लेकर स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं थी।

यही कारण है कि विशेषज्ञ छात्रों को केवल विज्ञापन देखकर निर्णय नहीं लेने की सलाह देते हैं। किसी भी संस्थान की संबद्धता, विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट और नियामक मंजूरी की जांच करना बेहद जरूरी है।

UGC के नियम क्या कहते हैं?

UGC के Distance Education Bureau (DEB) की आधिकारिक जानकारी के अनुसार फिजियोथेरेपी, नर्सिंग, फार्मेसी और अन्य कई मेडिकल तथा पैरामेडिकल कार्यक्रम Open and Distance Learning (ODL) और Online मोड में प्रतिबंधित श्रेणी में शामिल हैं। UGC छात्रों को प्रवेश लेने से पहले संबंधित उच्च शिक्षण संस्थान की मान्यता और स्वीकृत कार्यक्रम की जानकारी आधिकारिक पोर्टल पर जांचने की सलाह देता है।

UGC-DEB यह भी स्पष्ट करता है कि केवल किसी विश्वविद्यालय का नाम इस्तेमाल करना पर्याप्त नहीं है। छात्रों को यह देखना चाहिए कि जिस शैक्षणिक सत्र में वे प्रवेश ले रहे हैं, उस सत्र के लिए संस्थान और कार्यक्रम वास्तव में मान्यता प्राप्त हैं या नहीं।

इसलिए यदि कोई एजेंट या सेंटर बिना नियमित पढ़ाई के Physiotherapy Distance Degree या अन्य प्रतिबंधित हेल्थकेयर डिग्री दिलाने का दावा करता है, तो छात्रों को उस दावे की स्वतंत्र रूप से आधिकारिक जांच करनी चाहिए। UGC ने फ्रेंचाइजी व्यवस्था और अनधिकृत अध्ययन केंद्रों को लेकर भी सावधानी बरतने की सलाह दी है।

विशेषज्ञ ने क्यों जताई गंभीर चिंता?

रिपोर्ट में इंडियन फिजियोथेरेपी एसोसिएशन छत्तीसगढ़ के सचिव डॉ. अखिलेश साहू का मत प्रकाशित किया गया है। उनके अनुसार फिजियोथेरेपी की पढ़ाई डिस्टेंस मोड में नहीं हो सकती क्योंकि यह ऐसा हेल्थकेयर क्षेत्र है जिसमें व्यावहारिक प्रशिक्षण और गुणवत्तापूर्ण क्लिनिकल शिक्षा अत्यंत महत्वपूर्ण होती है।

उन्होंने यह भी कहा कि फिजियोथेरेपिस्ट को स्वतंत्र रूप से उपचार करने की जिम्मेदारी मिलती है, इसलिए प्रशिक्षण की गुणवत्ता से समझौता मरीजों के लिए भी जोखिम पैदा कर सकता है। यही वजह है कि छात्रों को शॉर्टकट डिग्री के झांसे से बचना चाहिए।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि यदि कोई संस्थान फर्जी या भ्रामक दावा करता है तो उसके खिलाफ कानूनी शिकायत और एफआईआर दर्ज कराई जा सकती है, ताकि शिक्षा के नाम पर होने वाली संभावित धोखाधड़ी को रोका जा सके।

छात्र और अभिभावक कैसे करें सही जांच?

हेल्थकेयर कोर्स में प्रवेश लेने से पहले सबसे पहले संबंधित विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट देखें। केवल एजेंट या काउंसलिंग सेंटर की बात पर भरोसा करने के बजाय विश्वविद्यालय द्वारा जारी प्रवेश सूचना और पाठ्यक्रम की जानकारी जांचें।

दूसरा, UGC-DEB पोर्टल पर यह सत्यापित करें कि संस्थान को संबंधित सत्र के लिए ODL या Online कार्यक्रम चलाने की अनुमति है या नहीं। साथ ही यह भी देखें कि जिस कोर्स में प्रवेश लिया जा रहा है, वह प्रतिबंधित कार्यक्रमों की सूची में तो शामिल नहीं है।

तीसरा, यदि कोई एजेंट केवल परीक्षा दिलाने, बिना कॉलेज गए डिग्री, निश्चित रजिस्ट्रेशन या गारंटी के साथ नौकरी जैसे दावे करता है, तो उसकी लिखित वैधता और संस्थान की आधिकारिक पुष्टि अवश्य लें। फीस जमा करने से पहले सभी दस्तावेज सुरक्षित रखें।

Physiotherapy Distance Degree मामले पर निष्कर्ष

Physiotherapy Distance Degree के नाम पर सामने आई यह पड़ताल छत्तीसगढ़ के छात्रों और अभिभावकों के लिए एक बड़ी चेतावनी है। रिपोर्ट में कई एजुकेशन सेंटरों द्वारा बिना नियमित कॉलेज पढ़ाई के दूसरे राज्यों से हेल्थकेयर डिग्री दिलाने के दावे सामने आए हैं, लेकिन ऐसे दावों की वैधता प्रत्येक संस्थान और संबंधित विश्वविद्यालय की आधिकारिक मान्यता पर निर्भर करती है।

UGC की आधिकारिक व्यवस्था स्पष्ट रूप से फिजियोथेरेपी, नर्सिंग, फार्मेसी और कई अन्य हेल्थकेयर कार्यक्रमों को ODL या Online मोड में प्रतिबंधित श्रेणी में रखती है। इसलिए किसी भी छात्र को प्रवेश लेने से पहले मान्यता, नियामक स्वीकृति, विश्वविद्यालय की संबद्धता और कार्यक्रम की वैधता की जांच स्वयं आधिकारिक स्रोतों से करनी चाहिए। यही सतर्कता भविष्य में आर्थिक नुकसान और शैक्षणिक धोखाधड़ी से बचाने का सबसे मजबूत उपाय है।

One thought on “Physiotherapy Distance Degree: छत्तीसगढ़ में घर बैठे हेल्थकेयर डिग्री का खेल उजागर

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *