Teejan Bai Death की खबर ने पूरे देश के कला और संस्कृति जगत को गहरे शोक में डाल दिया है। छत्तीसगढ़ की प्रसिद्ध पंडवानी लोकगायिका और पद्म विभूषण सम्मानित कलाकार तीजन बाई का रविवार तड़के रायपुर स्थित एम्स (AIIMS) में लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। वह 70 वर्ष की थीं। उनके निधन के साथ भारतीय लोककला ने अपनी सबसे बुलंद आवाजों में से एक को खो दिया।
📢 WhatsApp Channel: Join 4thNation Channel: https://whatsapp.com/channel/0029VaOjosfFHWq7ssCngl1j
Teejan Bai Death: AIIMS रायपुर में ली अंतिम सांस
एम्स रायपुर के चिकित्सकों के अनुसार, तीजन बाई पिछले 27 मई से अस्पताल में भर्ती थीं और लंबे समय से उपचाराधीन थीं। रविवार सुबह करीब 3:15 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली।
उनके निधन की खबर सामने आते ही कला, साहित्य और राजनीति जगत में शोक की लहर दौड़ गई। देशभर से कलाकारों, नेताओं और उनके प्रशंसकों ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
यह भी पढ़ें: Chhattisgarh Cabinet Retreat: IIM रायपुर में AI, सुशासन और विकसित छत्तीसगढ़ के विजन पर हुआ मंथन
पंडवानी की महान साधिका थीं तीजन बाई
छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के गनियारी गांव में वर्ष 1956 में जन्मी तीजन बाई का बचपन बेहद साधारण परिस्थितियों में बीता। कम उम्र से ही उन्हें महाभारत की कथाएं सुनने और सुनाने का शौक था।
सामाजिक विरोध, आर्थिक कठिनाइयों और कई चुनौतियों के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी। अपनी अद्भुत आवाज, प्रभावशाली अभिनय और अनोखी प्रस्तुति शैली के दम पर उन्होंने पंडवानी को गांवों से निकालकर अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाया।
Teejan Bai Death: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जताया दुख
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि तीजन बाई ने अपनी शानदार प्रस्तुतियों से छत्तीसगढ़ की लोककला को वैश्विक पहचान दिलाई।
उन्होंने कहा कि उनका निधन कला और संस्कृति की दुनिया के लिए अपूरणीय क्षति है। प्रधानमंत्री ने उनके परिवार और प्रशंसकों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए उनकी आत्मा की शांति की प्रार्थना की।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने दी श्रद्धांजलि
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय स्वयं एम्स रायपुर पहुंचे और तीजन बाई को श्रद्धांजलि अर्पित की।
उन्होंने कहा कि तीजन बाई ने अपने अद्वितीय गायन, असाधारण प्रतिभा और लोक परंपराओं के संरक्षण के प्रति समर्पण से छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान को विश्व मंच पर स्थापित किया। उनका योगदान सदैव याद रखा जाएगा।
भूपेश बघेल ने बताया छत्तीसगढ़ का अनमोल रत्न
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी तीजन बाई के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया।
उन्होंने कहा कि तीजन बाई छत्तीसगढ़ की अमूल्य धरोहर थीं। पंडवानी परंपरा को जीवित रखने और देश-दुनिया में पहचान दिलाने में उनका योगदान हमेशा याद किया जाएगा।
Teejan Bai Death: देश-विदेश में बिखेरा भारतीय लोककला का जादू
तीजन बाई ने केवल भारत ही नहीं बल्कि अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, जापान, रूस, ऑस्ट्रेलिया और जर्मनी जैसे कई देशों में अपनी प्रस्तुतियां दीं।
उनकी प्रभावशाली मंचीय शैली और दमदार आवाज ने दुनिया भर के दर्शकों को भारतीय लोककला से परिचित कराया। उन्होंने साबित किया कि लोककला भी वैश्विक मंच पर सम्मान हासिल कर सकती है।
पद्म श्री से पद्म विभूषण तक मिला सम्मान
भारतीय लोककला में उनके असाधारण योगदान के लिए तीजन बाई को कई प्रतिष्ठित राष्ट्रीय सम्मानों से नवाजा गया।
उन्हें क्रमशः:
- पद्म श्री
- पद्म भूषण
- पद्म विभूषण
जैसे सर्वोच्च नागरिक सम्मानों से सम्मानित किया गया। पद्म विभूषण भारत का दूसरा सर्वोच्च नागरिक सम्मान है।
पंडवानी कला को नई पहचान देने वाली आवाज
तीजन बाई ने पंडवानी को केवल एक लोक परंपरा नहीं रहने दिया बल्कि उसे आधुनिक मंचों तक पहुंचाया। उनकी प्रस्तुति में गायन, अभिनय और कथावाचन का अनूठा संगम देखने को मिलता था।
आज देश-विदेश में पंडवानी की जो पहचान है, उसमें तीजन बाई का योगदान सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है।
Teejan Bai Death केवल एक महान कलाकार के निधन की खबर नहीं, बल्कि भारतीय लोक संस्कृति के एक स्वर्णिम अध्याय के अंत का प्रतीक है। तीजन बाई ने अपने संघर्ष, समर्पण और अद्वितीय प्रतिभा से पंडवानी को विश्वभर में नई पहचान दिलाई। उनका जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बना रहेगा और भारतीय लोककला में उनका योगदान सदैव अमर रहेगा।
