Jashpur Murder Case में छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले की अदालत ने एक चर्चित हत्या मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। पति की हत्या कर उसका शव ट्रॉली सूटकेस में छिपाने की दोषी पत्नी को आजीवन कठोर कारावास (उम्रकैद) की सजा सुनाई गई है। अदालत ने कहा कि इस तरह के जघन्य अपराधों में किसी भी प्रकार की नरमी न्याय और समाज, दोनों के हितों के खिलाफ होगी। यह मामला वर्ष 2025 में सामने आया था और पूरे जिले में चर्चा का विषय बना था।
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Jashpur Murder Case में अदालत का फैसला
जशपुर जिले के कुनकुरी स्थित द्वितीय अपर सत्र न्यायालय ने शुक्रवार को आरोपी मंगरीता बाई को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई।
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि हत्या जैसे गंभीर अपराध में नरमी बरतना न्याय व्यवस्था और समाज दोनों के हितों के विपरीत होगा।
साथ ही अदालत ने आरोपी पर आर्थिक जुर्माना भी लगाया।
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क्या है पूरा मामला?
अभियोजन के अनुसार, यह घटना 7 नवंबर 2025 को दुलदुला थाना क्षेत्र के भिंजपुर गांव में हुई थी।
मृतक संतोष भगत और उसकी पत्नी मंगरीता बाई के बीच विवाह के बाद से अक्सर विवाद होता रहता था।
पारिवारिक विवादों के चलते मंगरीता कुछ समय के लिए मुंबई काम करने चली गई थी। गांव लौटने के बाद 7 नवंबर की रात दोनों के बीच कथित रिश्तों को लेकर फिर विवाद हुआ।
विवाद इतना बढ़ गया कि मंगरीता ने कथित तौर पर मसाला पीसने वाले सिलबट्टे के पत्थर से संतोष भगत के सिर पर कई बार वार कर दिए।
गंभीर सिर की चोट और अत्यधिक रक्तस्राव के कारण संतोष भगत की मौके पर ही मौत हो गई।
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Jashpur Murder Case: हत्या के बाद सूटकेस में छिपाया शव
हत्या के बाद आरोपी ने अपराध छिपाने की कोशिश की।
अभियोजन के अनुसार, मंगरीता बाई ने पति के शव को ट्रॉली सूटकेस में रखा, घर के अंदर फैले खून के निशानों को साफ किया और बाहर से घर में ताला लगा दिया।
बताया गया कि उसने शव को ठिकाने लगाने का प्रयास भी किया, लेकिन सूटकेस भारी होने के कारण उसे ले नहीं जा सकी।
इसके बाद वह रायगढ़ के रास्ते मुंबई जाने के इरादे से घर छोड़कर चली गई।
परिजनों को शक होने पर खुला राज
जब संतोष भगत कई दिनों तक घर से बाहर नहीं निकला तो परिजनों को संदेह हुआ।
सूचना मिलने पर पुलिस ने परिजनों की मौजूदगी में घर का ताला तोड़ा। तलाशी के दौरान ट्रॉली सूटकेस के अंदर से संतोष भगत का शव बरामद हुआ, जिसके बाद पूरे क्षेत्र में सनसनी फैल गई।
पुलिस जांच और तकनीकी साक्ष्यों से हुई गिरफ्तारी
जशपुर पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल जांच शुरू की।
तकनीकी साक्ष्यों और अन्य सबूतों के आधार पर पुलिस ने मंगरीता बाई को मुंबई जाते समय गिरफ्तार कर लिया।
जांच पूरी होने के बाद पुलिस ने अदालत में आरोप पत्र (चार्जशीट) प्रस्तुत किया।
इन धाराओं में सुनाई गई सजा
सभी गवाहों, साक्ष्यों और दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने आरोपी को भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 103(1) के तहत हत्या का दोषी ठहराया।
अदालत ने हत्या के अपराध में आजीवन कठोर कारावास और ₹1,000 का जुर्माना लगाया।
इसके अलावा BNS की धारा 238 के तहत साक्ष्य मिटाने के प्रयास के लिए तीन वर्ष के कठोर कारावास और ₹500 के जुर्माने की सजा भी सुनाई गई।
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Jashpur Murder Case में अदालत का फैसला यह संदेश देता है कि हत्या और साक्ष्य छिपाने जैसे गंभीर अपराधों के प्रति न्यायपालिका सख्त रुख अपनाए हुए है। अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में नरमी समाज और न्याय व्यवस्था दोनों के लिए उचित नहीं है। यह फैसला जघन्य अपराधों के खिलाफ कानून की सख्ती और न्यायिक प्रक्रिया की मजबूती को भी दर्शाता है।
