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Koraput Maoist Arms Recovery: ओडिशा-छत्तीसगढ़ सीमा पर नक्सलियों की बड़ी साजिश नाकाम, भारी मात्रा में हथियार और IED बरामद

Koraput Maoist Arms Recovery के तहत ओडिशा पुलिस ने छत्तीसगढ़ सीमा से लगे जंगल में बड़ी कार्रवाई करते हुए भारी मात्रा में हथियार, गोला-बारूद और इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (IED) बरामद किए हैं। पुलिस का मानना है कि इन हथियारों का इस्तेमाल नक्सली सुरक्षा बलों और आम नागरिकों को निशाना बनाने के लिए करने की योजना बना रहे थे। समय रहते हुई इस कार्रवाई से एक बड़ी नक्सली साजिश विफल हो गई।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार यह ऑपरेशन आत्मसमर्पण कर चुके नक्सलियों से मिली खुफिया जानकारी के आधार पर चलाया गया। सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि बरामद हथियारों और विस्फोटकों का उपयोग किसी बड़े हमले में किया जा सकता था।


Koraput Maoist Arms Recovery में क्या-क्या बरामद हुआ?

शुक्रवार सुबह करीब 6 बजे ओडिशा के कोरापुट जिले के बोइपारीगुड़ा थाना क्षेत्र के टेंटुलीगुम्मा जंगल में जिला स्वैच्छिक बल (DVF) ने सघन तलाशी अभियान चलाया। यह इलाका छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले के दरभा थाना क्षेत्र से सटा हुआ है।

Koraput Maoist Arms Recovery के दौरान सुरक्षा बलों ने जंगल में छिपाकर रखे गए हथियारों और विस्फोटकों का बड़ा जखीरा बरामद किया।

बरामद सामग्री में शामिल हैं—

  • एक देसी रिवॉल्वर
  • छह देसी बंदूकें
  • 11 टिफिन बम (IED), जिनका वजन 300 ग्राम से 8 किलोग्राम तक
  • 25 डेटोनेटर
  • 20 मीटर कॉर्डेक्स वायर
  • .38 कैलिबर के छह कारतूस
  • दो कैमरा फ्लैशलाइट
  • बड़ी मात्रा में गन पाउडर

पुलिस के मुताबिक ये हथियार और विस्फोटक सीपीआई (माओवादी) की आंध्र-ओडिशा बॉर्डर स्पेशल जोनल कमेटी (AOBSZC) के नक्सलियों के हो सकते हैं।

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आत्मसमर्पण कर चुके नक्सलियों से मिली थी अहम सूचना

कोरापुट के पुलिस अधीक्षक रोहित वर्मा ने बताया कि यह पूरी कार्रवाई आत्मसमर्पण कर चुके नक्सलियों से पूछताछ में मिली जानकारी के आधार पर की गई।

उन्होंने कहा कि समय रहते इतनी बड़ी मात्रा में हथियार और विस्फोटक बरामद होने से सुरक्षा बलों और आम नागरिकों पर संभावित हमले को टाल दिया गया है। यह कार्रवाई नक्सलियों की रणनीति को बड़ा झटका देने वाली साबित हुई है।


Koraput Maoist Arms Recovery से नक्सल नेटवर्क को बड़ा झटका

एसपी रोहित वर्मा ने बताया कि पिछले 15 दिनों के भीतर कोरापुट जिले में यह दूसरी बड़ी बरामदगी है। इससे स्पष्ट होता है कि नक्सलियों ने सीमा से लगे जंगलों में कई स्थानों पर भूमिगत हथियार भंडार छिपाकर रखे थे।

उन्होंने कहा कि जिला स्वैच्छिक बल (DVF), स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) और सीमा सुरक्षा बल (BSF) द्वारा नियमित कॉम्बिंग और सर्च ऑपरेशन जारी रहेगा। इसका उद्देश्य छिपाए गए हथियारों, विस्फोटकों और अन्य सामग्री को बरामद कर नक्सली गतिविधियों के दोबारा सक्रिय होने की किसी भी संभावना को खत्म करना है।


कोरापुट को पहले ही घोषित किया जा चुका है नक्सल मुक्त जिला

गौरतलब है कि 31 मार्च को कोरापुट जिले को आधिकारिक रूप से नक्सल मुक्त घोषित किया गया था। यह केंद्र सरकार के वामपंथी उग्रवाद समाप्त करने के अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

पुलिस के अनुसार जनवरी 2025 से मार्च 2026 के बीच जिले में एक नक्सली की गिरफ्तारी हुई, जबकि एक अन्य नक्सली ने आत्मसमर्पण किया। इसके बावजूद सुरक्षा एजेंसियां सीमा क्षेत्रों में लगातार निगरानी बनाए हुए हैं ताकि किसी भी प्रकार की नक्सली गतिविधि फिर से पनप न सके।


सीमा क्षेत्र में पहले भी मिला था हथियारों का जखीरा

इस कार्रवाई से करीब दो सप्ताह पहले भी बोइपारीगुड़ा थाना क्षेत्र के बदलिपहाड़ जंगल से सुरक्षा बलों ने हथियार, गोला-बारूद और IED का बड़ा जखीरा बरामद किया था।

लगातार हो रही इन बरामदगियों से संकेत मिलता है कि नक्सलियों ने क्षेत्र छोड़ने से पहले सीमा के जंगलों में कई गुप्त हथियार भंडार तैयार किए थे। सुरक्षा बल अब ऐसे सभी ठिकानों की पहचान कर उन्हें पूरी तरह नष्ट करने के अभियान में जुटे हैं।


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Koraput Maoist Arms Recovery सुरक्षा एजेंसियों की बड़ी सफलता मानी जा रही है। ओडिशा-छत्तीसगढ़ सीमा से भारी मात्रा में हथियार, IED और विस्फोटक बरामद होने से नक्सलियों की संभावित बड़ी साजिश नाकाम हुई है। लगातार चल रहे कॉम्बिंग ऑपरेशन और खुफिया सूचनाओं के आधार पर हो रही कार्रवाई से स्पष्ट है कि सुरक्षा बल सीमा क्षेत्रों में नक्सली नेटवर्क को पूरी तरह समाप्त करने के लिए लगातार अभियान चला रहे हैं। Koraput Maoist Arms Recovery आने वाले समय में क्षेत्र की सुरक्षा को और मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि साबित हो सकती है।

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