US Iran Conflict एक बार फिर गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है। अमेरिका और सऊदी अरब ने इराक में ईरान समर्थित सशस्त्र समूहों के ठिकानों पर संयुक्त हवाई हमले किए हैं। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, यह कार्रवाई अमेरिकी सैन्य ठिकानों और सऊदी अरब के ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर हाल के ड्रोन हमलों के जवाब में की गई।
अमेरिकी सेना का दावा है कि पिछले 72 घंटों में ईरान समर्थित समूहों की ओर से 30 से अधिक ड्रोन हमलों की कोशिश की गई थी। इसके बाद दोनों देशों ने समन्वित सैन्य अभियान चलाया।
US Iran Conflict: एयरस्ट्राइक क्यों की गई?
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जारी बयान में कहा कि अमेरिकी और सऊदी वायुसेना ने 28 जुलाई को पूर्वी इराक में ईरान समर्थित आतंकवादी ठिकानों पर सटीक हवाई हमले किए।
CENTCOM के मुताबिक, इन ठिकानों का इस्तेमाल हथियारों के भंडारण, रसद और ड्रोन हमलों की योजना बनाने के लिए किया जा रहा था। अमेरिका ने आरोप लगाया कि इन हमलों का निर्देशन ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) कर रही थी।
यह भी पढ़ें: Japan Earthquake: कुमामोटो में शक्तिशाली भूकंप से भारी तबाही, 13 लोगों की मौत, राहत-बचाव अभियान जारी
अमेरिका और सऊदी अरब का क्या कहना है?
US Iran Conflict पर अमेरिकी सेना का कहना है कि फरवरी से अप्रैल 2026 के बीच इराक में अमेरिकी नागरिकों और सैन्य ठिकानों पर 600 से अधिक हमलों या हमले के प्रयास किए गए।
सऊदी अरब के रक्षा मंत्रालय ने भी बयान जारी कर कहा कि हाल के ड्रोन हमले पूर्वी प्रांत और रियाद क्षेत्र के तेल प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने के लिए इराक की सीमा से किए गए थे।
सऊदी सरकार ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 51 के तहत उसे आत्मरक्षा का अधिकार प्राप्त है और उसी अधिकार का प्रयोग करते हुए अमेरिका के साथ मिलकर लक्षित सैन्य कार्रवाई की गई।
साथ ही सऊदी अरब ने यह भी स्पष्ट किया कि उसका उद्देश्य संघर्ष को बढ़ाना नहीं है, लेकिन किसी भी हमले का जवाब देने का अधिकार सुरक्षित रहेगा।
ईरान समर्थित समूहों का दावा और हताहतों की संख्या
इराक के पॉपुलर मोबिलाइजेशन फोर्सेज (PMF) ने स्वीकार किया कि कई सैन्य ठिकानों पर हमले हुए हैं।
समूह के अनुसार, इन हमलों में उसके कई सदस्य मारे गए और कई घायल हुए हैं। अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, शुरुआती जानकारी में कम से कम 10 लड़ाकों के मारे जाने की बात सामने आई है, हालांकि आधिकारिक संख्या की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
हमलों से कई इमारतों और सैन्य परिसरों को भी नुकसान पहुंचा है।
US Iran Conflict के बीच मिसाइल और ड्रोन हमलों का सिलसिला
अमेरिका का दावा है कि हाल ही में ईरान की ओर से मध्य पूर्व स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागी गईं, जिन्हें अमेरिकी रक्षा प्रणाली ने सफलतापूर्वक रोक लिया।
वहीं सऊदी अरब ने भी कहा कि उसने अपने हवाई क्षेत्र में प्रवेश करने वाले कई ड्रोन मार गिराए हैं।
इन घटनाओं के बाद पूरे मध्य पूर्व में सुरक्षा व्यवस्था और सतर्कता बढ़ा दी गई है।
ट्रंप ने क्या कहा?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका इस समय मजबूत स्थिति में है और वह कूटनीतिक समाधान चाहता है।
हालांकि उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि यदि वार्ता विफल होती है तो अमेरिका “कड़ी सैन्य कार्रवाई” करने से पीछे नहीं हटेगा। ट्रंप ने कहा कि वह शांति समझौते के पक्षधर हैं, लेकिन बातचीत जल्द परिणाम देने वाली होनी चाहिए।
नेतन्याहू की अमेरिका यात्रा के बीच बढ़ा तनाव
इसी बीच इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू अमेरिका दौरे पर हैं, जहां उनकी ट्रंप के साथ मध्य पूर्व की सुरक्षा और ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर चर्चा हुई।
दोनों नेताओं ने इस बात पर जोर दिया कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने दिए जाएंगे। साथ ही क्षेत्र में समुद्री व्यापार और होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा पर भी चर्चा हुई।
📢 4thNation WhatsApp चैनल से जुड़ें
👉 https://whatsapp.com/channel/0029VaOjosfFHWq7ssCngl1j
US Iran Conflict लगातार जटिल होता जा रहा है। अमेरिका और सऊदी अरब की संयुक्त एयरस्ट्राइक, इराक में ईरान समर्थित समूहों पर कार्रवाई और ड्रोन-मिसाइल हमलों के दावों ने पूरे मध्य पूर्व में तनाव बढ़ा दिया है। हालांकि अमेरिका और सऊदी अरब इसे आत्मरक्षा की कार्रवाई बता रहे हैं, वहीं क्षेत्रीय हालात पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है। आने वाले दिनों में कूटनीतिक प्रयास सफल होते हैं या सैन्य टकराव और बढ़ता है, यह वैश्विक सुरक्षा के लिए अहम रहेगा।
