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School Punishment: अंबिकापुर के निजी स्कूल में छात्र से 200 बार गाली लिखवाने का आरोप, DEO ने दिए जांच के आदेश

School Punishment को लेकर छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर से एक विवादित मामला सामने आया है। शहर के बिरला ओपन माइंड इंटरनेशनल स्कूल की एक शिक्षिका पर कक्षा आठवीं के छात्र को कथित तौर पर 200 बार अपशब्द लिखने की सजा देने का आरोप लगा है। घटना सामने आने के बाद छात्र के परिजनों ने नाराजगी जताई है, जबकि सरगुजा जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) ने मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं।

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School Punishment: क्या है पूरा मामला?

जानकारी के अनुसार, 28 जुलाई 2026 को बिरला ओपन माइंड इंटरनेशनल स्कूल में कक्षा आठवीं के दो छात्रों के बीच विवाद हो गया। आरोप है कि दोनों छात्रों ने एक-दूसरे के लिए अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया।

इसी दौरान शिक्षिका ने कथित रूप से एक छात्र को उसकी रफ कॉपी में हिंदी में 100 बार और अंग्रेजी में 100 बार वही अपशब्द लिखने का निर्देश दिया। साथ ही छात्र से कहा गया कि वह कॉपी अपने माता-पिता को दिखाकर उनके हस्ताक्षर करवाकर लाए।

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छात्र के पिता ने जताई नाराजगी

School Punishment मामले में छात्र के पिता ने स्कूल की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यदि बच्चे से गलती हुई थी तो उसे समझाया जा सकता था, लेकिन अपशब्द बार-बार लिखवाना उचित नहीं है।

उन्होंने कहा कि बच्चे ने 200 बार वह शब्द लिखा और संभव है कि लिखते समय उसका उच्चारण भी किया हो। उनका सवाल है कि अभिभावक अपने बच्चों को स्कूल में शिक्षा और संस्कार सीखने भेजते हैं, न कि अपशब्द सीखने।


School Punishment पर अभाविप ने कार्रवाई की मांग की

इस मामले को लेकर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) ने भी जिला शिक्षा अधिकारी से शिकायत कर संबंधित शिक्षिका के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

अभाविप की जिला प्रतिनिधि रोहिणी मिश्रा ने कहा कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित शिक्षिका के खिलाफ उचित कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि कार्रवाई नहीं होने पर संगठन आंदोलन करेगा।


School Punishment मामले में DEO ने दिए जांच के आदेश

सरगुजा के जिला शिक्षा अधिकारी दिनेश झा ने बताया कि मामला उनके संज्ञान में आ गया है। उन्होंने जांच के लिए सहायक संचालक को स्कूल भेजा है।

DEO ने कहा कि जांच रिपोर्ट मिलने के बाद नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि प्रथम दृष्टया इस प्रकार की सजा उचित नहीं प्रतीत होती और शिक्षा संस्थानों में ऐसी घटनाएं नहीं होनी चाहिए।


स्कूलों में अनुशासन और संवेदनशीलता दोनों जरूरी

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि विद्यालयों में अनुशासन बनाए रखना आवश्यक है, लेकिन छात्रों को दंड देने के तरीके संवेदनशील, सम्मानजनक और बाल-अनुकूल होने चाहिए।

यदि किसी छात्र द्वारा अनुचित भाषा का प्रयोग किया जाता है, तो उसे परामर्श, संवाद और सकारात्मक अनुशासन के माध्यम से सुधारने का प्रयास किया जाना चाहिए। मामले की वास्तविक परिस्थितियां और जिम्मेदारी का निर्धारण जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।


क्या होगी आगे की कार्रवाई?

फिलहाल जिला शिक्षा विभाग की जांच जारी है। जांच रिपोर्ट आने के बाद यह स्पष्ट होगा कि शिक्षिका द्वारा अपनाई गई प्रक्रिया स्कूल के नियमों और शिक्षा विभाग के दिशा-निर्देशों के अनुरूप थी या नहीं।

यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित नियमों के तहत आगे की कार्रवाई की जा सकती है।


School Punishment का यह मामला शिक्षा व्यवस्था में अनुशासन और संवेदनशीलता के संतुलन पर महत्वपूर्ण सवाल खड़े करता है। फिलहाल मामले की आधिकारिक जांच जारी है और अंतिम निष्कर्ष जांच रिपोर्ट के आधार पर ही सामने आएगा। ऐसे मामलों में बच्चों के सम्मान, मानसिक स्वास्थ्य और सकारात्मक शिक्षण वातावरण को सर्वोच्च प्राथमिकता देना आवश्यक है।

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